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पुराने पीएम आवास नहीं बने, नया लक्ष्य भी नहीं मिला
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तिंदवारी में अधूरा पड़ा आवास।
- फोटो : BANDA
बांदा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बनाए जा रहे आवास तीसरी किस्त के अभाव में अधूरे हैं। इससे लाभार्थी परेशान हैं। उधर, चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 के छह माह बीत जाने के बाद भी नए आवासों का लक्ष्य और बजट नहीं मिला। इससे सैकड़ों परिवारों के पक्के मकानों के सपनों पर पानी फिरता नजर रहा है।
जिले को वित्तीय वर्ष 2021-22 में 13,842 आवासों का लक्ष्य मिला था। इनमें 13,042 परिवारों को पहली, दूसरी और तीसरी किस्त मिली है। इन लोगों के आवास बन भी गए हैं, लेकिन 800 ऐसे परिवार हैं, जिन्हें तीसरी किस्त नहीं मिली है, इस कारण से निर्माण पूरा नहीं कर पा रहे। इनके आवास अधूरे पड़े हैं।
उधर, चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए जिले को आवासों का कोई लक्ष्य नहीं मिला। ऐसे में नए लाभार्थी खासे परेशान है। आए दिन ब्लाक व ग्राम विकास अभिकरण विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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चट-चटगन गांव के रमेश का कहना है कि कच्चा मकान है। बारिश के दौरान बड़ी दिक्कत होती है। पक्का मकान बनाने के लिए प्रधान और सचिव को प्रार्थना पत्र दिया है, लेकिन इस साल पीएम आवास का लक्ष्य न आने की बात कह रहे है। लक्ष्य मिलने पर नए आवास स्वीकृत होंगे।
महुआ गांव के शिववरन का कहना है कि पिछले साल आवास स्वीकृत हुआ था। पहली व दूसरी किस्त मिल गई है। तीसरी किस्त का पैसा नहीं मिला है। जल्द किस्त मिलने की आस में गांव वालों से कर्ज लेकर मकान का निर्माण पूरा करा लिया है। हर माह 1500 रुपये ब्याज अदा करना पड़ रहा है।
ब्लाक स्वीकृत बने अधूरे
बबेरू 730 702 28
बड़ोखर 1366 1284 82
बिसंडा 2932 2846 86
जसपुरा 756 569 187
कमासिन 1413 1340 73
महुआ 3084 2920 164
नरैनी 2450 2344 106
तिंदवारी 1111 1037 74
योग 13842 13042 800
पिछले वित्तीय वर्ष के 94 फीसदी से अधिक आवास पूरे हो गए हैं। शेष आवासों का निर्माण जल्द पूरा होगा। चालू वित्तीय वर्ष में नए आवासों का लक्ष्य और बजट नहीं मिला। लक्ष्य मिलने पर नए लाभार्थियों का चयन कराया जाएगा।-वेद प्रकाश मौर्य, मुख्य विकास अधिकारी, बांदा।
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जिले को वित्तीय वर्ष 2021-22 में 13,842 आवासों का लक्ष्य मिला था। इनमें 13,042 परिवारों को पहली, दूसरी और तीसरी किस्त मिली है। इन लोगों के आवास बन भी गए हैं, लेकिन 800 ऐसे परिवार हैं, जिन्हें तीसरी किस्त नहीं मिली है, इस कारण से निर्माण पूरा नहीं कर पा रहे। इनके आवास अधूरे पड़े हैं।
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उधर, चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए जिले को आवासों का कोई लक्ष्य नहीं मिला। ऐसे में नए लाभार्थी खासे परेशान है। आए दिन ब्लाक व ग्राम विकास अभिकरण विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
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चट-चटगन गांव के रमेश का कहना है कि कच्चा मकान है। बारिश के दौरान बड़ी दिक्कत होती है। पक्का मकान बनाने के लिए प्रधान और सचिव को प्रार्थना पत्र दिया है, लेकिन इस साल पीएम आवास का लक्ष्य न आने की बात कह रहे है। लक्ष्य मिलने पर नए आवास स्वीकृत होंगे।
महुआ गांव के शिववरन का कहना है कि पिछले साल आवास स्वीकृत हुआ था। पहली व दूसरी किस्त मिल गई है। तीसरी किस्त का पैसा नहीं मिला है। जल्द किस्त मिलने की आस में गांव वालों से कर्ज लेकर मकान का निर्माण पूरा करा लिया है। हर माह 1500 रुपये ब्याज अदा करना पड़ रहा है।
ब्लाक स्वीकृत बने अधूरे
बबेरू 730 702 28
बड़ोखर 1366 1284 82
बिसंडा 2932 2846 86
जसपुरा 756 569 187
कमासिन 1413 1340 73
महुआ 3084 2920 164
नरैनी 2450 2344 106
तिंदवारी 1111 1037 74
योग 13842 13042 800
पिछले वित्तीय वर्ष के 94 फीसदी से अधिक आवास पूरे हो गए हैं। शेष आवासों का निर्माण जल्द पूरा होगा। चालू वित्तीय वर्ष में नए आवासों का लक्ष्य और बजट नहीं मिला। लक्ष्य मिलने पर नए लाभार्थियों का चयन कराया जाएगा।-वेद प्रकाश मौर्य, मुख्य विकास अधिकारी, बांदा।