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बांदा : देश आजाद कराने के लिए तीन बार जेल गए थे पंडित हीरालाल, नमक आंदोलन में लिया था बढ़कर हिस्सा, जुर्माना भी लगाया था

Fri, 12 Aug 2022 12:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2022 12:03 AM IST
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Banda: Pandit Hiralal had gone to jail thrice to liberate the country, took more part in the salt movement, also imposed a fine
अतर्रा। देश को आजाद कराने में पंडित हीरालाल मिश्रा को अंग्रेजी सरकार ने तीन बार 1929, 1931, 1932 में जेल भेजा था। एक बार बांदा जेल, दो बार मलाका जेल (प्रयागराज) में बंद रहे। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और हेमवती नंदन बहुगुणा भी उनके घर आए थे।
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पंडित हीरालाल मिश्रा के पुत्र नर्मदा प्रसाद मिश्रा ने बताया कि मूल रूप से ब्यूर (वर्तमान में चित्रकूट, तब बांदा में शामिल था) निवासी पंडित हीरालाल मिश्रा का जन्म 1917 में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भौंरी कॉलेज से प्राप्त की थी। उनका विवाह चकौंध गांव में जगदइया देवी से हुआ था। 24 जनवरी 1942 से 1944 तक महात्मा गांधी से प्रेरित होकर भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था।
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आजादी के लड़ाी में भाग लेने पर 1929 में उन्हें मलाका जेल (प्रयागराज) में बंद कर दिया गया था। उनकी मां सुंदरिया देवी के घायल होने पर पैरोल पर एक माह तक बाहर रहे। सन 1930 में नमक सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने पर छह माह की जेल व 50 रुपये जुर्माना व दोबारा फिर पकड़े जाने पर एक साल की जेल व 35 रुपये जुर्माना लगाया गया था। नर्मदा प्रसाद मिश्रा 1971 से अतर्रा के नरैनी रोड में रह रहे हैं।
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आजीवन ब्यूर गांव के प्रधान रहे हीरालाल मिश्रा
पंडित हीरालाल मिश्रा आजीवन ब्यूर के प्रधान रहे। सन 1957 से 1962 की पंचवर्षीय योजना में वे जिला परिषद बांदा में तत्कालीन अध्यक्ष बलबीर सिंह के कार्यकाल में जिला उपाध्यक्ष के तौर पर चुने गए थे। भौंरी में कृषक इंटर कॉलेज की स्थापना की थी। उन्होंने अपना पूरा जीवन देश को आजादी दिलाने के लिए न्यौछावर कर दिया। वह 1955 से एक दशक तक कांग्रेस जिलाध्यक्ष के साथ-साथ चुनाव अधिकारी भी रहे। आजाद देश में हेमवती नंदन बहुगुणा का दौरा बांदा में था। वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित हीरालाल मिश्रा के घर ब्यूर आए और दो दिन रुके थे। बांदा में सूखा पड़ने पर 1957 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उनके निवास पर मिलने आईं थीं।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का प्रमाण पत्र
नर्मदा प्रसाद मिश्रा अपने पिता से जुड़ी वस्तु को धरोहर के तौर पर सहेज कर रखे हुए हैं। इसमें रेलवे की ओर से प्रथम श्रेणी पर यात्रा करने का प्रमाण पत्र, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का परिचय पत्र, सजा व अर्थदंड का प्रमाण पत्र शामिल है।
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