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Banda News: कामदगिरी परिक्रमा से लापता बेटे से 11 वर्ष बाद मिलकर मां के झलके आंसू, बोली... शुक्रिया

Sat, 13 Dec 2025 12:34 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Sat, 13 Dec 2025 12:34 AM IST
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A mother burst into tears after meeting her son, who had been missing from the Kamadgiri Parikrama for 11 years, and said, "Thank you."
फोटो- 17 लापता बेटे को मां को सौंपते पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल। संवाद
बांदा। चित्रकूट के कामदगिरी परिक्रमा पथ से 11 वर्ष पहले लापता हुआ मासूम आज 17 वर्ष का किशोर बन चुका है। वर्षों की पीड़ा, संघर्ष और इंतजार के बाद जब वह अपनी मां के आंचल से लिपटा तो दोनों की आंखों से बहते आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। कांपती आवाज में बस मां ने इतना कहा कि धन्यवाद... 11 साल बाद मेरा बेटा मिल गया।
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मामला वर्ष 2014-15 का है, जिले के मर्का थाना क्षेत्र के ग्राम मऊ निवासी संगीता देवी अपने छह वर्षीय बेटे किशन के साथ कामदगिरी की परिक्रमा करने गई थीं। तभी भीड़ के बीच अचानक किशन गायब हो गया। परिवार ने महीनों किशन की खोजबीन की पर कोई सुराग नहीं मिला। मामला ठंडा पड़ गया, लेकिन किस्मत ने एक दिन करवट ली। बीते जुलाई माह में मटौंध-महोबा रेलवे लाइन के किनारे एक ट्रैकमैन ने किशोर को अकेले, भयभीत और भटके हुए देखा। उसने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी। पीआरवी ने बच्चे को सुरक्षित कर चाइल्ड हेल्पलाइन महोबा भेजा। काउंसलिंग के दौरान जब किशोर ने अपना नाम किशन और खुद को बांदा जिले का निवासी होने का जिक्र किया, तब पुलिस ने उसकी असली पहचान तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाया।
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बंधुआ मजदूरी और प्रताड़ना की दर्दनाक कहानी
बांदा। अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज ने बताया कि जांच के दौरान जो सच सामने आया, वह व्यवस्था को झकझोर देने वाला था। कामदगिरी से गायब होने के बाद मासूम को जौरही गांव के राजेश कुशवाहा अपने साथ घर ले गया और वर्षों तक बंधुआ मजदूरी कराता रहा। बाद में उसने बच्चे को सबल सिंह को बेच दिया। सबल ने फिर उसे संजय सिंह को बेच दिया।
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संजय ने उसे आगे मटौंध क्षेत्र के भुरेड़ी निवासी देवेंद्र सिंह के हाथों दे दिया, जहां वह प्रताड़ना और मजबूरन मजदूरी सहने को विवश रहा। इन सब जगहों पर किशन को अलग-अलग तरह से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। सालों तक वह एक अदृश्य कैदी की तरह जिंदगी काटता रहा। अंत में एक दिन मौका पाकर वह वहां से भाग निकला और रेलवे ट्रैक के सहारे आगे बढ़ता रहा। यही उसका जीवन बचाने वाला मोड़ साबित हुआ। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए 10 जुलाई 2025 को कुल सात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की। किशोर को ललितपुर बाल संरक्षण गृह में सुरक्षित रखा गया। अक्टूबर माह में देहात कोतवाली क्षेत्र के जैरही निवासी राजेश कुशवाहा, सबल सिंह, संजय सिंह व मटौंध थाना क्षेत्र के भुरेड़ी निवासी देवेंद्र सिंह को दोषी मानते हुए गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। (संवाद)

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एक-दूसरे को देखकर फफक पड़े मां-बेटे
अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज बताते हैं कि संयुक्त टीम की छह माह की पड़ताल के बाद पता चला कि किशन की मां संगीता देवी गुजरात में मजदूरी करती हैं। उनसे संपर्क कर उन्हें तत्काल बांदा बुलाया गया। जब किशन मां के सामने आया तो संगीता देवी उसे देखते ही फफक पड़ीं। बेटा- मां से लिपटकर रोने लगा। संगीता देवी ने हाथ जोड़ कर पुलिस अधिकारियों से कहने लगी कि आप लोग देवदूत की तरह मिले… जिन्होंने मेरा खोया लाल मुझे लौटा दिया।
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