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बांदा : 24 करोड़ से बना बांदा-टांडा हाईवे गड्ढों में तब्दील
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19बीएनडीपी2- तिंदवारी के पास जर्जर हाइवे।
- फोटो : BANDA
बांदा। लगभग 424 करोड़ रुपये खर्च कर बनाया गया बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग कई जगह गड्ढों में तब्दील हो गया है। कई जगह इतने बड़े गड्ढे हो गए हैं कि उनसे बचने में जो वाहन आपस में टकरा रहे हैं या फिर असंतुलित होकर खंती में गिर रहे हैं। इसकी बानगी रविवार को तड़के ट्रक और डंपर की टक्कर है।
बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग रायबरेली से होकर गुजरा है। इसकी लंबाई लगभग 133 किलोमीटर है। बांदा क्षेत्र में तकरीबन 42 किलोमीटर हाईवे आता है। करीब 10 साल पहले हुए निर्माण के एक साल बाद से ही हाईवे पर कई स्थानों में गड्ढे हो गए।
पैचिंग कर इसे ठीक कराया जाता रहा। बारिश के कारण हाईवे पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों ने वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रखी है। बमुश्किल 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही वाहन गुजर रहे हैं। नतीजतन ढाई-तीन घंटे का सफर पांच से छह घंटे में पूरा हो रहा है। समय के साथ ही ईंधन भी ज्यादा खप रहा है। राहगीरों की जान भी जोखिम में रहती है।
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रविवार को तड़के तिंदवारी थाना क्षेत्र के बेंदा घाट गांव के पास गड्ढे से बचने के लिए ट्रक चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया। इससे पीछे से डंपर टकरा गया। डंपर चला रहे क्लीनर बरौला कूड़ेभार (सुल्तानपुर) गांव निवासी राकेश यादव की मौके पर ही मौत हो गई थी। डंपर चालक डढ़वाकलां (सुल्तानपुर) गांव निवासी रामशिरोमन घायल हो गया था। उसका कानपुर में इलाज चल रहा है। इसके पूर्व भी कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। एनएच विभाग गड्ढों को भरने के लिए सिर्फ पैचिंग का कार्य ही कराया। नए सिरे से मरम्मत नहीं कराई। हाईवे पर गड्ढों से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश से हुए जलभराव से कई जगहों पर हाईवे में गड्ढे हो गए हैं। बेंदाघाट के पास भी कुछ जगहों पर गड्ढे हैं। मरम्मत का कार्य चल रहा है। जहां कहीं भी सड़क टूटी है, उसे ठीक कराया जाएगा। गड्ढों को भरने के लिए बजट मांगा गया है। बजट आते ही मरम्मत कराई जाएगी। -समर सिंह, उपप्रबंधक, एनएचएआई।
नौ माह में हाईवे के गड्ढों ने ली 10 की जान
बेंदाघाट। बांदा के महोखर से बेंदा तक करीब 42 किलोमीटर हाईवे पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। इन गड्ढों ने जनवरी से अब तक यानी नौ माह में 10 लोगों की जान जा चुकी है। कोई बाइक से उछलकर मौत के मुंह समा गया तो कोई ट्रक की चपेट में आ गया।
जनवरी में गड्ढे से बचने में दो ट्रकों की भिड़ंत में एक ट्रक चालक रायबरेली निवासी शिवकुमार (35) पुत्र रामदयाल की मौत हो गई थी। फरवरी में ट्रक क्लीनर मोहन (42) पुत्र जगतपाल, मार्च में शिवगढ़ी (प्रतापगढ़) गांव निवासी दिनेश (28), अप्रैल में तिंदवारी के जयकरन सचान (38) की ट्रक दुर्घटना में मौत हो चुकी।
