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धर्म स्थलों में एक साथ सिर्फ 5 की इंट्री
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बांदा। कोरोना की दूसरी लहर में तेजी से बढ़े मरीजों के मद्देनजर जिलाधिकारी ने प्रदेश सरकार के आदेश का हवाला देकर कोविड-19 रोकथाम के दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक कंटेनमेंट जोन छोड़कर अन्य स्थानों के धर्मस्थलों में एक बार में एक स्थान पर पांच से ज्यादा श्रद्धालु नहीं रहेंगे।
सोमवार को शाम डीएम आनंद कुमार सिंह द्वारा जारी छह पृष्ठीय आदेश/गाइडलाइन में धर्मस्थलों के बारे में कहा गया कि इनके प्रवेश द्वार पर एल्कोहल युक्त सैनिटाइजर का प्रयोग हो। यथासंभव इंफ्रारेड थर्मामीटर की व्यवस्था हो। हरेक व्यक्ति मास्क/फेस कवर लगाकर प्रवेश करें। सिर्फ उन्हीं को दाखिला दिया जाए जिनमें बीमारी के कोई लक्षण न हों। जहां तक संभव हो लोगों को समूहों में विभाजित करके प्रवेश की व्यवस्था करें। एक स्थान पर एक समय में पांच से अधिक व्यक्ति इकट्ठा न हों। जूते-चप्पल अपने वाहन में ही उतारकर आए या अलग-अलग खांचों अथवा ब्लॉकों में रखें।
सोशल डिस्टेंसिंग को पालन कड़ाई से करें। धर्मस्थल परिसर के बाहर दुकान स्टॉल आदि में भी सोशल डिस्टेसिंग अनिवार्य है। इसके लिए निशान/गोले बना दिए जाएं। लाइनों में सभी व्यक्ति एक-दूसरे से कम से कम छह फीट दूर रहें। बैठने वाले स्थानों पर भी सोशल दूरी हो। प्रतिरूप/मूर्ति/पवित्र ग्रंथ को छूने की अनुमति नहीं होगी। सभी तरह की सभाओं पर रोक रहेगी। समूह में इकट्ठे होकर गायन की भी अनुमति नहीं है। डीएम ने आगाह किया कि गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों पर आपदा प्रबंधन एक्ट और आईपीसी के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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इंसेट---
अपनी दरी-चादर लाएं, प्रसाद न बांटें
बांदा। धर्मस्थलों के लिए जारी निर्देश में यह भी शामिल है कि श्रद्धालु प्रार्थना आदि में अपने लिए अलग दरी-चादर आदि लाएं। इसे वह अपने साथ वापस भी ले जा सकते हैं। धर्मस्थल के अंदर किसी भी तरह का प्रसाद वितरण या पवित्र जल के छिड़काव की अनुमति नहीं होगी। पूजा आदि में किसी को कोई स्पर्श न करे। एक-दूसरे को बधाई देते समय भी शारीरिक संपर्क से बचें। लंगर, सामुदायिक रसोई, अन्न दान आदि के लिए भोजन बनाने या वितरित करते समय भी सोशल डिस्टेंस जरूरी है। धर्मस्थल के प्रबंधन सफाई के उपाय कराएं। फर्श का विशेष रूप से कई बार साफ करना होगा। कोई भी व्यक्ति पाजिटिव पाया जाए तो परिसर को सैनिटाइज करना होगा। (ब्यूरो)
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सोमवार को शाम डीएम आनंद कुमार सिंह द्वारा जारी छह पृष्ठीय आदेश/गाइडलाइन में धर्मस्थलों के बारे में कहा गया कि इनके प्रवेश द्वार पर एल्कोहल युक्त सैनिटाइजर का प्रयोग हो। यथासंभव इंफ्रारेड थर्मामीटर की व्यवस्था हो। हरेक व्यक्ति मास्क/फेस कवर लगाकर प्रवेश करें। सिर्फ उन्हीं को दाखिला दिया जाए जिनमें बीमारी के कोई लक्षण न हों। जहां तक संभव हो लोगों को समूहों में विभाजित करके प्रवेश की व्यवस्था करें। एक स्थान पर एक समय में पांच से अधिक व्यक्ति इकट्ठा न हों। जूते-चप्पल अपने वाहन में ही उतारकर आए या अलग-अलग खांचों अथवा ब्लॉकों में रखें।
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सोशल डिस्टेंसिंग को पालन कड़ाई से करें। धर्मस्थल परिसर के बाहर दुकान स्टॉल आदि में भी सोशल डिस्टेसिंग अनिवार्य है। इसके लिए निशान/गोले बना दिए जाएं। लाइनों में सभी व्यक्ति एक-दूसरे से कम से कम छह फीट दूर रहें। बैठने वाले स्थानों पर भी सोशल दूरी हो। प्रतिरूप/मूर्ति/पवित्र ग्रंथ को छूने की अनुमति नहीं होगी। सभी तरह की सभाओं पर रोक रहेगी। समूह में इकट्ठे होकर गायन की भी अनुमति नहीं है। डीएम ने आगाह किया कि गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों पर आपदा प्रबंधन एक्ट और आईपीसी के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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अपनी दरी-चादर लाएं, प्रसाद न बांटें
बांदा। धर्मस्थलों के लिए जारी निर्देश में यह भी शामिल है कि श्रद्धालु प्रार्थना आदि में अपने लिए अलग दरी-चादर आदि लाएं। इसे वह अपने साथ वापस भी ले जा सकते हैं। धर्मस्थल के अंदर किसी भी तरह का प्रसाद वितरण या पवित्र जल के छिड़काव की अनुमति नहीं होगी। पूजा आदि में किसी को कोई स्पर्श न करे। एक-दूसरे को बधाई देते समय भी शारीरिक संपर्क से बचें। लंगर, सामुदायिक रसोई, अन्न दान आदि के लिए भोजन बनाने या वितरित करते समय भी सोशल डिस्टेंस जरूरी है। धर्मस्थल के प्रबंधन सफाई के उपाय कराएं। फर्श का विशेष रूप से कई बार साफ करना होगा। कोई भी व्यक्ति पाजिटिव पाया जाए तो परिसर को सैनिटाइज करना होगा। (ब्यूरो)