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गड्ढों में तब्दील बांदा-टांडा हाईवे हुआ खतरनाक
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तिंदवारी। बांदा-टांडा नेशनल हाईवे पर तकरीबन आधा दर्जन बड़े-बड़े गड्ढे जानलेवा साबित हो रहे हैं। गड्ढों की चपेट में आकर राहगीर आए दिन घायल हो रहे हैं। बाइक चालकों और ई-रिक्शा चालकों को संभालकर निकलना पड़ता है। इस मार्ग से ओवर लोड बालू भरे ट्रकों का भी आवागमन है।
बांदा-टांडा नेशनल हाईवे की लंबाई जिले में महोखर गांव से लेकर बेंदाघाट तक तकरीबन 40 किलोमीटर तक है। इस पूरे मार्ग में तकरीबन 100 से ज्यादा छोटे-बड़े गड्ढे हैं। कस्बे के सिकंदरपुर से लेकर थाने के सामने, सब्जी मंडी के पास और भिड़ौरा तिराहा और बुंदेलखंड पेट्रोल पंप के सामने नेशनल हाईवे पर हुए बड़े-बड़े गड्ढे जानलेवा बने हैं।
बरसात में इन गड्ढों में पानी भर जाता है। राहगीरों, दो पहिया, चार पहिया चालकों को गड्ढे होने का आभास नहीं होता ऐसी स्थिति में जब वाहन गुजरते हैं तो दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। थाने के पास भी जलभराव होने से बड़ा गड्ढा बन गया है, जिससे राहगीर हादसे का शिकार हो रहे हैं।
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नेशनल हाईवे के किनारे-किनारे बसे गांवों में महोखर, कुरसेजा, मुंगुस, तिंदवारी, जसईपुर, माटा, छापर, बेंदाघाट के ग्रामीण गड्ढों से बेहद परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी व नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अभियंताओं से सड़क दुरुस्त कराने की मांग की है।
उधर, नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया की रायबरेली शाखा के प्रोजेक्ट मैनेजर अशोक तिलक का कहना है कि अधिकृत कंपनी का ठेका खत्म हो गया है। सितंबर के अंत तक नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो रही है। इसके बाद काम शुरू होगा। फिलहाल अस्थाई तौर पर कस्बे समेत आसपास के नेशनल हाईवे में हुए गड्ढों को भरवाया जाएगा।
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बांदा-टांडा नेशनल हाईवे की लंबाई जिले में महोखर गांव से लेकर बेंदाघाट तक तकरीबन 40 किलोमीटर तक है। इस पूरे मार्ग में तकरीबन 100 से ज्यादा छोटे-बड़े गड्ढे हैं। कस्बे के सिकंदरपुर से लेकर थाने के सामने, सब्जी मंडी के पास और भिड़ौरा तिराहा और बुंदेलखंड पेट्रोल पंप के सामने नेशनल हाईवे पर हुए बड़े-बड़े गड्ढे जानलेवा बने हैं।
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बरसात में इन गड्ढों में पानी भर जाता है। राहगीरों, दो पहिया, चार पहिया चालकों को गड्ढे होने का आभास नहीं होता ऐसी स्थिति में जब वाहन गुजरते हैं तो दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। थाने के पास भी जलभराव होने से बड़ा गड्ढा बन गया है, जिससे राहगीर हादसे का शिकार हो रहे हैं।
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नेशनल हाईवे के किनारे-किनारे बसे गांवों में महोखर, कुरसेजा, मुंगुस, तिंदवारी, जसईपुर, माटा, छापर, बेंदाघाट के ग्रामीण गड्ढों से बेहद परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी व नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अभियंताओं से सड़क दुरुस्त कराने की मांग की है।
उधर, नेशनल हाईवे अथारिटी ऑफ इंडिया की रायबरेली शाखा के प्रोजेक्ट मैनेजर अशोक तिलक का कहना है कि अधिकृत कंपनी का ठेका खत्म हो गया है। सितंबर के अंत तक नए टेंडर की प्रक्रिया पूरी हो रही है। इसके बाद काम शुरू होगा। फिलहाल अस्थाई तौर पर कस्बे समेत आसपास के नेशनल हाईवे में हुए गड्ढों को भरवाया जाएगा।