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सजा के साथ कमाई: जेल में 200 से अधिक बंदियों ने मजदूरी कर कमाए रुपये, प्रशासन ने मांग पर पैसा भेजा घर

Tue, 03 Jan 2023 03:47 PM IST
कानपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा Published by: कानपुर ब्यूरो Updated Tue, 03 Jan 2023 03:47 PM IST
सार

जिला जेल के बंदियों ने सजा काटते हुए मजदूरी कर अच्छी रकम जुटाई है, जिसे बंदियों की मांग पर जेल प्रशासन ने उनके घर भेज दिया है। इस रकम से किसी ने बेटी की शादी की है, तो किसी ने बेटे की पढ़ाई पर खर्च किया है।

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More than 200 prisoners earned money by doing wages in Banda District Jail
बांदा जेल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

बांदा जिले में अपने गुनाह की सजा काट रहे कैदियों ने जेल में मजदूरी कर अच्छी खासी रकम जुटाई है। यह रकम किसी ने बेटी की शादी तो किसी ने बेटे की पढ़ाई के लिए भेजी है। किसी ने बूढ़े पिता की दवा के लिए रुपये भेजे हैं। मंडल कारागार में 580 कैदी और 322 बंदी हैं।

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इनमें 200 से अधिक जेल में ही मजदूरी करते हैं। इन्हें शासन की ओर से कुशल व अकुशल के मानक के अनुसार पारिश्रमिक दिया जाता है। दहेज हत्या के जुर्म में पांच साल से जेल में बंद बदौसा की संगीता ने 55,255 रुपये जुटाए हैं।
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अब उसका स्थानांतरण चित्रकूट जेल हो गया है। जेल प्रशासन ने यह पारिश्रमिक चेक के माध्यम से उसके घर भेजा है। इसी तरह हत्या के जुर्म में 20 साल की सजा काट रहे बबेरू के श्रीलाल ने जेल में मजदूरी कर 32 हजार रुपये जुटाए हैं।

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उन्होंने बेटे की पढ़ाई को जारी रखने के लिए यह पैसा घर भेजा है। इसी प्रकार हत्या के जुर्म में बंद गोरेलाल ने घर में बूढ़े और बीमार माता पिता के इलाज व दवा के लिए 44,858 रुपये कमाए हैं।

कैदी को दी जाने वाली मजदूरी
जेल में मजदूरी करने वाले कुशल मजदूर को 40 रुपये व अकुशल को 30 और अकुशल महिला को 25 रुपये रोजाना की मजदूरी दी जाती है। यह मजदूरी बंदी को रिहाई के समय नकद व चेक से दी जाती है। कैदी की मांग पर यह पैसा उसके घर चेक के जरिये भेज दिया जाता है।

कैदी/बंदी               भुगतान
संगीता                 55,255
गोरेलाल               44,859
रामकेश               10,639
श्रीलाल                32,225
कल्ली                 20,500
राजेश                 22,950
अखिलेश सिंह        19,025
कालीचरन            24,200
रहीस                  17,469
कल्लू उर्फ बच्चा      25,075

200 के करीब बंदी बागवानी, खाना बनाने, खेती बाड़ी आदि कार्य करते है। शासन द्वारा निर्धारत पारिश्रमिक दिया जाता है। यूं तो पारिश्रमिक बंदी को रिहाई के समय दिया जाता है, लेकिन बंदी की मांग पर पहले भी दे दिया जाता है।  -वीरेंद्र कुमार, प्रभारी अधीक्षक कारागार, बांदा

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