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मेडिकल संविदा कर्मियों का मुद्दा सीएम तक पहुंचा
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बांदा। राजकीय मेडिकल कालेज में कार्यरत डेढ़ सैकड़ा संविदा (आउट सोर्सिंग) कर्मियों के वेतन में कटौती, रिकवरी और कई माह से भुगतान पर रोक का मुद्दा मुख्यमंत्री तक पहुंच गया है। संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने शनिवार (25 जनवरी) को मुख्यमंत्री से मिलकर उन्हें सौंपे पत्र में संविदा कर्मियों के वेतन में लगभग 50 लाख रुपये की धांधली के आरोप लगाए हैं। प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक मुख्यमंत्री ने जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
संविदा कर्मियों का यह मुद्दा काफी दिनों से चल रहा है। पिछले करीब एक सप्ताह से यह फिर गरमा गया है। महिला-पुरुष संविदा कर्मी यहां आयुक्त और डीएम कार्यालयों में प्रदर्शन के बाद ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। शनिवार (25 जनवरी) को संयुक्त स्वास्थ्य आउट सोर्सिंग/संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रीतेश मल्ल और महामंत्री सच्चितानंद मिश्र लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। उन्हें अपने संयुक्त हस्ताक्षरों से सौंपे ज्ञापन में कहा है कि बांदा मेडिकल कालेज में समूह ग के 125 संविदा कर्मी प्राइवेट कंपनी द्वारा रखे गए हैं। इन्हें जुलाई 2019 तक उद्योग निगम के निर्धारित वेतनमान के अनुसार वेतन दिया गया। इसके बाद अगस्त से दिसंबर 2019 (तीन माह) के दिए गए वेतन में 10-10 हजार रुपये की कटौती कर दी गई। इसके पहले जून और जुलाई के दिए गए वेतन से 10-10 हजार रुपये प्रतिमाह रिकवरी कर ली गई।
ज्ञापन में कहा है कि लगभग 21 लाख रुपये की रिकवरी और 30 लाख रुपये वेतन कम दिया गया। मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य ने रिकवरी के लिए महानिदेशक चिकित्सा के 15 अप्रैल 2019 का हवाला दिया है। जबकि यह आदेश नए पदों के लिए जारी किया गया था। पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों का वेतन कम करने अथवा कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए नए फर्म को कोई दिशा-निर्देश नहीं था। प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से बताया कि इसे लेकर संविदा कर्मियों में काफी रोष है। मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि संविदा कर्मियों को पुराने रेट से वेतन दिया जाए और रिकवरी की गई राशि वापस दिलवाई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बांदा मेडिकल कालेज में कौन-कौन सी सेवा प्रदाता फर्म मानव आपूर्ति करेगी। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जल्द ही इसकी जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह जानकारी संघ की बांदा यूनिट अध्यक्ष रमा ने दी।
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संविदा कर्मियों का यह मुद्दा काफी दिनों से चल रहा है। पिछले करीब एक सप्ताह से यह फिर गरमा गया है। महिला-पुरुष संविदा कर्मी यहां आयुक्त और डीएम कार्यालयों में प्रदर्शन के बाद ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। शनिवार (25 जनवरी) को संयुक्त स्वास्थ्य आउट सोर्सिंग/संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष रीतेश मल्ल और महामंत्री सच्चितानंद मिश्र लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। उन्हें अपने संयुक्त हस्ताक्षरों से सौंपे ज्ञापन में कहा है कि बांदा मेडिकल कालेज में समूह ग के 125 संविदा कर्मी प्राइवेट कंपनी द्वारा रखे गए हैं। इन्हें जुलाई 2019 तक उद्योग निगम के निर्धारित वेतनमान के अनुसार वेतन दिया गया। इसके बाद अगस्त से दिसंबर 2019 (तीन माह) के दिए गए वेतन में 10-10 हजार रुपये की कटौती कर दी गई। इसके पहले जून और जुलाई के दिए गए वेतन से 10-10 हजार रुपये प्रतिमाह रिकवरी कर ली गई।
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ज्ञापन में कहा है कि लगभग 21 लाख रुपये की रिकवरी और 30 लाख रुपये वेतन कम दिया गया। मेडिकल कालेज प्रधानाचार्य ने रिकवरी के लिए महानिदेशक चिकित्सा के 15 अप्रैल 2019 का हवाला दिया है। जबकि यह आदेश नए पदों के लिए जारी किया गया था। पूर्व से कार्यरत कर्मचारियों का वेतन कम करने अथवा कर्मचारियों की आपूर्ति के लिए नए फर्म को कोई दिशा-निर्देश नहीं था। प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से बताया कि इसे लेकर संविदा कर्मियों में काफी रोष है। मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि संविदा कर्मियों को पुराने रेट से वेतन दिया जाए और रिकवरी की गई राशि वापस दिलवाई जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बांदा मेडिकल कालेज में कौन-कौन सी सेवा प्रदाता फर्म मानव आपूर्ति करेगी। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि मुख्यमंत्री ने जल्द ही इसकी जांच और सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह जानकारी संघ की बांदा यूनिट अध्यक्ष रमा ने दी।
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