{"_id":"76152","slug":"Banda-76152-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"अच्छा था या बुरा था इससे नहीं मतलब...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अच्छा था या बुरा था इससे नहीं मतलब...
Banda
Updated Thu, 10 May 2012 12:00 PM IST
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बांदा। ‘अच्छा था या बुरा था इससे नहीं मतलब, मतलब हमें फकत था थोडे़ से मालो जर से...’ शायर डा.राज के इस कलाम ने बज्मे इकरारिया की तरही मुशायरा महफिल को गर्मा दिया। देर रात तक शेरो-शायरी का सिलसिला चलता रहा। कार्यक्रम में कुछ बाहरी शायर भी शामिल हुए।
मंगलवार की रात हुए इस मुशायरे की सदारत महोबा से आए बुजुर्ग शायर कामिल महोबवी ने की। मिसरह तरह था- ‘अरमान कितने लेकर निकले थे अपने घर से।’ नवाब असर ने पढ़ा- ‘उनको रिज्क देते हैं जैसे तुमको, बच्चे न कत्ल करना फाकाकशी के डर से।’ अहमद दिलनवाज ने पढ़ा- ‘बीमार दिल हमारा देगा तुम्हें दुआएं, निकलो गर जो होकर बीमार के नगर से।’ हुबाब ने शेर सुनाया- ‘उनके बदन की खुशबू हर सिम्त आ रही है, महसूस हो रहा है गुजरें हैं वो इधर से।’ शायर अशगर ने पढ़ा- ‘जिसकी भी दुम उठाई मादा नजर वो आए, अब गिर गए हैं मेरी उस्ताद भी नजर से।’
इनके अलावा मुशायरे में खादिम, शरीफ, वाकिफ, हसरत, निश्तर, खालिद, तारिक, अजीज, रहमान, सईद, हाशिम, अनवर और वारिस आदि शायरों ने भी कलाम पेश किए। अगला तरही मुशायरा तीन जून को होगा। ब्यूरो
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मंगलवार की रात हुए इस मुशायरे की सदारत महोबा से आए बुजुर्ग शायर कामिल महोबवी ने की। मिसरह तरह था- ‘अरमान कितने लेकर निकले थे अपने घर से।’ नवाब असर ने पढ़ा- ‘उनको रिज्क देते हैं जैसे तुमको, बच्चे न कत्ल करना फाकाकशी के डर से।’ अहमद दिलनवाज ने पढ़ा- ‘बीमार दिल हमारा देगा तुम्हें दुआएं, निकलो गर जो होकर बीमार के नगर से।’ हुबाब ने शेर सुनाया- ‘उनके बदन की खुशबू हर सिम्त आ रही है, महसूस हो रहा है गुजरें हैं वो इधर से।’ शायर अशगर ने पढ़ा- ‘जिसकी भी दुम उठाई मादा नजर वो आए, अब गिर गए हैं मेरी उस्ताद भी नजर से।’
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इनके अलावा मुशायरे में खादिम, शरीफ, वाकिफ, हसरत, निश्तर, खालिद, तारिक, अजीज, रहमान, सईद, हाशिम, अनवर और वारिस आदि शायरों ने भी कलाम पेश किए। अगला तरही मुशायरा तीन जून को होगा। ब्यूरो
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