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बांदा : स्कूल को व्यवसायिक नहीं मानता प्राधिकरण
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राजस्व अभिलेख दिखाते हुए आशीष सागर।
- फोटो : BANDA
बांदा। समाजसेवी और आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित ने बांदा विकास प्राधिकरण पर मानचित्रों की स्वीकृति और जन सूचना अधिकार अधिनियम में अंधेरगर्दी और गलत बयानी का आरोप लगाते हुए प्रदेश के प्रमुख सचिव (आवास एवं शहरी नियोजन) को शिकायती पत्र भेजा है।
इसमें बताया कि चिल्ला रोड मौजा हरदौली में नामजेड अकृषक सरकारी भूमि है। खसरा और 1425 फसली में यह आबादी गिरजाघर के नाम से दर्ज है। यह बेशकीमती सरकारी भूमि है।
कहा कि अभिलेखों में ब्रिटिश हुकुमत के समय से इसका कोई दूसरा नाम दर्ज नहीं है, लेकिन कुछ भू माफिया ने कूटरचित दस्तावेजों से 30 वर्ष के लिए पट्टा करा लिया है। मान्यता लेकर स्कूल चलाया जा रहा है।
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धार्मिक स्थल की आड़ में निजी स्वार्थ के बड़े घोटाले और खेल किए जा रहे हैं। आशीष ने बताया कि उन्होंने बांदा विकास प्राधिकरण से आरटीआई से सूचना मांगी थी।
इस पर प्राधिकरण के जन सूचना अधिकारी/अवर अभियंता ने भ्रामक सूचना देते हुए कहा है कि यहां कोई व्यवसायिक निर्माण होते नहीं पाया गया। यह भी कहा कि स्कूल का संचालन व्यावसायिक गतिविधियों में नहीं आता। सूचना में कहा गया है कि स्कूल का मानचित्र प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत है।
आशीष ने कहा कि जिस स्कूल में अभिभावकों से मोटी फीस ली जा रही हो उसे प्राधिकरण द्वारा व्यवसायिक गतिविधियों में अंधेरगर्दी है। इस प्रकरण की वह उच्च स्तर तक शिकायत करेंगे।
जरूरत पड़ी तो प्राधिकरण के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने शिकायती पत्र के साथ राजस्व अभिलेखों आदि की प्रतियां भी लगाई हैं। कमिश्नर, डीएम और प्राधिकरण सचिव को प्रतियां भेजी गईं हैं।
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इसमें बताया कि चिल्ला रोड मौजा हरदौली में नामजेड अकृषक सरकारी भूमि है। खसरा और 1425 फसली में यह आबादी गिरजाघर के नाम से दर्ज है। यह बेशकीमती सरकारी भूमि है।
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कहा कि अभिलेखों में ब्रिटिश हुकुमत के समय से इसका कोई दूसरा नाम दर्ज नहीं है, लेकिन कुछ भू माफिया ने कूटरचित दस्तावेजों से 30 वर्ष के लिए पट्टा करा लिया है। मान्यता लेकर स्कूल चलाया जा रहा है।
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धार्मिक स्थल की आड़ में निजी स्वार्थ के बड़े घोटाले और खेल किए जा रहे हैं। आशीष ने बताया कि उन्होंने बांदा विकास प्राधिकरण से आरटीआई से सूचना मांगी थी।
इस पर प्राधिकरण के जन सूचना अधिकारी/अवर अभियंता ने भ्रामक सूचना देते हुए कहा है कि यहां कोई व्यवसायिक निर्माण होते नहीं पाया गया। यह भी कहा कि स्कूल का संचालन व्यावसायिक गतिविधियों में नहीं आता। सूचना में कहा गया है कि स्कूल का मानचित्र प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत है।
आशीष ने कहा कि जिस स्कूल में अभिभावकों से मोटी फीस ली जा रही हो उसे प्राधिकरण द्वारा व्यवसायिक गतिविधियों में अंधेरगर्दी है। इस प्रकरण की वह उच्च स्तर तक शिकायत करेंगे।
जरूरत पड़ी तो प्राधिकरण के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने शिकायती पत्र के साथ राजस्व अभिलेखों आदि की प्रतियां भी लगाई हैं। कमिश्नर, डीएम और प्राधिकरण सचिव को प्रतियां भेजी गईं हैं।