{"_id":"41-184303","slug":"Banda-184303-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"केंद्र सरकार से मिले धन तो आएं अच्छे दिन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केंद्र सरकार से मिले धन तो आएं अच्छे दिन
Banda
Updated Wed, 04 Jun 2014 05:31 AM IST
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हाईटेक मंडी निर्माण को बजट का इंतजार
बांदा। जिले में केंद्रीय सहायता से बुुंदेलखंड पैकेज के तहत चल रही योजनाओें को पूरा करने के लिए बजट का इंतजार है। लगभग एक अरब की लागत से हाईटेक मंडी व ग्रामीण मंडियों के लिए अभी भी 50 करोड़ रुपये की दरकार है।
केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज के तहत वर्ष 2010-11 में भूमि विकास एवं जल संसाधन, वन विभाग, कृषि एवं पशुपालन, जल निगम, ग्राम विकास, लघु सिंचाई, उद्यान, सिंचाई और कृषि उत्पादन मंडी परिषद आदि के लिए 3 अरब 56 करोड़ 48 लाख की कार्य योजना स्वीकृत की थी। 117 करोड़ अवमुक्त करने के बाद केंद्र सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। वजह यह बताई कि समय से विभागों ने धनराशि का उपभोग नहीं किया। पैकेज में सिर्फ मंडी निर्माण के लिए 101 करोड़ 28 लाख रुपये निर्धारित था। इसमें पिछले वित्तीय वर्ष तक 51 करोड़ 77 लाख जारी किए गए। पैकेज की समीक्षा कर रहे रेन फेड अथार्टी के डॉ. जेएस सामरा ने 6 माह पहले यहां बैठक में कहा था कि अब पैकेज से अगली किश्त मिलने की उम्मीद नहीं है। लिहाजा नए काम शुरू करने के बजाए पुराने काम पूरा करने को प्राथमिकता दें।
ग्रामीण क्षेत्रों में मुरवल, कमासिन, बड़ोखर बुजुर्ग, करतल, मोतियारी, सिंहपुर, बदौसा, मटौंध, पैलानी, बिलगांव, पुकारी, जामू, सिमौनी, नहरी, गोखिया, जसपुरा, पलरा, गिरवां में कृषि विपणन हाट व गोदाम बनाए जा रहे हैं। इनमें अधिकांश अधूरे हैं। इनमें प्रत्येक की लागत लगभग डेढ़ करोड़ है। उधर, जिला मुख्यालय में हाईटेक मंडी निर्माण का काम मंडी परिषद की निर्माण इकाई ठेकेदारों के माध्यम से करा रही है। इसकी लागत 64 करोड़ है। 5-5 हजार मीट्रिक टन क्षमता के चार गोदाम, 172 दुकानें, 100-100 मीट्रिक टन क्षमता के 18 गोदाम, 5 नीलामी चबूतरा, किसान विश्राम गृह, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय, पुलिस चौकी व पेयजल पंप हाउस प्रस्तावित हैं। यह निर्माण लगभग 120 एकड़ क्षेत्रफल में किया जा रहा है।
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विभागीय बजट से चल रहा काम
बांदा। उपनिदेशक निर्माण राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद नरेंद्र कुमार गोयल का कहना है कि पैकेज के अलावा मंडी परिषद के बजट से काम चलाया जा रहा है। सिर्फ पैकेज के सहारे रहते तो अब तक काम ठप हो गया होता। फिलहाल पैकेज की रकम रुकने से ग्रामीण क्षेत्रोें में नई प्रस्तावित हाट पर रोक लगा दी गई है। मुख्यालय स्थित हाईटेक मंडी को पूरा करना प्राथमिकता है।
परवान नहीं चढ़ी आईडब्ल्यूएमपी योजना
बांदा। गिरते जल स्तर को रोकने तथा बारिश के पानी का उपयोग सिंचाई में करने के उद्देश्य से आईडब्ल्यूएमपी योजना के तहत बुंदेलखंड पैकेज से जिले को 56 करोड़ 88 लाख रुपये मिले। भूमि संरक्षण विभाग की अलग-अलग तीन इकाइयों को करीब आधा सैकड़ा चेकडैम बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसमें पैकेज से करीब 17 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए। विभागीय लापरवाही और सत्ता दल के नेताओं के बीच पूरे साल निविदाएं डलवाने में खींचतान मची रही। पिछले वर्ष वित्तीय साल के अंत में किसी तरह टेंडर तो हुए, चैकडैम के निर्माण पूरे नहीं हो सके। विभागीय आंकड़ों की मानें तो अभी तक इसमें 89 लाख रुपये ही खर्च हो पाए हैं। बाकी की धनराशि सरेंडर हो गई।
