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चार माह बीते, गांवों की नहीं बनी कार्य योजना
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 05 Aug 2016 11:13 PM IST
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गांव
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। वित्तीय वर्ष के चार महीने बीत गए लेकिन गांवों में विकास कार्यों की कोई सुगबुगाहट नहीं है। ज्यादातर ग्राम पंचायतों ने अभी तक कार्ययोजना ही नहीं तैयार की है। चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों की 973 में सिर्फ 93 ग्राम पंचायतों ने कार्य योजना तैयार कराकर फीड कराई है। बिना कार्य योजना के गांवों में विकास कार्य नहीं हो रहे।
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बांदा जिले में 471, चित्रकूट में 195, महोबा में 137 और हमीरपुर जिले में 170 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें इस साल भी 14वें और राज्य वित्त आयोग से विकास कार्य होने हैं। खड़ंजा, नाली, पेयजल और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की जानी है। कार्य शुरू करने के लिए सभी ग्राम पंचायतों में दो से तीन लाख रुपये मई में ही पहुंच चुके हैं लेकिन अधिकांश ग्राम पंचायतों की कार्य योजना नहीं बनी है।
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मंडल मुख्यालय वाले बांदा जिले में सिर्फ 17 ग्राम पंचायतों की कार्य योजना की फीडिंग हुई है। चित्रकूट में 47 और हमीरपुर जिले में 29 ग्राम प्रधानों ने ही कार्य योजना भेजी है। महोबा जिले की स्थिति बेहद खराब है। यहां एक भी ग्राम पंचायत की कार्य योजना प्रशासन के पास नहीं पहुंची। उधर, डीपीआरओ आनंद प्रकाश का कहना है कि कार्य योजनाएं तैयार हो रही हैं। उनकी ऑनलाइन फीडिंग कराई जा रही है। एक दिन में 4-5 ग्राम पंचायतें ही फीड हो पा रही हैं। इस कारण ब्लाकों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन बीडीओ स्तर से सहयोग नहीं मिल रहा है।
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कछुआ चाल चल रही फीडिंग
बांदा। कार्य योजना बनाने से लेकर उसे पास कराने तक सारे कार्य अभी मैन्युअल होते रहे हैं। अब शासन ने सारी व्यवस्था ऑनलाइन कर दी है। कार्य योजना बनाकर इन्हें विकास खंड स्तर पर ऑनलाइन फीड कराया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान, एडीओ पंचायत को दी गई है। व्यवस्था के हिसाब से काम करने में बरती जा रही लापरवाही गांवों के विकास में बाधक बन रही है।