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बुंदेलखंड में अलसी व कठिया गेहूं उत्पादन पर जोर
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वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में मौजूद सदस्य।
- फोटो : BANDA
बांदा। वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में वार्षिक कार्ययोजना पर चर्चा के साथ अलसी और कठिया गेहूं के उत्पादन पर जोर दिया गया। पलायन रोकने और खेतीबाड़ी में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए ग्रामीण युवकों के रोजगार परक प्रशिक्षण देने के लिए कहा गया।
कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय परिसर स्थित विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण हाल में बैठक हुई। वैज्ञानिक सलाहकार समिति सदस्यों ने खेतीबाड़ी से संबंधित अनुभव साझा किए। दिसंबर 2023 तक की वार्षिक कार्ययोजना पर चर्चा हुई। अध्यक्षता कर रहे कुलपति डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र को मौजूदा मंडी भाव के तहत जनपद के सभी ब्लाकों में भूमि, जलवायु व फसल पद्धति का अध्ययन करना है।
केंद्र अध्यक्ष डॉ. श्याम सिंह ने पिछले वर्ष और अगले वर्ष दिसंबर 2023 तक की कार्ययोजना व कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति आख्या पेश की। वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सभी सदस्यों नेे सुझाव दिए। डॉ. एके वाजपेयी ने अलसी व कठिया गेहूं की खेती पर जोर दिया। पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन का कृषि में समावेश कर किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कहा। उन्होंने प्राकृतिक खेती के बेहतर प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया।
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उप निदेशक (पशुपालन) डा. मनोज अवस्थी ने नस्ल सुधार के लिए बुंदेलखंड की देशी नस्लों के इस्तेमाल करने और किसानों को बकरी व मुर्गीपालन विषय अधिक से अधिक प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए कहा। कार्यक्रम में निदेशक (प्रसार) प्रो. एनके वाजपेयी, सह निदेशक (प्रसार) डॉ. नरेंद्र सिंह व डॉ. आनंद कुमार सिंह, अधिष्ठाता (कृषि) डॉ. जीएस पवार, अधिष्ठाता (वानिकी) डॉ. संजीव कुमार, डॉ. मयंक दुबे, सहायक प्राध्यापक (पशुपालन) राजेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी प्रतीक चौबे, समाजसेवी सीमा खान समेत प्रगतिशील किसानों ने भी संबोधित किया।
संचालन डॉ. दीक्षा पटेल ने किया। डॉ. मंजुल पांडेय, डॉ. मानवेंद्र सिंह, अजीत कुमार निगम, कमल नारायण आदि ने व्यवस्था संभाली।
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कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय परिसर स्थित विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण हाल में बैठक हुई। वैज्ञानिक सलाहकार समिति सदस्यों ने खेतीबाड़ी से संबंधित अनुभव साझा किए। दिसंबर 2023 तक की वार्षिक कार्ययोजना पर चर्चा हुई। अध्यक्षता कर रहे कुलपति डॉ. एनपी सिंह ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र को मौजूदा मंडी भाव के तहत जनपद के सभी ब्लाकों में भूमि, जलवायु व फसल पद्धति का अध्ययन करना है।
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केंद्र अध्यक्ष डॉ. श्याम सिंह ने पिछले वर्ष और अगले वर्ष दिसंबर 2023 तक की कार्ययोजना व कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति आख्या पेश की। वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सभी सदस्यों नेे सुझाव दिए। डॉ. एके वाजपेयी ने अलसी व कठिया गेहूं की खेती पर जोर दिया। पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन का कृषि में समावेश कर किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कहा। उन्होंने प्राकृतिक खेती के बेहतर प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया।
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उप निदेशक (पशुपालन) डा. मनोज अवस्थी ने नस्ल सुधार के लिए बुंदेलखंड की देशी नस्लों के इस्तेमाल करने और किसानों को बकरी व मुर्गीपालन विषय अधिक से अधिक प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए कहा। कार्यक्रम में निदेशक (प्रसार) प्रो. एनके वाजपेयी, सह निदेशक (प्रसार) डॉ. नरेंद्र सिंह व डॉ. आनंद कुमार सिंह, अधिष्ठाता (कृषि) डॉ. जीएस पवार, अधिष्ठाता (वानिकी) डॉ. संजीव कुमार, डॉ. मयंक दुबे, सहायक प्राध्यापक (पशुपालन) राजेंद्र कुमार, जिला उद्यान अधिकारी प्रतीक चौबे, समाजसेवी सीमा खान समेत प्रगतिशील किसानों ने भी संबोधित किया।
संचालन डॉ. दीक्षा पटेल ने किया। डॉ. मंजुल पांडेय, डॉ. मानवेंद्र सिंह, अजीत कुमार निगम, कमल नारायण आदि ने व्यवस्था संभाली।
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