धराशाई हुई स्वजल धारा योजना
बांदा। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत संचालित स्वजल धारा योजना कामयाबी के पहले ही धराशाई हो गई। वर्ष 2004-05 में योजना शुरू हुई। गांवों में पेयजल टंकी व पाइप लाइन और बोरिंगों के लिए दो साल बाद वर्ष 2006 में दो करोड़ 4 लाख रुपये सरकार से मिले। इस योजना में 90 फीसदी केंद्र सरकार और 10 फीसदी ग्राम पंचायत का अंश लाभार्थियों को जमा करना था। ग्रामीण इलाकों में पेयजल टंकी व बोरिंगों का काम शुरू किया। कार्य पूरे भी नहीं हुए और 2008 में योजना बंद कर दी गई। बबेरू, बेंदाघाट, तिंदवारी, जसपुरा में आज भी अधूरा टंकियां व बोरिंग योजना को मुंह चिढ़ा रही हैं। बीते जुलाई माह में सरकार ने विभाग से योजना की अवशेष राशि मय ब्याज सरेंडर करने के आदेश दिए हैं। विभाग ने इसमें 40 फीसदी धनराशि खर्च कर दी है। बाकी 23 लाख 79 हजार रुपये ब्याज मिलाकर दो करोड़ 28 लाख 58 हजार रुपये वापस भेज दिए गए।
ग्राम समूह पेयजल में लगा दिए 1182.86 लाख ठिकाने
बांदा। बुंदेलखंड पैकेज से जल निगम विभाग को ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत 18715.73 लाख रुपये स्वीकृत हुए। इसमें से 1442.23 लाख रुपये अवमुक्त हो चुके हैं। विभाग ने 1182.86 लाख रुपये पेयजल योजनाओं में ठिकाने लगा दिए।
सूखे बुंदेलखंड को पानी से तृप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 से अब तक पैकेज के तहत चित्रकूटधाम मंडल को करोड़ों रुपये अवमुक्त कर दिए। बांदा जनपद में सिंधनकला ग्राम समूह पेयजल योजना में वर्ष 2012 में दो करोड़ 84 लाख 98 हजार स्वीकृति किए। इसमें से एक करोड़ 13 लाख 99 हजार रुपये अवमुक्त हो गए। अब तक जल निगम ने इसमें 30 लाख रुपये खपा दिए। बसरेही ग्राम पेयजल योजना के लिए इसी साल 1 करोड़ 66 लाख 39 हजार रुपये स्वीकृत हुए। सरकार ने 66 लाख 56 हजार अवमुक्त कर दिया। इसमें से 20 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। महोबा में जैतपुर ग्राम समूह पेयजल पुनर्गठन योजना (श्रोत आर्वधन) में सरकार ने 1096.72 लाख रुपये स्वीकृत किए। इसमें से 608.11 लाख विभाग को मिले। इसमें से पूरी धनराशि खर्च हो गई। बाकी बजट न आने से कार्य अधूरा है। सिजहरी ग्राम पंचायत पेयजल योजना के लिए 320.35 लाख स्वीकृत हुए और पूरी धनराशि अवमुक्त व खर्च हो गई। मंगरिया ग्राम पाइप पेयजल योजना के तहत 161.76 लाख स्वीकत और 64.70 लाख मिले। इसमें 48.35 लाख रुपये ठिकाने लगे। बसौठ में 224.95 लाख स्वीकृत हुए और 89.98 लाख अवमुक्त हुए। इसमें 55.35 लाख ठिकाने लगे। सिरसी खुर्द में 186.95 लाख स्वीकृ़त हुए। इसमें 74.78 लाख मिले और 52.35 लाख खर्च हो गए। घुटई ग्राम पाइप पेयजल योजना में 259.39 लाख मिले। 103.76 लाख मिले और 48.35 लाख योजना में खप गए।
कांशीराम कालोनियों में पेयजल पर 3.22 करोड़ खर्च
बांदा। कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना में पेयजल पर वर्ष 2011 में बांदा में 1500 हैंडपंपों में 86.66 लाख खप गए। महोबा में 1836 हैंडपंप लगाकर 1 करोड़ 27 लाख 81 हजार जल निगम ने खर्च कर दिए। हमीरपुर व राठ में 1500 हैंडपंपों पर एक करोड़ 8 लाख रुपये ठिकाने लग गए। इस तरह जल निगम ने काशीराम कालोनियों में नलकूप, अवर जलाशय व हैंडपंपों में तीन करोड़ 22 लाख 28 हजार रुपये खर्च कर दिए। फिर भी कांशीराम आवासों में पेयजल को लेकर हाहाकार है।
