{"_id":"582df43d4f1c1b39298ff3f6","slug":"bejar-market-every-business-notes-on-injury","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाजार बेजार, हर धंधे पर नोट की चोट ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाजार बेजार, हर धंधे पर नोट की चोट
ब्यूरो, अमर उजाला, बांदा
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:47 PM IST
विज्ञापन
बांदा के अनाज बाजार से ग्राहक नदारद।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। बड़े नोटों की बंदी से बाजार भी बेजार हैं। लगभग हर कारोबार औंधे मुंह है। खरीददारों की भीड़ नदारद है और दुकानदार-व्यापारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। दूसरी ओर बैंकों और एटीएम पर भी नोटों की आपाधापी थम नहीं रही है।
विज्ञापन
लोगों की दिक्कतें कम होने के बजाय बढ़ रही हैं। बैंकों पर जरूरतमंदों की भीड़ बढ़ रही है। इसके बाद भी व्यवस्थाएं और उपभोक्ताओं को दी जाने वाली करेंसी घटाई जा रही है। चित्रकूटधाम मंडल के मुख्यालय बांदा के कुछ प्रमुख कारोबारों की पड़ताल करती रिपोर्ट।
विज्ञापन
तीन करोड़ का अनाज व्यापार 25 लाख में सिमटा
जिले में रोजाना दो से तीन करोड़ के अनाज का कारोबार होता है। बड़े नोटों पर प्रतिबंध के बाद यह सिमट कर 25 लाख में आ गया है। सीधे 10 गुना का अंतर पड़ा है। अनाज के थोक व्यापारी महेश गुप्ता, दिनेश गुप्ता, रोहित अग्रहरि ने बताया कि कुछ दुकानें ऐसी हैं, जहां सुबह से शाम तक बोहनी भी नहीं होती। ग्राहक ढूंढे नहीं मिल रहे। बड़े नोटों पर प्रतिबंध का भारी असर पड़ा है।
विज्ञापन
किराना कारोबार पर भी ग्रहण
जिले में रोजाना लगभग सवा करोड़ रुपये किराने का कारोबार होता रहा है। 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद किराना की दुकानों से भी ग्राहकों ने किनारा कर लिया है। किराना कारोबार पर जबरदस्त ग्रहण लगा है। 50 फीसदी व्यापार भी मुश्किल हो गया है।
सिर्फ आटा, तेल, नमक, दाल, चावल इत्यादि रोजमर्रा की जरूरी वस्तुएं बिक रही हैं, वह भी फुटकर। कानपुर से माल की आवक लगभग ठप हो गई है। किराना व्यापारी दिलीप गुप्ता, राकेश साहू, महेश गुप्ता ने बताया कि ऐसे हालात कभी नहीं आए। हालात ऐसे ही रहे तो दुकान बंद हो जाएगी।
फलों का जायका बिगड़ा
इन दिनों मौसमी फलों की भरमार है। सेब, केला, शरीफा, पपीता, अमरूद, अनन्नास, अनार इत्यादि बाजार में भरपूर उपलब्ध हैं। बिक्री भी खूब चल रही थी पर पांच सौ और हजार के नोटों पर प्रतिबंध से फल खाने वालों का ‘जायका’ भी बदल गया।
रोजाना पूरे जिले में 80 से 90 हजार रुपये का थोक व फुटकर कारोबार होता था। अब यह सिमट कर 15 से 20 हजार पर आ गया है। फलों के थोक व्यापारी अबुल, रईस और इमरान ने बताया कि जो भी बिक्री हो रही, उसमें ज्यादातर उधारी है। कानपुर से फलों की आवक भी आधी रह गई है।
सहालग में भी ठंडा बर्तनों का बाजार
शादी ब्याह के लिए इन दिनों शुभ मुहूर्त हैं। हिंदू-मुस्लिम दोनों ही वर्गों में शादियों की सहालग है। ऐसे में बर्तन का व्यापार बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन पिछली सहालगाें की अपेक्षा अबकी उल्टा हुआ है। बिक्री बढ़ने के बजाय घट गई है। बर्तन कारोबारी महेश लाल गुप्ता, दिनेश शिवहरे ने बताया कि प्रतिबंध ने कारोबार की कमर तोड़ दी है। पूरे जिले में इन दिनों लगभग एक लाख तक कारोबार होता था। अब यह घटकर 20-25 हजार पर आ गया है। करेंसी की समस्या के चलते मुरादाबाद, मथुरा के थोक व्यापारी माल नहीं भेज रहे हैं।
सराफा भी सन्नाटे में, बंदी की नौबत
सराफा व्यापारियों को सहालग का बेसब्री से इंतजार रहता है, लेकिन अबकी सन्नाटे में बैठे हैं। बड़े नोटों की बंदी ने सोने और चांदी की चमक-दमक खत्म -सी कर दी है। सराफा बाजार बंदी की हालत में पहुंच गया है। शुरू के दो एक दिन दुकानें खोलने के बाद सराफा बाजार में ताले पड़ गए।
रोजाना लगभग तीन करोड़ रुपये का कारोबार था। अब पूरी तरह ठप है। बाहर से आने वाला माल भी बंद है। सराफा व्यवसायी राधाकृष्ण गोयल, सत्य प्रकाश, संदीप अग्रवाल ने बताया कि बीच में दो दिन बाजार इसलिए बंद रखा कि भाव खराब हो रहे थे। अब सिर्फ इसलिए दुकान में बैठ रहे हैं कि शायद नौकरों का ही खर्च निकल आए। यही हाल रहा तो यह कारोबार और घाटे में चला जाएगा।
कपड़ा व्यवसाय पर मंदी की मार
सहालग के सीजन में कपड़े की बिक्री परवान चढ़ती है। दुकानों में ग्राहकों का जमघट रहता है। अब यह सब नदारद है। कपड़ा व्यवसायी बताते हैं कि नाममात्र का व्यवसाय हो रहा है। इस दिनों एक-एक दुकानदार 70 से 80 हजार तक की बिक्री कर लेता था। अब 10 हजार आना भी दूभर हो गया है। कपड़ा व्यवसायी प्रकाश गुप्ता, दिलीप द्विवेदी और अब्दुल सलीम ने बताया कि वे मंदी की मार से नया माल नहीं मंगा रहे हैं।a