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बांदा: खाद के लिए किसानों में मारामारी
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खाद के लिए लाइन में धक्कामुक्की करते किसान।
- फोटो : BANDA
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बांदा। जिले में डीएपी पर्याप्त मात्रा में होने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। खाद के लिए किसानों में मारामारी मची है। टोकन के लिए सुबह तीन बजे से लाइन लगाने के बाद भी किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। इससे किसान रबी की बुवाई नहीं कर पा रहा है। जिन्होंने बिना खाद के बुआई कर दी है, उन्हें खाद न मिलने से फसल के बर्बाद होने का डर सता रहा है।
धान कटाई के बाद किसानों ने रबी के लिए खेत तैयार कर लिए है। बुआई के लिए किसानों को डीएपी की जरूरत है पर खाद न मिलने से किसान परेशान हैं। मंगलवार को मंडी समिति में स्थित उर्वरक केंद्रों में किसानों की लंबी लाइन लगी रही। एक-एक बोरी खाद के लिए मारामारी मची थी।
समितियों में किसान को महज दो बोरी खाद दी जा रही है। जिसे लेकर किसानों में खासा असंतोष है। किसानों का कहना था कि दो बोरी खाद से उनका भला होने वाला नहीं है। किसानों ने सिस्टम पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है तो किसानों को क्यों नहीं मिल रही है। लक्ष्य से अधिक खाद का वितरण हो चुका है तो खाद गई कहां।
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सैमरी के किसान समर सिंह का कहना है कि तीन दिन से खाद के लिए लाइन में लग रहे है पर खाद नहीं मिल रही। जब नंबर आता है तब तक खाद खत्म हो जाती है। खाद न मिलने से बुआई नहीं हो पा रही है। जल्द खाद न मिली तो खेतों की नमी उड़ जाएगी और बीज अंकुरित नहीं होगा।
परसौडा के पवन कुमार का कहना है कि सुबह तीन बजे से लाइन लगाने के बाद दो बोरी खाद मिलती है। कई दिन तो ऐसा होता है कि दिन भर लाइन में लगने के बाद खाली हाथ ही लौटना पड़ता है। खेत में रबी की फसल बो चुके है एक दो दिन खाद न मिली तो फसल खराब हो जाएगी।
सहेवा के किसान गंगा प्रसाद का कहना है कि राजकीय उर्वरक केंद्रों में खाद मिल नहीं रही। बाजार में खाद दो गुने दामों पर बेची जा रही है। अधिक पैसा देने के बाद भी अच्छी खाद की गारंटी नहीं है। बाजार से खाद खरीदने में डर लगता है। कही पैसा देने बाद भी नकली खाद न पकड़ा दी जाए।
जमालपुर के किसान राजा भैया कहते हैं कि सुबह से लाइन में लगने के बाद दो बोरी खाद मिल रही है। 50 बीघा जमीन में दो बोरी खाद क्या होगी। ऐेसे में तो पूरे माह खाद के लिए ही लाइन लगानी पड़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि स्टाक कम है थोडी-थोडी खाद से काम चलाओ।
लक्ष्य से अधिक खाद वितरण का दावा
बांदा। उप आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता वीरेंद्र बाबू ने बताया कि जनपद में अक्तूबर माह में 2207 मीट्रिक टन खाद वितरण किया जाना था। जिसमें 3764 मीट्रिक टन डीएपी वितरित की जा चुकी है। नवंबर माह में 100 मीट्रिक टन खाद का लक्ष्य है जबकि 200 मीट्रिक टन खाद वितरित की जा चुकी है। समितियों में अभी भी 100 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है जिसका वितरण किया जा रहा है।
वर्जन
अक्तूबर माह में लक्ष्य के सापेक्ष 170 फीसदी खाद का वितरण किया गया है। नवंबर माह में खाद का वितरण किया जा रहा है। स्टॉक में खाद कम है। दो रैक डीएपी खाद की मांग की गई है। उसके आने पर खाद की किल्लत समाप्त हो जाएगी।- विजय कुमार, उप निदेशक (कृषि) चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।
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धान कटाई के बाद किसानों ने रबी के लिए खेत तैयार कर लिए है। बुआई के लिए किसानों को डीएपी की जरूरत है पर खाद न मिलने से किसान परेशान हैं। मंगलवार को मंडी समिति में स्थित उर्वरक केंद्रों में किसानों की लंबी लाइन लगी रही। एक-एक बोरी खाद के लिए मारामारी मची थी।
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समितियों में किसान को महज दो बोरी खाद दी जा रही है। जिसे लेकर किसानों में खासा असंतोष है। किसानों का कहना था कि दो बोरी खाद से उनका भला होने वाला नहीं है। किसानों ने सिस्टम पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जिले में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है तो किसानों को क्यों नहीं मिल रही है। लक्ष्य से अधिक खाद का वितरण हो चुका है तो खाद गई कहां।
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सैमरी के किसान समर सिंह का कहना है कि तीन दिन से खाद के लिए लाइन में लग रहे है पर खाद नहीं मिल रही। जब नंबर आता है तब तक खाद खत्म हो जाती है। खाद न मिलने से बुआई नहीं हो पा रही है। जल्द खाद न मिली तो खेतों की नमी उड़ जाएगी और बीज अंकुरित नहीं होगा।
परसौडा के पवन कुमार का कहना है कि सुबह तीन बजे से लाइन लगाने के बाद दो बोरी खाद मिलती है। कई दिन तो ऐसा होता है कि दिन भर लाइन में लगने के बाद खाली हाथ ही लौटना पड़ता है। खेत में रबी की फसल बो चुके है एक दो दिन खाद न मिली तो फसल खराब हो जाएगी।
सहेवा के किसान गंगा प्रसाद का कहना है कि राजकीय उर्वरक केंद्रों में खाद मिल नहीं रही। बाजार में खाद दो गुने दामों पर बेची जा रही है। अधिक पैसा देने के बाद भी अच्छी खाद की गारंटी नहीं है। बाजार से खाद खरीदने में डर लगता है। कही पैसा देने बाद भी नकली खाद न पकड़ा दी जाए।
जमालपुर के किसान राजा भैया कहते हैं कि सुबह से लाइन में लगने के बाद दो बोरी खाद मिल रही है। 50 बीघा जमीन में दो बोरी खाद क्या होगी। ऐेसे में तो पूरे माह खाद के लिए ही लाइन लगानी पड़ेगी। अधिकारियों का कहना है कि स्टाक कम है थोडी-थोडी खाद से काम चलाओ।
लक्ष्य से अधिक खाद वितरण का दावा
बांदा। उप आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता वीरेंद्र बाबू ने बताया कि जनपद में अक्तूबर माह में 2207 मीट्रिक टन खाद वितरण किया जाना था। जिसमें 3764 मीट्रिक टन डीएपी वितरित की जा चुकी है। नवंबर माह में 100 मीट्रिक टन खाद का लक्ष्य है जबकि 200 मीट्रिक टन खाद वितरित की जा चुकी है। समितियों में अभी भी 100 मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है जिसका वितरण किया जा रहा है।
वर्जन
अक्तूबर माह में लक्ष्य के सापेक्ष 170 फीसदी खाद का वितरण किया गया है। नवंबर माह में खाद का वितरण किया जा रहा है। स्टॉक में खाद कम है। दो रैक डीएपी खाद की मांग की गई है। उसके आने पर खाद की किल्लत समाप्त हो जाएगी।- विजय कुमार, उप निदेशक (कृषि) चित्रकूटधाम मंडल, बांदा।