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अयोध्या में खुदाई स्थल को घोषित करें पुरातात्विक स्मारक
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सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देते सामाजिक परिवर्तन मिशन के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मंत्री दद्दू
- फोटो : BANDA
बांदा। सामाजिक परिवर्तन मिशन ने राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है। इसमें अयोध्या में हो रही खुदाई में भगवान बुद्ध की मूर्ति व बौद्धकालीन अवशेष मिलने पर इस स्थान को पुरातात्विक स्मारक घोषित करने की मांग की है।
गुरुवार को कलक्ट्रेट में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन राष्ट्रीय संयोजक व पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद और जिलाध्यक्ष अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार राव ने सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह को सौंपा। इसमें कहा कि खुदाई के दौरान अयोध्या में दो हजार वर्ष पुरानी बौद्ध प्रतिमाएं, शिलालेख, धम्म चक्र आदि बौद्धकालीन प्रतीक व अवशेष मिले हैं।
इनसे छेड़छाड़ पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 व बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम 1972 के अनुसार दंडनीय अपराध है। कहा कि ऐतिहासिक स्थल की खुदाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की निगरानी में कराई जाए। इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में संरक्षित किया जाए। इतिहास और पुरातत्ववेत्ताओं तथा बौद्ध विद्वानों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल उत्खनन स्थल का निरीक्षण करे और रिपोर्ट संसद को प्रस्तुत करे। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या में ही किसी अन्य स्थल पर बनवाया जाए।
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ज्ञापन देने वालों में पूर्व राज्यमंत्री राजाराम आनंद, शैलेंद्र बौद्ध, दयासागर बौद्ध (लखनऊ) पूर्व सांसद लालमनी प्रसाद (बस्ती) अनूप प्रियदर्शी, मोरध्वज खुराना, इंद्रजीत यादव, आनंद सिंह कुरील, रमाकांत निषाद, भैरव शंकर यादव, दीपेंद्र भारती, जगमोहन वर्मा, श्रीपाल, शंकरलाल वर्मा, घनश्याम कुशवाहा, सहदेव प्रजापति, केसी वर्मा, बहादुर लाल वर्मा शामिल रहे।
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गुरुवार को कलक्ट्रेट में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन राष्ट्रीय संयोजक व पूर्व मंत्री दद्दू प्रसाद और जिलाध्यक्ष अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार राव ने सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र सिंह को सौंपा। इसमें कहा कि खुदाई के दौरान अयोध्या में दो हजार वर्ष पुरानी बौद्ध प्रतिमाएं, शिलालेख, धम्म चक्र आदि बौद्धकालीन प्रतीक व अवशेष मिले हैं।
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इनसे छेड़छाड़ पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 व बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम 1972 के अनुसार दंडनीय अपराध है। कहा कि ऐतिहासिक स्थल की खुदाई भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की निगरानी में कराई जाए। इस स्थल को राष्ट्रीय स्मारक के रूप में संरक्षित किया जाए। इतिहास और पुरातत्ववेत्ताओं तथा बौद्ध विद्वानों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल उत्खनन स्थल का निरीक्षण करे और रिपोर्ट संसद को प्रस्तुत करे। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का भव्य मंदिर अयोध्या में ही किसी अन्य स्थल पर बनवाया जाए।
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ज्ञापन देने वालों में पूर्व राज्यमंत्री राजाराम आनंद, शैलेंद्र बौद्ध, दयासागर बौद्ध (लखनऊ) पूर्व सांसद लालमनी प्रसाद (बस्ती) अनूप प्रियदर्शी, मोरध्वज खुराना, इंद्रजीत यादव, आनंद सिंह कुरील, रमाकांत निषाद, भैरव शंकर यादव, दीपेंद्र भारती, जगमोहन वर्मा, श्रीपाल, शंकरलाल वर्मा, घनश्याम कुशवाहा, सहदेव प्रजापति, केसी वर्मा, बहादुर लाल वर्मा शामिल रहे।