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जीका को लेकर अलर्ट, पर नहीं है जांच की व्यवस्था

Wed, 10 Nov 2021 11:15 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 11:15 PM IST
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Alert about Zika, but there is no system of investigation
बांदा। कानपुर और कन्नौज में तेजी से जीका संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है। शासन ने सभी जिलों के स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया है, लेकिन हैरत की बात है कि यहां जीका की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। कोई संदिग्ध मरीज सामने आता है तो उसका नमूना जांच के लिए लखनऊ भेजना पड़ेगा। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार का अजीब जवाब है कि जीका का कोई मरीज नहीं है तो जांच की व्यवस्था भी नहीं है।
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कानपुर में जीका कहर बरपा रहा है। संक्रमितों की संख्या सौ के पार हो गई है। कन्नौज में भी जीका के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इसे लेकर शासन ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क करते हुए निगरानी के आदेश दिए हैं, लेकिन यहां जीका संक्रमण को लेकर बेपरवाही नजर आई।
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सबसे बड़ी बात यह है कि जीका वायरस की पुष्टि के लिए यहां जांच की कोई व्यवस्था नहीं है। नतीजतन बिना जांच जीका की पुष्टि न होने और वायरल की तरह इलाज किए जाने पर मरीज का जीवन दांव पर लग सकता है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में अब तक जीका का कोई मरीज सामने नहीं आया है। आशा और एएनएम को निगरानी के निर्देश दिए हैं।
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जीका संक्रमण का यहां कोई केस अब तक सामने नहीं आया है। इसलिए जांच की कोई व्यवस्था नहीं की गई। अब जीका वायरस की पुष्टि के लिए जिला अस्पताल में जांच की व्यवस्था के लिए प्रयास किए जाएंगे। -डॉ. वीके तिवारी, सीएमओ, बांदा।
बांदा राजकीय मेडिकल कालेज में जीका वायरस की जांच की व्यवस्था नहीं है। लक्षण के आधार पर पहचान कर संदिग्ध मरीज का नमूना जीका जांच के लिए लखनऊ लैब भेजेंगे। कानपुर में भी जीका जांच की सुविधा नहीं है।-डॉ.मुकेश कुमार यादव, प्रधानाचार्य, मेडिकल कालेज, बांदा।

मेडिकल कालेज मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. शैलेंद्र यादव ने बताया कि जीका वायरस के लक्षण डेंगू और चिकनगुनिया की तरह होते हैं। शरीर में लाल चकत्ते, जोड़ों में दर्द, तेज बुखार होता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह वायरस सबसे खतरनाक होता है। शिशु के सिर और शरीर कमजोर कर देता है। माइक्रोसेफाली (सिर छोटा) से ग्रसित हो सकता है। इस संक्रमण से ग्रसित मरीज को ठीक होने में दो हफ्ते लग सकते हैं। उधर, माइक्रोबायलॉजी के डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि जीका की जांच यूरिन व ब्लड सीरम के जरिए आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) से होती है।
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