{"_id":"3c70f167281eda3391c75395c2dd03cc","slug":"beat-by-hand-brimming-disability-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हौसलों के हाथ से विकलांगता को मात ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हौसलों के हाथ से विकलांगता को मात
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sun, 25 Oct 2015 11:17 PM IST
विज्ञापन
नरैनी। हिम्मत और हौसले के आगे विकलांगता नतमस्तक हो
विज्ञापन
गई। भूमिहीन आदिवासी मजदूर शारीरिक रूप से विकलांगों के लिए प्रेरणा बना
है। एक हादसे में हाथ का पंजा कटने के बाद उसने हार नहीं मानी। पेट पालने
के लिए मजदूरी के अलावा कोई रास्ता नहीं था, तो कटे हाथ में हंसिया ही बांध
ली।
यहां बात कुरुहूं गांव के रामलाल मवासी की हो रही है। रामलाल का करीब एक दशक पहले दाहिने हाथ का पंजा थ्रेसिंग मशीन से चला गया था। काफी इलाज के बाद जान तो बच गई पर पंजा गंवा बैठे। ठीक होने के बाद रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई।
बाएं हाथ से फसल काटना संभव नहीं था। ऐसे में एक दिन दाएं हाथ के कटे पंजे पर हंसिया बांध ली। आज पचास की उम्र में रामलाल कटे हाथ में बंधी हंसिया से एक सामान्य आदमी की तरह फसल की कटाई करते हैं और अपने नौ सदस्य वाले परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
रामलाल का कहना है कि हाथ कटने के बाद वह लाचार हो गया था। मजदूरी न करने से परिवार पालना मुश्किल हो रहा था। अब हाथ में हंसिया बांध कर काम करना उसकी आदत में है। रामलाल का कहना है कि उसे कभी कोई मदद नहीं मिली। हौसले को किसी ने तवज्जो नहीं दी।
यहां बात कुरुहूं गांव के रामलाल मवासी की हो रही है। रामलाल का करीब एक दशक पहले दाहिने हाथ का पंजा थ्रेसिंग मशीन से चला गया था। काफी इलाज के बाद जान तो बच गई पर पंजा गंवा बैठे। ठीक होने के बाद रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई।
बाएं हाथ से फसल काटना संभव नहीं था। ऐसे में एक दिन दाएं हाथ के कटे पंजे पर हंसिया बांध ली। आज पचास की उम्र में रामलाल कटे हाथ में बंधी हंसिया से एक सामान्य आदमी की तरह फसल की कटाई करते हैं और अपने नौ सदस्य वाले परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
रामलाल का कहना है कि हाथ कटने के बाद वह लाचार हो गया था। मजदूरी न करने से परिवार पालना मुश्किल हो रहा था। अब हाथ में हंसिया बांध कर काम करना उसकी आदत में है। रामलाल का कहना है कि उसे कभी कोई मदद नहीं मिली। हौसले को किसी ने तवज्जो नहीं दी।