{"_id":"5abd21ef4f1c1bd9618b4608","slug":"arhar-bumper-yields-from-this-seed","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बीज से अरहर की बंपर पैदावार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बीज से अरहर की बंपर पैदावार
अमर उजाला ब्यूरो, बांदा
Updated Thu, 29 Mar 2018 10:57 PM IST
विज्ञापन
arhar
- फोटो : demo pic
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुंदेलखंड में अरहर की आईपीए-203 प्रजाति की फसल किसानों को बेहतर उपज देगी। कृषि विभाग ने कृषि प्रक्षेत्र में बुंदेलखंड के किसानों के लिए इस प्रजाति का बीज तैयार किया है। क्राप कटिंग में इसकी उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 15 से 19 क्विंटल निकली है। फार्म में 15.52 हेक्टेयर में अरहर के इस प्रजाति का बीज तैयार हुआ है।
विज्ञापन
बुंदेलखंड दलहन व तिलहन उत्पादन में कभी अग्रणी रहा है, लेकिन लगातार बढ़ रही फसलों की लागत और घटती उपज के चलते किसान अरहर बुवाई से परहेज कर रहा है। बांदा जिले में नरैनी, बबेरू बिसंडा व तिंदवारी ब्लाक में अरहर की अधिकांशत: फसल उगाई जाती रही है, लेकिन अब सिर्फ मेड़ों तक यह फसल सीमित हो गई है। नतीजे में खुद किसान बाहर की दाल खाने को मजबूर हो गए हैं। अब अरहर की नई प्रजाति किसानों को इसमें फिर रुचि पैदा करेगी।
विज्ञापन
जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बताया कि अतर्रा स्थित कृषि फार्म में इस साल अरहर की आईपीए-203 प्रजाति का ब्रीडर और आधारीय बीज तैयार किया गया है। जुलाई में इसकी बुवाई की जाती है। 250 दिनों में अरहर की फसल पककर तैयार हो जाती है। अतर्रा कृषि प्रक्षेत्र में 14.306 हेक्टेयेर में इस प्रजाति का आधारीय बीज और 15.502 हेक्टेयर में ब्रीडर (नया) बीज तैयार किया गया है। क्राप कटिंग कराई गई तो उसमें 15 से 19 कुंतल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता निकली है।
विज्ञापन
इस प्रजाति में प्रति फली 4-5 दाने निकलते हैं, जबकि नरेंद्र-1 व नरेंद्र-2 और बहार प्रजाति में 2-3 दाने प्रति फली आते हैं। नई प्रजाति आईपीए-203 में प्रति हेक्टेयर उपज 19 क्विंटल तक है। जबअन्य प्रजातियां जो बुंदेलखंड में किसान बो रहे हैं। उनमें प्रति हेक्टेयर 10 क्विंटल उत्पादकता है। क्राप कटिंग में मौजूद रहे उप कृषि निदेशक एके सिंह ने बताया कि अरहर की यह नई प्रजाति बुंदेलखंड के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी। इसमें ज्यादा सिंचाई की भी जरूरत नहीं है। कृषि प्रक्षेत्र अतर्रा प्रभारी लेखराज निरंजन ने बताया कि अरहर का बीज पर्याप्त मात्रा में तैयार किया गया है। किसानों को इस बीज से फसल प्रजाति तैयार करने को प्रेरित किया जाएगा।