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Banda News: 30 हजार की आबादी...इलाज के लिए 30 किमी का सफर
Mon, 19 Oct 2026 12:03 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Mon, 19 Oct 2026 12:03 AM IST
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फोटो-30- खप्टिहा कलां में खुला आयुर्वेदिक अस्पताल। संवाद
पैलानी। तहसील मुख्यालय की सबसे बड़ी ग्राम सभा खप्टिहा कलां की 30 हजार की आबादी को इलाज के लिए 30 किलोमीटर दूर जाना पड़ रहा है।
यहां के लोगों को इलाज के लिए एक अस्पताल तक प्रशासन मुहैया नहीं करा सका है। कहने को पैलानी में पीएचसी जरूर है लेकिन वह कब खुलती है और कब बंद होती है, कोई नहीं जानता है।
खप्टिहा कलां में केवल एक आयुर्वेदिक अस्पताल है और फिर करीब 30 किलोमीटर दूर जसपुरा सीएचसी। सामान्य इलाज से लेकर गंभीर बीमारियों तक के लिए ग्रामीणों को 30 किलोमीटर दूर जसपुरा सीएचसी, तिंदवारी पीएचसी या बांदा जाना पड़ता है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सबसे ज्यादा खामियाजा गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोग से बीमार मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यहां एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती वाला अस्पताल नहीं होने से छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी दूसरे कस्बों का रुख करना पड़ता है। गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिलने में देर होने से जान का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही 30 किलोमीटर दूर गंभीर मरीज को ले जाने में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। अक्सर लोगों को गाड़ी बुक करनी पड़ती है।
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दो साल से संबद्ध हैं चिकित्सक
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में तैनात रहे चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी को करीब दो साल पहले अतर्रा के आयुर्वेदिक चिकित्सालय से संबद्ध कर दिया गया था। वर्तमान में यहां डॉ. सुनील कुमार सप्ताह के शुरुआती तीन दिन और फार्मासिस्ट रामरूप अगले तीन दिन संबद्ध रहते हैं। ऐसे में क्षेत्र की बड़ी आबादी की जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
इन गांवों के लोग प्रभावित
खप्टिहा कलां के अलावा अलोना, साड़ी, खरेई, उसरा, रेहुटा, अमलोर, पिपरहरी, निवाइच, अतरहट और कछार आदि गांव के लोग इलाज नहीं मिलने के कारण प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि यहां एक सीएचसी या पीएचसी खोली जाए और चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित तैनाती की जाए ताकि इलाज के लिए दूर न जाना पड़े। खासकर महिलाओं और गर्भवती मरीजों के लिए स्थानीय स्तर पर उपचार की व्यवस्था जरूरी है।
लोग बोले-आयुर्वेदिक अस्पताल के भरोसे है
आयुर्वेदिक अस्पताल के भरोसे गंभीर बीमारियों का इलाज संभव नहीं है। संक्रामक बीमारियों के दौरान लोगों को भागकर बांदा जाना पड़ता है। इलाज की व्यवस्था नहीं होने से कई बार तो मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देता है।
-चंद्रपाल प्रजापति।
पैलानी में एक बड़े सरकारी अस्पताल की बहुत ही सख्त जरूरत है। अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती की जाए। नियमित इलाज की ठोस व्यवस्था हो।
-जयकरन सिंह।
पैलानी के साथ ही खप्टिहा कलां की आबादी भी अस्पताल नहीं होने से परेशान होती है। जसपुरा और बांदा दोनों करीब-करीब 30 किलोमीटर पड़ जाते हैं।
-इंद्रपाल यादव
बीमार होने पर आयुर्वेदिक अस्पताल जाते हैं या फिर 30 किमी दूर जसपुरा सीएचसी। दिक्कत बढ़ने पर बांदा जिला अस्पताल जाते हैं। पैलानी में एक सरकारी अस्पताल होना चाहिए।
-केशन वर्मा।
जसपुरा सीएचसी की स्थिति पर नजर
बांदा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, सर्जन और बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. दीपक यादव ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. सबीना, डॉ. एकता (दंत चिकित्सक), डॉ. दीप्ति और डॉ. हिमांशु सेवाएं दे रहे हैं।
लैब टेक्नीशियन सुधांशु सागर, लैब इंचार्ज शैलेंद्र यादव, फार्मासिस्ट राजेंद्र नामदेव व शैलेंद्र पटेल, डेंटल स्टाफ आलोक तथा लेबर रूम में स्टाफ नर्स रुचि, अभिलाषा, अंकिता और वंदना समेत अन्य कर्मचारी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एक्सरे और सामान्य पैथोलॉजी जांच जारी है।
कर्मियों के नहीं आने से टीबी, एचआईवी और गैर-संचारी रोगों की जांच करने वाली एनसीडी लैब बंद हैं। रात में आपातकालीन सेवाओं के लिए एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी लगाई जाती है। रोजाना यहां करीब 250 से 300 लोगों की ओपीडी हो जाती है।
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वर्जन
पैलानी में पीएचसी खुली हुई है और वहां स्टाफ तैनात है। अगर किसी तरह की लापरवाही की जा रही है तो इसकी शिकायत करें। ग्रामीणों की मांग है तो इस पर नियमों के अनुसार गौर किया जाएगा।
