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Banda News: लाखों खर्च के बाद भी कम नहीं हो रहा कुपोषण
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फोटो 11 बीएनडीपी 14- जिला अस्पताल के एनआरसी में कुपोषित बच्चे। संवाद
- फोटो : BANDA
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बांदा। शासन के लाख कोशिशों के बाद भी जिले में कुपोषित बच्चों का आंकड़ा कम नहीं हो रहा है। जिले में अभी भी करीब दो हजार बच्चे कुपोषित हैं। जबकि हर माह बच्चों को पोषित करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए लाखों का बजट खपाया जा रहा है।
शासन के आदेश पर सितंबर माह में चलाए गए पोषण अभियान के तहत जिले के 1705 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन लिया गया। इसमें 7,607 बच्चे कुपोषित व 2,317 बच्चेे अति कुपोषित पाए गए। इसमें 6,175 कुपोषित व 1,785 अति कुपोषित बच्चे बेहतर चिकित्सा, देखभाल व पौष्टिक आहार मिलने से सुपोषित हो गए, जबकि 1,964 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं, जिनका जिला अस्पताल के कुपोषण वार्ड सहित सीएचसी में इलाज चल रहा है।
सरकार कुपोषित बच्चों के आहार के लिए प्रति माह लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन योजनाओं का लाभ गरीब बच्चों को नहीं मिल रहा है। कई आंगनबाड़ी केंद्र केवल कागजों पर संचालित हैं। कभी कभार एक घंटे को खुलने के बाद बंद हो जाते हैं।
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योजनाओं की मॉनीटरिंग का दायित्व सुपरवाइजरों को दिया गया है, लेकिन वह घर बैठे निरीक्षण कर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का प्रति मंगलवार को स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्हें विटामिन की गोलियां भी नहीं दी जा रही हैं। पोषाहार का वितरण भी आधा अधूरा हो रहा है। इससे कुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। सितंबर में चलाए गए पोषण अभियान में एकमुश्त नौ हजार से अधिक बच्चे कुपोषित पाए गए।
400 किशोरियां एनीमिया की शिकार
पोषण अभियान के तहत 400 किशोरियां ऐसी पाई गईं जिनमें खून की बेहद कमी थी। विभाग ने किशोरियों को चिह्नित कर उन्हें समय-समय पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया। इसमें 355 किशोरियों के खून की कमी पूरी हो गई। 45 किशोरियों अभी भी एनीमिया से ग्रसित हैं।
बच्चों को दिया जाने वाला पौष्टिक आहार
बच्चों को प्रतिमाह 1.50 किलो दलिया, इतना ही चावल, दो किलो चना दाल, 455 ग्राम सोयाबीन खाद्य तेल, 200 ग्राम दूध, फल व हरी सब्जियां दी जाती हैं।
पोषण वाटिका में तैयार की जाती हैं सब्जियां
शासन के आदेश पर आंगनबाड़ी केंद्रों में कुपोषित, अतिकुपोषित बच्चों को हरी सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए पोषण वाटिका बनाई गई है। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों में भूमि उपलब्ध नहीं है। वहां पर कुपोषित बच्चों के परिजनों के घर पर पोषण वाटिका बनाई जाती है। विभाग की ओर से परिजनों को बीज, खाद मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। जनपद में इस तरह की 1567 पोषण वाटिका हैं।
कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों की बेहतर देखभाल कराई जाती है। पौष्टिक आहार दिया जाता है। जिसका परिणाम है कि तीन माह में सात हजार बच्चे सुपोषित हुए हैं। शेष दो हजार के आपपास बच्चे भी जल्द ही सुपोषित करने का प्रयास किया जा रहा है।-केएन तिवारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बांदा।
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शासन के आदेश पर सितंबर माह में चलाए गए पोषण अभियान के तहत जिले के 1705 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों का वजन लिया गया। इसमें 7,607 बच्चे कुपोषित व 2,317 बच्चेे अति कुपोषित पाए गए। इसमें 6,175 कुपोषित व 1,785 अति कुपोषित बच्चे बेहतर चिकित्सा, देखभाल व पौष्टिक आहार मिलने से सुपोषित हो गए, जबकि 1,964 बच्चे कुपोषण की चपेट में हैं, जिनका जिला अस्पताल के कुपोषण वार्ड सहित सीएचसी में इलाज चल रहा है।
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सरकार कुपोषित बच्चों के आहार के लिए प्रति माह लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन योजनाओं का लाभ गरीब बच्चों को नहीं मिल रहा है। कई आंगनबाड़ी केंद्र केवल कागजों पर संचालित हैं। कभी कभार एक घंटे को खुलने के बाद बंद हो जाते हैं।
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योजनाओं की मॉनीटरिंग का दायित्व सुपरवाइजरों को दिया गया है, लेकिन वह घर बैठे निरीक्षण कर रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का प्रति मंगलवार को स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। उन्हें विटामिन की गोलियां भी नहीं दी जा रही हैं। पोषाहार का वितरण भी आधा अधूरा हो रहा है। इससे कुपोषित बच्चों की संख्या कम नहीं हो रही है। सितंबर में चलाए गए पोषण अभियान में एकमुश्त नौ हजार से अधिक बच्चे कुपोषित पाए गए।
400 किशोरियां एनीमिया की शिकार
पोषण अभियान के तहत 400 किशोरियां ऐसी पाई गईं जिनमें खून की बेहद कमी थी। विभाग ने किशोरियों को चिह्नित कर उन्हें समय-समय पर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया। इसमें 355 किशोरियों के खून की कमी पूरी हो गई। 45 किशोरियों अभी भी एनीमिया से ग्रसित हैं।
बच्चों को दिया जाने वाला पौष्टिक आहार
बच्चों को प्रतिमाह 1.50 किलो दलिया, इतना ही चावल, दो किलो चना दाल, 455 ग्राम सोयाबीन खाद्य तेल, 200 ग्राम दूध, फल व हरी सब्जियां दी जाती हैं।
पोषण वाटिका में तैयार की जाती हैं सब्जियां
शासन के आदेश पर आंगनबाड़ी केंद्रों में कुपोषित, अतिकुपोषित बच्चों को हरी सब्जियां उपलब्ध कराने के लिए पोषण वाटिका बनाई गई है। जिन आंगनबाड़ी केंद्रों में भूमि उपलब्ध नहीं है। वहां पर कुपोषित बच्चों के परिजनों के घर पर पोषण वाटिका बनाई जाती है। विभाग की ओर से परिजनों को बीज, खाद मुफ्त उपलब्ध कराया जाता है। जनपद में इस तरह की 1567 पोषण वाटिका हैं।
कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों की बेहतर देखभाल कराई जाती है। पौष्टिक आहार दिया जाता है। जिसका परिणाम है कि तीन माह में सात हजार बच्चे सुपोषित हुए हैं। शेष दो हजार के आपपास बच्चे भी जल्द ही सुपोषित करने का प्रयास किया जा रहा है।-केएन तिवारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, बांदा।