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Banda News: दो बोरी डीएपी के लिए केंद्रों में मारामारी
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फोटो 07 बीएनडीपी 10- मंडी समिति के खाद बिक्री केंद्र में खड़े किसान। संवाद
- फोटो : BANDA
बांदा। धान की कटाई के बाद किसान अब गेहूं बुवाई की तैयारियों में जुटा है। डीएपी न मिलने से किसान परेशान हैं। क्रय केंद्रों में दो-दो बोरी डीएपी के लिए किसान सुबह से शाम तक लाइन लगाए रहते हैं। इसके बाद भी खाद नहीं मिल पा रही है। प्रशासन के अब तक दावे फेल हैं, डीएपी की किल्लत बरकरार है।
जनपद में बारिश के कारण धान की फसल की देर से कटाई हुई है। पलेवा करने के बाद किसान बुवाई के लिए डीएपी के लिए भटक रहे हैं। खाद क्रय केंद्रों में किसान दो-दो बोरी डीएपी के लिए दिन-दिन भर लाइन में लगे रहते हैं। लेकिन उसे खाद नहीं मिल पा रही है।
मंडी समिति में स्थित खाद क्रय केंद्र में मौजूद मवई के किसान रामभरोसे ने बताया कि दो दिन से आ रहे हैं लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है। क्रय केंद्र प्रभारी रोजाना 100 टोकन बांट रहे हैं। लेकिन वितरण 50 किसानों को करते हैं। शेष किसानों को दूसरे दिन लाइन में लगनी पड़ती है।
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दो दिन बाद नंबर आने पर महज दो बोरी डीएपी दी जाती है। ऐसे में उन्हें 20 बीघा जमीन की बुवाई के लिए खाद लेने में दस दिन का समय गंवाना पड़ेगा। तब तक जमीन की नमी उड़ जाएगी। हजारों रुपये का खर्च बढ़ जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि जनपद में एक रैक 1080 मीट्रिक टन डीएपी आ चुकी है। जो मांग के अनुरूप सहकारी समितियों में भेजी जा रही है। खाद की कोई कमी नहीं है। किसान खाद खत्म होने के भय से जबरन स्टाक कर रहे हैं। इससे भीड़ बढ़ रही है।
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जनपद में बारिश के कारण धान की फसल की देर से कटाई हुई है। पलेवा करने के बाद किसान बुवाई के लिए डीएपी के लिए भटक रहे हैं। खाद क्रय केंद्रों में किसान दो-दो बोरी डीएपी के लिए दिन-दिन भर लाइन में लगे रहते हैं। लेकिन उसे खाद नहीं मिल पा रही है।
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मंडी समिति में स्थित खाद क्रय केंद्र में मौजूद मवई के किसान रामभरोसे ने बताया कि दो दिन से आ रहे हैं लेकिन खाद नहीं मिल पा रही है। क्रय केंद्र प्रभारी रोजाना 100 टोकन बांट रहे हैं। लेकिन वितरण 50 किसानों को करते हैं। शेष किसानों को दूसरे दिन लाइन में लगनी पड़ती है।
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दो दिन बाद नंबर आने पर महज दो बोरी डीएपी दी जाती है। ऐसे में उन्हें 20 बीघा जमीन की बुवाई के लिए खाद लेने में दस दिन का समय गंवाना पड़ेगा। तब तक जमीन की नमी उड़ जाएगी। हजारों रुपये का खर्च बढ़ जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार का कहना है कि जनपद में एक रैक 1080 मीट्रिक टन डीएपी आ चुकी है। जो मांग के अनुरूप सहकारी समितियों में भेजी जा रही है। खाद की कोई कमी नहीं है। किसान खाद खत्म होने के भय से जबरन स्टाक कर रहे हैं। इससे भीड़ बढ़ रही है।