-डाॅ. विजेंद्र सिंह, सीएमओ बांदा।
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यहां के लोगों को इलाज के लिए एक अस्पताल तक प्रशासन मुहैया नहीं करा सका है। कहने को पैलानी में पीएचसी जरूर है लेकिन वह कब खुलती है और कब बंद होती है, कोई नहीं जानता है।
खप्टिहा कलां में केवल एक आयुर्वेदिक अस्पताल है और फिर करीब 30 किलोमीटर दूर जसपुरा सीएचसी। सामान्य इलाज से लेकर गंभीर बीमारियों तक के लिए ग्रामीणों को 30 किलोमीटर दूर जसपुरा सीएचसी, तिंदवारी पीएचसी या बांदा जाना पड़ता है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सबसे ज्यादा खामियाजा गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोग से बीमार मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यहां एमबीबीएस चिकित्सक की तैनाती वाला अस्पताल नहीं होने से छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी दूसरे कस्बों का रुख करना पड़ता है। गंभीर मरीजों को समय पर उपचार मिलने में देर होने से जान का खतरा बना रहता है। इसके साथ ही 30 किलोमीटर दूर गंभीर मरीज को ले जाने में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। अक्सर लोगों को गाड़ी बुक करनी पड़ती है।
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दो साल से संबद्ध हैं चिकित्सक
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में तैनात रहे चिकित्सक डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी को करीब दो साल पहले अतर्रा के आयुर्वेदिक चिकित्सालय से संबद्ध कर दिया गया था। वर्तमान में यहां डॉ. सुनील कुमार सप्ताह के शुरुआती तीन दिन और फार्मासिस्ट रामरूप अगले तीन दिन संबद्ध रहते हैं। ऐसे में क्षेत्र की बड़ी आबादी की जरूरत के मुताबिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
इन गांवों के लोग प्रभावित
खप्टिहा कलां के अलावा अलोना, साड़ी, खरेई, उसरा, रेहुटा, अमलोर, पिपरहरी, निवाइच, अतरहट और कछार आदि गांव के लोग इलाज नहीं मिलने के कारण प्रभावित होते हैं। ग्रामीणों की मांग है कि यहां एक सीएचसी या पीएचसी खोली जाए और चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित तैनाती की जाए ताकि इलाज के लिए दूर न जाना पड़े। खासकर महिलाओं और गर्भवती मरीजों के लिए स्थानीय स्तर पर उपचार की व्यवस्था जरूरी है।
लोग बोले-आयुर्वेदिक अस्पताल के भरोसे है
आयुर्वेदिक अस्पताल के भरोसे गंभीर बीमारियों का इलाज संभव नहीं है। संक्रामक बीमारियों के दौरान लोगों को भागकर बांदा जाना पड़ता है। इलाज की व्यवस्था नहीं होने से कई बार तो मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देता है।
-चंद्रपाल प्रजापति।
पैलानी में एक बड़े सरकारी अस्पताल की बहुत ही सख्त जरूरत है। अस्पताल में एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती की जाए। नियमित इलाज की ठोस व्यवस्था हो।
-जयकरन सिंह।
पैलानी के साथ ही खप्टिहा कलां की आबादी भी अस्पताल नहीं होने से परेशान होती है। जसपुरा और बांदा दोनों करीब-करीब 30 किलोमीटर पड़ जाते हैं।
-इंद्रपाल यादव
बीमार होने पर आयुर्वेदिक अस्पताल जाते हैं या फिर 30 किमी दूर जसपुरा सीएचसी। दिक्कत बढ़ने पर बांदा जिला अस्पताल जाते हैं। पैलानी में एक सरकारी अस्पताल होना चाहिए।
-केशन वर्मा।
जसपुरा सीएचसी की स्थिति पर नजर
बांदा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, सर्जन और बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. दीपक यादव ने बताया कि अस्पताल में चिकित्सक डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. सबीना, डॉ. एकता (दंत चिकित्सक), डॉ. दीप्ति और डॉ. हिमांशु सेवाएं दे रहे हैं।
लैब टेक्नीशियन सुधांशु सागर, लैब इंचार्ज शैलेंद्र यादव, फार्मासिस्ट राजेंद्र नामदेव व शैलेंद्र पटेल, डेंटल स्टाफ आलोक तथा लेबर रूम में स्टाफ नर्स रुचि, अभिलाषा, अंकिता और वंदना समेत अन्य कर्मचारी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। एक्सरे और सामान्य पैथोलॉजी जांच जारी है।
कर्मियों के नहीं आने से टीबी, एचआईवी और गैर-संचारी रोगों की जांच करने वाली एनसीडी लैब बंद हैं। रात में आपातकालीन सेवाओं के लिए एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी लगाई जाती है। रोजाना यहां करीब 250 से 300 लोगों की ओपीडी हो जाती है।
वर्जन
पैलानी में पीएचसी खुली हुई है और वहां स्टाफ तैनात है। अगर किसी तरह की लापरवाही की जा रही है तो इसकी शिकायत करें। ग्रामीणों की मांग है तो इस पर नियमों के अनुसार गौर किया जाएगा।
-डाॅ. विजेंद्र सिंह, सीएमओ बांदा।

फोटो-30- खप्टिहा कलां में खुला आयुर्वेदिक अस्पताल। संवाद

फोटो-30- खप्टिहा कलां में खुला आयुर्वेदिक अस्पताल। संवाद

फोटो-30- खप्टिहा कलां में खुला आयुर्वेदिक अस्पताल। संवाद

फोटो-30- खप्टिहा कलां में खुला आयुर्वेदिक अस्पताल। संवाद