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बांदा : भोजन में पोषण की कमी से बच्चे पैदा हो रहे कुपोषित, कैबिनेट मंत्री बोले - कठिया की तरह मिलेट फसलें बनें बुंदेलखंड की पहचान, मिलेट दिवस समारोह में हर जिले में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की बात कही

Thu, 21 Jul 2022 12:45 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 21 Jul 2022 12:45 AM IST
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Banda: Children are being born malnourished due to lack of nutrition in food, cabinet minister said - like Kathia, millet crops should be the identity of Bundelkhand, in Millet Day celebrations said to make Center of Excellence in every district
बांदा। कम लागत, कम पानी और कम संसाधन में ज्यादा फायदा मिलेट फसलें दे सकती हैं। बुंदेलखंड में इन फसलों की बेहतर संभावनाएं हैं। कठिया गेहूं की तरह मिलेट फसलें बुंदेलखंड की पहचान बनें, इसके लिए किसानों को जागरुक करना होगा। भोजन में पोषण की कमी से बच्चे कुपोषित पैदा हो रहे हैं। बीमारियों से जूझ रहे हैं। यह चिंता की बात है। ये बातें प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मिलेट दिवस समारोह में कही।
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कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को मिलेट दिवस पर उद्यान महाविद्यालय सभागार में समारोह हुआ। उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने हर जिले में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की बात कही। बांदा में खजूर के उत्पादन पर जोर दिया। सात किसानों को सम्मानित किया गया। कहा कि मिलेट फसलों के फायदों को किसानों और लोगों तक पहुंचाएं। गेहूं-चावल के साथ मिलेट फसलें भी थाली का हिस्सा बनें इसके प्रयास जरूरी हैं। कुलपति प्रो. एनपी सिंह ने कहा कि मिलेट फसलों के प्रदर्शन के लिए विश्वविद्यालय परिसर में स्थान चयनित किया जाएगा। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक हैदराबाद से बीज मंगाकर कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से किसानों तक बीज उपलब्ध कराएंगे। बुंदेलखंड में दलहन तिलहन के साथ-साथ मिलेट फसलों की संभावनाएं बहुत हैं।
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निदेशक (प्रसार) प्रो. एनके वाजपेई ने आभार जताया। समारोह में कदन्न फसलों के अच्छे उत्पादन पर किसान रघुवीर सिंह, राम अभिलाष, राजेश कुमार, रघुनंदन, जगदीश, राजेश सिंह व मधुसूदन को पुरस्कृत किया गया। विधायक प्रकाश द्विवेदी व ओममणि वर्मा, बुंदेलखंड विकास बोर्ड अध्यक्ष अयोध्या सिंह पटेल, जयराम सिंह, प्रगतिशील किसान असलम खां आदि उपस्थित रहे।
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प्रदेश के 19 जिलों में हो रही मिलेट की खेती
बांदा। कृषि अनुसंधान परिषद लखनऊ के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने कहा कि प्रकृति के साथ-साथ खेती व फसलों में विविधिता जरूरी है। बुंदेलखंड में इन फसलों को विकसित करने के लिए मैप तैयार करना होगा। भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान हैदराबाद के पूर्व निदेशक डॉ. विलास ए. टोनापी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 19 जिलों में मिलेट की खेती हो रही है। इनमें पोषक तत्व ज्यादा होते हैं। कम पानी में अच्छा उत्पादन होता है। परिषद महानिदेशक डॉ. संजय सिंह ने कहा कि किसानों को मोटे अनाज के लिए जागरूक करें। किसानों को पानी संचय करने और सूक्ष्म सिंचाई यंत्र अपनाने को कहा।

बीजों की लगी प्रदर्शनी
कृषि विश्वविद्यालय में मोटे अनाज के बीजों की प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों को ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी, सावा आदि बीजों के बारे में बताया गया। उन्हें फायदे गिनाए। लगभग 15 किसानों ने मोटे अनाज के बीज भी लिए। प्रदर्शनी में स्टाल कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग की तरफ से लगाए गए।
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