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बांदा : 22 हजार ने नहीं कराया फसल बीमा, किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही फसल बीमा, किस्त की कटौती करने के बाद क्लेम देने में आनाकानी करते

Sat, 23 Jul 2022 12:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 23 Jul 2022 12:18 AM IST
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Banda: 22 thousand did not do crop insurance, crop insurance is proving to be a loss deal for the farmers, after deducting the installment, they refuse to pay the claim
बांदा। फसल बीमा पॉलिसी के नाम पर हर साल कंपनियां कटौती तो कर लेती है, लेकिन क्लेम देने में आनाकानी करती हैं। इसके लिए किसानों को दर-दर की ठोकरें खानी पड़ती हैं। कृषि विभाग कभी किसानों को बीमा कंपनी की तरफ घुमा देते हैं तो कभी बीमा कंपनी वाले प्रशासन की ओर मोड़ देते हैं। यही वजह है कि किसानों का बीमा कंपनियों से मोह भंग हो रहा है। बीमा पॉलिसी लेने वाले किसानों की संख्या साल दर साल घटती जा रही है।
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साल 2019-20 में चित्रकूट धाम मंडल में एक लाख 28 हजार किसानों ने फसल बीमा पॉलिसी के तहत प्रीमियम जमा किया था। वहीं, 2021-22 में करीब एक लाख छह हजार किसानों ने बीमा कराया। करीब 22 हजार किसानों ने फसल का बीमा कराने से इन्कार कर दिया। किसानों की मानें तो शिकायत करने के बाद भी कंपनियों के कर्मचारी खेतों में आकलन करने के लिए नहीं आते हैं। दबाव पड़ने पर जब कभी आते हैं तो इतनी देर हो जाती है, कि कोई न कोई टेक्निकल कमी बताकर क्लेम में अड़ंगा फंस जाता है।
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इस बार बढ़ सकती संख्या
हालांकि चालू खरीफ की फसल के सत्र में सूखे को देखते हुए सरकार सभी किसानों का फसल बीमा कराने पर जोर दे रही है। पॉलिसी लेने के लिए किसानों को जागरूक करने के लिए प्रशासन और कृषि विभाग के अफसरों को लगाया गया है। इसका असर आने वाले दिनों में फसल बीमा पॉलिसी धारक किसानों की संख्या में बढ़त के रूप में दिख सकता है।
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क्लेम नहीं तो क्यों कराएं बीमा
तिंदवारी के किसान देवी दयाल का कहना हैं कि पानी के कमी की वजह से फसल करीब 30 फीसदी तक खराब हो गई। बीमा कंपनी के अधिकारी कई बार शिकायत करने पर आए और मौके से सैंपल भी लेकर गए, मगर क्लेम नहीं मिला तो अब बीमा क्यों कराएं। वहीं, रामबरन, शिव बहादुर कहते हैं कि कंपनियां जांच के नाम पर बहुत तंग करती हैं, तब कहीं जाकर क्लेम मिल पाता है।

प्राथमिकता के आधार पर दिया जाय लाभ
डीएम अनुराग पटेल ने बीमा कंपनी और कृषि विभाग को आदेश दिया है कि किसानों को प्राथमिकता के आधार पर फसल बीमा का लाभ दिया जाए। इसके साथ ही सूखे की स्थिति को देखते हुए अधिक से अधिक किसानों का फसल बीमा कराया जाए।
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