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बंधी बांधने से नहर टूटी, 1000 बीघा फसल डूबी
अमर उजाला ब्यूरो बांदा
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:54 PM IST
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गांव के खेतों में नहर से भर गया पानी
- फोटो : अमर उजाला
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पीडब्ल्यूडी (एनएच डिवीजन) के अभियंताओं और ठेकेदारों की लापरवाही ने आधा सैकड़ा से ज्यादा किसानों की खेतों में बोई फसल बर्बाद कर दी। पूरी क्षमता से चल रही केन नहर को मनमाने ढंग से बंद कर देने पर कई जगह से उफना कर टूटी नहर ने चार गांवों की लगभग एक हजार बीघा फसल पानी में डूबो दी। इससे किसानों में काफी आक्रोश है।
इन दिनों रबी फसलों को सिंचाई के लिए मुख्य केन नहर चलाई जा रही है। बांदा ब्रांच में 595 क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। जिससे भरपूर क्षमता से नहर चलने पर यहां आखिरी छोर के गांवों तक पानी पहुंच जाए। इसी बीच सोमवार को यहां की पीडब्ल्यूडी (एनएच यूनिट) ने बांदा-मिर्जापुर नेशनल हाईवे पर शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर महावीरन के पास हाईवे चौड़ा करने के लिए नहर पर बने पुल के दोनों तरफ मिट्टी की बंधी बनाकर नहर का पानी रोक दिया। पतले पाइप से पानी की निकासी का रास्ता बनाने के साथ ही पुल के नीचे से एक रास्ता बना दिया।
पूरी क्षमता से चल रही नहर बंधी से पीछे तिंदवारा गांव तक उफना गई। इसके बाद देर रात नहर कई स्थानों पर टूट गई और तिंदवारी, बड़ोखर खुर्द आदि गांवों के लगभग आधा सैकड़ा खेत जलमग्न हो गए। यहां बाढ़ जैसा नजारा हो गया। इन खेतों का रकबा लगभग एक हजार बीघा बताया जाता है। खेतों में चना, गेहूं, मसूर, धान और सरसों आदि बोया गया था।
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कई सालों के बाद इस बार बारिश होने से खेतों में बोई फसल चौपट देख किसानों में भारी रोष है। खबर मिलते ही सिंचाई प्रखंड के अधिशासी अभियंता ओपी मौर्य और तार बाबू फारुक अहमद आदि मौके पर पहुंच गए। पीडब्ल्यूडी जेई अश्वनी भी पहुंचे। इसके बाद पोकलैंड मशीन मंगाकर आननफानन में नहर की बंधी तुड़वा कर पानी का रास्ता बनवाया गया। टूटी नहर में मिट्टी डालने का काम शुरू कराया।
किसान दीपू दुबे, नन्हें लाल, सुरेंद्र कुमार और संतोष कुमार (बड़ोखर खुर्द) की पीडब्ल्यूडी अभियंता से तीखी झड़प हुई। किसानों का कहना है उन्हें लाखों रुपये की चपत लगी है। कई सालों के बाद फसल में इस बार उम्मीद थी। वह भी खत्म हो गई। इसका मुआवजा कौन देगा ? सिंचाई विभाग या पीडब्ल्यूडी ?
उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ओपी मौर्य ने बताया अपने विभाग के जिलेदार और सींचपाल को मौके पर भेजकर सर्वे कराया जा रहा है कि कितनी फसल डूबकर बर्बाद हुई है। इसकी रिपोर्ट वह पीडब्ल्यूडी और प्रशासन को भेजेंगे। उन्होंने कहा पीडब्ल्यूडी ने जो पाइप डालकर नहर बंद की थी वह पाइप क्षमता से काफी कम थे। इसीलिए नहर उफनाई।
किसान यूनियन ने दी चेतावनी
बांदा। अनाड़ीपन से नहर बांध दिए जाने पर बड़ोखर, तिंदवारा और अलोना आदि गांव के किसानों की फसल डूबने पर भारतीय किसान यूनियन (राजनैतिक) ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा है कि कई सालों से दैवी आपदा से किसान बर्बाद थे।
इस बार बोई गई फसल अच्छी होने की उम्मीद थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी की लापरवाही ने किसानों को नुकसान और सदमा पहुंचाया है। जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और 25 हजार रुपये प्रति बीघा मुआवजा दिया जाए, नहीं तो आंदोलन होगा। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष बलराम तिवारी, महिला मोर्चा अध्यक्ष धीरज शुक्ला, शिवनारायण सिंह, नवल किशोर, सुमनलाल द्विवेदी आदि रहे।
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इन दिनों रबी फसलों को सिंचाई के लिए मुख्य केन नहर चलाई जा रही है। बांदा ब्रांच में 595 क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। जिससे भरपूर क्षमता से नहर चलने पर यहां आखिरी छोर के गांवों तक पानी पहुंच जाए। इसी बीच सोमवार को यहां की पीडब्ल्यूडी (एनएच यूनिट) ने बांदा-मिर्जापुर नेशनल हाईवे पर शहर से करीब तीन किलोमीटर दूर महावीरन के पास हाईवे चौड़ा करने के लिए नहर पर बने पुल के दोनों तरफ मिट्टी की बंधी बनाकर नहर का पानी रोक दिया। पतले पाइप से पानी की निकासी का रास्ता बनाने के साथ ही पुल के नीचे से एक रास्ता बना दिया।
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पूरी क्षमता से चल रही नहर बंधी से पीछे तिंदवारा गांव तक उफना गई। इसके बाद देर रात नहर कई स्थानों पर टूट गई और तिंदवारी, बड़ोखर खुर्द आदि गांवों के लगभग आधा सैकड़ा खेत जलमग्न हो गए। यहां बाढ़ जैसा नजारा हो गया। इन खेतों का रकबा लगभग एक हजार बीघा बताया जाता है। खेतों में चना, गेहूं, मसूर, धान और सरसों आदि बोया गया था।
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कई सालों के बाद इस बार बारिश होने से खेतों में बोई फसल चौपट देख किसानों में भारी रोष है। खबर मिलते ही सिंचाई प्रखंड के अधिशासी अभियंता ओपी मौर्य और तार बाबू फारुक अहमद आदि मौके पर पहुंच गए। पीडब्ल्यूडी जेई अश्वनी भी पहुंचे। इसके बाद पोकलैंड मशीन मंगाकर आननफानन में नहर की बंधी तुड़वा कर पानी का रास्ता बनवाया गया। टूटी नहर में मिट्टी डालने का काम शुरू कराया।
किसान दीपू दुबे, नन्हें लाल, सुरेंद्र कुमार और संतोष कुमार (बड़ोखर खुर्द) की पीडब्ल्यूडी अभियंता से तीखी झड़प हुई। किसानों का कहना है उन्हें लाखों रुपये की चपत लगी है। कई सालों के बाद फसल में इस बार उम्मीद थी। वह भी खत्म हो गई। इसका मुआवजा कौन देगा ? सिंचाई विभाग या पीडब्ल्यूडी ?
उधर, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ओपी मौर्य ने बताया अपने विभाग के जिलेदार और सींचपाल को मौके पर भेजकर सर्वे कराया जा रहा है कि कितनी फसल डूबकर बर्बाद हुई है। इसकी रिपोर्ट वह पीडब्ल्यूडी और प्रशासन को भेजेंगे। उन्होंने कहा पीडब्ल्यूडी ने जो पाइप डालकर नहर बंद की थी वह पाइप क्षमता से काफी कम थे। इसीलिए नहर उफनाई।
किसान यूनियन ने दी चेतावनी
बांदा। अनाड़ीपन से नहर बांध दिए जाने पर बड़ोखर, तिंदवारा और अलोना आदि गांव के किसानों की फसल डूबने पर भारतीय किसान यूनियन (राजनैतिक) ने जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा है कि कई सालों से दैवी आपदा से किसान बर्बाद थे।
इस बार बोई गई फसल अच्छी होने की उम्मीद थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी की लापरवाही ने किसानों को नुकसान और सदमा पहुंचाया है। जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और 25 हजार रुपये प्रति बीघा मुआवजा दिया जाए, नहीं तो आंदोलन होगा। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष बलराम तिवारी, महिला मोर्चा अध्यक्ष धीरज शुक्ला, शिवनारायण सिंह, नवल किशोर, सुमनलाल द्विवेदी आदि रहे।