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अंकुरित बीज से करें पिछड़ी बुवाई की भरपाई
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डा.नरेंद्र सिंह।
- फोटो : BANDA
बांदा। ज्यादा बारिश से चित्रकूटधाम मंडल में पिछड़ गई रबी बुवाई की भरपाई के लिए कृषि विशेषज्ञ किसानों को अंकुरित बीज के प्रयोग की सलाह दे रहे हैं। कृषि विश्वविद्यालय में कृषि वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह का कहना है कि दलहन और तिलहन की बुआई करीब एक माह पिछड़ गई है। ऐसे में किसानों को दूसरे विकल्प के रूप में गेहूं की बुआई करना चाहिए। सिंचाई के साधन नहीं है तो चने की प्रजाति केजीवी-1168, केडब्लूआर-108, बीसीपी 92-3 की बुवाई करें।
कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि मटर की बुवाई भी मुफीद होगी। इसमें मटर की प्रजाति प्रकाश, अमन, मालवी-13, केजीवी-153 के बीज प्रयोग करें। खेतों में नमी कम होने पर बीज पानी में भिगो दें। एक-दो दिन में जब थोड़ा अंकुरित हो जाए तो बुवाई करें, इससे बीज जल्दी जमेगा। पौधों की बढ़वार के लिए डीएपी के साथ यूरिया का भी छिड़काव करें। फल लगने पर एक पानी दें।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बुंदेलखंड की भौगोलिक स्थिति के अनुसार गेहूं की बुआई अभी लेट नहीं है। बेहतर प्रजाति के एसडी-2967, के-8020, राज-3077, पीवीडब्ल्यू-343, नरेंद्र-1012 और डब्ल्यूएच-542 बीजों का इस्तेमाल करें। गेहूं की बुआई के पूर्व पलेवा की सलाह दी। एक माह बाद दूसरा व बाल निकलने पर तीसरा और फल आने पर चौथा पानी लगाने को कहा।
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कृषि वैज्ञानिक ने कहा कि मटर की बुवाई भी मुफीद होगी। इसमें मटर की प्रजाति प्रकाश, अमन, मालवी-13, केजीवी-153 के बीज प्रयोग करें। खेतों में नमी कम होने पर बीज पानी में भिगो दें। एक-दो दिन में जब थोड़ा अंकुरित हो जाए तो बुवाई करें, इससे बीज जल्दी जमेगा। पौधों की बढ़वार के लिए डीएपी के साथ यूरिया का भी छिड़काव करें। फल लगने पर एक पानी दें।
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जिला कृषि अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बुंदेलखंड की भौगोलिक स्थिति के अनुसार गेहूं की बुआई अभी लेट नहीं है। बेहतर प्रजाति के एसडी-2967, के-8020, राज-3077, पीवीडब्ल्यू-343, नरेंद्र-1012 और डब्ल्यूएच-542 बीजों का इस्तेमाल करें। गेहूं की बुआई के पूर्व पलेवा की सलाह दी। एक माह बाद दूसरा व बाल निकलने पर तीसरा और फल आने पर चौथा पानी लगाने को कहा।
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