इसी तरह बहुआ (फतेहपुर) गांव की शिवप्यारी (38), सिंघौली गांव निवासी रिटायर्ड फौजी राजबहादुर (48) व कानपुर निवासी बीमा एजेंट शिवभवन सोनी (33) की गड्ढे की वजह से गिरकर मौत हो गई। वहीं बेंदा गांव के कमल (36), छत्रपाल सिंह (45), सूरज (40) और जौहरपुर गांव निवासी हरी सिंह (52) की भी गड्ढों के कारण जान जा चुकी है।
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बांदा-टांडा राष्ट्रीय राजमार्ग रायबरेली से होकर गुजरा है। इसकी लंबाई लगभग 133 किलोमीटर है। बांदा क्षेत्र में तकरीबन 42 किलोमीटर हाईवे आता है। करीब 10 साल पहले हुए निर्माण के एक साल बाद से ही हाईवे पर कई स्थानों में गड्ढे हो गए।
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पैचिंग कर इसे ठीक कराया जाता रहा। बारिश के कारण हाईवे पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। इन गड्ढों ने वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लगा रखी है। बमुश्किल 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही वाहन गुजर रहे हैं। नतीजतन ढाई-तीन घंटे का सफर पांच से छह घंटे में पूरा हो रहा है। समय के साथ ही ईंधन भी ज्यादा खप रहा है। राहगीरों की जान भी जोखिम में रहती है।
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रविवार को तड़के तिंदवारी थाना क्षेत्र के बेंदा घाट गांव के पास गड्ढे से बचने के लिए ट्रक चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया। इससे पीछे से डंपर टकरा गया। डंपर चला रहे क्लीनर बरौला कूड़ेभार (सुल्तानपुर) गांव निवासी राकेश यादव की मौके पर ही मौत हो गई थी। डंपर चालक डढ़वाकलां (सुल्तानपुर) गांव निवासी रामशिरोमन घायल हो गया था। उसका कानपुर में इलाज चल रहा है। इसके पूर्व भी कई जानलेवा हादसे हो चुके हैं। एनएच विभाग गड्ढों को भरने के लिए सिर्फ पैचिंग का कार्य ही कराया। नए सिरे से मरम्मत नहीं कराई। हाईवे पर गड्ढों से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बारिश से हुए जलभराव से कई जगहों पर हाईवे में गड्ढे हो गए हैं। बेंदाघाट के पास भी कुछ जगहों पर गड्ढे हैं। मरम्मत का कार्य चल रहा है। जहां कहीं भी सड़क टूटी है, उसे ठीक कराया जाएगा। गड्ढों को भरने के लिए बजट मांगा गया है। बजट आते ही मरम्मत कराई जाएगी। -समर सिंह, उपप्रबंधक, एनएचएआई।
नौ माह में हाईवे के गड्ढों ने ली 10 की जान
बेंदाघाट। बांदा के महोखर से बेंदा तक करीब 42 किलोमीटर हाईवे पर कई जगह बड़े-बड़े गड्ढे हैं। इन गड्ढों ने जनवरी से अब तक यानी नौ माह में 10 लोगों की जान जा चुकी है। कोई बाइक से उछलकर मौत के मुंह समा गया तो कोई ट्रक की चपेट में आ गया।
जनवरी में गड्ढे से बचने में दो ट्रकों की भिड़ंत में एक ट्रक चालक रायबरेली निवासी शिवकुमार (35) पुत्र रामदयाल की मौत हो गई थी। फरवरी में ट्रक क्लीनर मोहन (42) पुत्र जगतपाल, मार्च में शिवगढ़ी (प्रतापगढ़) गांव निवासी दिनेश (28), अप्रैल में तिंदवारी के जयकरन सचान (38) की ट्रक दुर्घटना में मौत हो चुकी।
इसी तरह बहुआ (फतेहपुर) गांव की शिवप्यारी (38), सिंघौली गांव निवासी रिटायर्ड फौजी राजबहादुर (48) व कानपुर निवासी बीमा एजेंट शिवभवन सोनी (33) की गड्ढे की वजह से गिरकर मौत हो गई। वहीं बेंदा गांव के कमल (36), छत्रपाल सिंह (45), सूरज (40) और जौहरपुर गांव निवासी हरी सिंह (52) की भी गड्ढों के कारण जान जा चुकी है।

19बीएनडीपी3 बेंदा घाट के आस पास बदहाल हाइवे- फोटो : BANDA