1500 हैंडपंपों पर 200 करोड़ खपे
बांदा। प्रधानामंत्री मनमोहन सिंह व कांग्रेस राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के जनपद दौरे के समय पेयजल संकट दूर करने को अवमुक्त 200 करोड़ रुपये 1600 हैंडपंपों में ठिकाने लगा दिए गए। चित्रकूट व बांदा जनपद में 400-400 हैंडपंप, महोबा में 500 तथा हमीरपुर में 300 हैंडपंप लगाए गए। मैदानी क्षेत्र में एक हैंडपंप पर 40 हजार रुपये तथा क्रिटिकल क्षेत्रों में 60-65 हजार प्रति हैंडपंप लागत लगी। जल निगम का दावा है कि यह हैंडपंप वर्तमान में लोगों की प्यास बुझा रहे हैं।
सीवर योजना में भी करोड़ों के वारे-न्यारे
बांदा। मंडल में सामान्य जलोत्सारण कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार से मिले अरबों रुपये ठिकाने लग गए। लेकिन सीवर योजना कामयाब नहीं हो सकी। इसके तहत बांदा में 359.39 लाख स्वीकृत हुए और 200 करोड़ मिल गए। मार्च 2014 तक योजना का कार्य पूर्ण होना है। चित्रकूट जनपद में 366.84 लाख स्वीकृत हुए और 366 लाख अवमुक्त हो गए। अप्रैल 2009 में शुरू हुई सीवर योजना जून 2013 में पूर्ण में होनी थी। जल निगम ने दोनों जनपदों में सीवर योजना पूरी करने के लिए 811.25 लाख का बजट और मांगा है।
ग्रामीण पेयजल मिशन में 1051.78 लाख मिले
बांदा। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन योजना में मंडल को गत तीन सालों में 1051.78 लाख रुपये मिले। हैंडपंप लगाने व रिबोर के लिए चित्रकूट में 283.35 लाख, बांदा में 380.46 लाख, महोबा में 202.72 लाख तथा हमीरपुर में 185.25 लाख रुपये अवमुक्त हुए। 1531 हैंडपंप के सापेक्ष 237 लगाए गए हैं। 1916 रिबोर के सापेक्ष 422 का रिबोर हुआ है। अन्य का कार्य चल रहा है।
33278.4 लाख की जरूरत
बांदा। मंडल में निर्माणाधीन ग्रामीण पाइप्ड पेयजल योजना के लिए निगम को 33278.4 लाख रुपये की जरूरत है। विभाग के पास 10625.7 लाख रुपये उपलब्ध हैं। जल निगम विभाग 7543. 62 लाख रुपये इस योजना में खर्च कर चुका है।
मंडल में पेयजल योजना पर 4775 लाख खर्च
बांदा। मंडल में ग्राम पेयजल योजना में ओवरहेड टैंक, नलकूप, पाइप लाइन, स्टैंड पोस्ट व बिजली कनेक्शन के लिए चित्रकूट जनपद को कुल 25698.58 लाख के सापेक्ष 6903.87 लाख मिले। इसमें 4775 खर्च हुए। जिले में गढ़चपा पेयजल योजना को 866 लाख लागत में 376 लाख मिले हैं और 22 लाख खर्च हो गए। लौड़ी में 646 लाख के सापेक्ष 280 मिले 16.50 खर्च, बरगढ़ में 2011-12 में 6257.83 लाख लागत के सापेक्ष 4947.06 लाख मिले और 4775 लाख रुपये खप गए। वर्ष 2011-12 में मऊ परियोजना के लिए 17937.16 लाख के सापेक्ष 1300 लाख मिले और 1250 लाख रुपये खर्च हो गए। बांदा जनपद में खंडेह परियोजना को वर्ष 2010 में 356.26 लाख के सापेक्ष पूरे स्वीकृत हुए और 305 लाख रुपये खर्च हो गए। 2011 में क्योटरा मरौली के लिए 41.20 लाख की योजना पर पूरे मिले और 12 लाख खर्च हुए। 2012 में पनगरा पेयजल योजना पर 797.28 लाख के सापेक्ष 396.22 लाख मिले और 295 लाख खप गए। वर्ष 2013 में अतर्रा के लिए 1349.61 लाख की लागत पर 481 मिले हैं। अभी कार्य शुरू नहीं हुआ। इसी साल बबेरू के लिए 1906.71 लाख के सापेक्ष 502.56 लाख मिले हैं। मर्का के लिए 1996.79 लाख की योजना में 606 लाख मिले हैं और 58 लाख खर्च हो गए।
महोबा जनपद में 2011 में दादरी परियोजना के लिए 181.60 लाख मिले और पूरे अवमुक्त हुए। 175 करोड़ रुपये खर्च। इसी साल पहरेथा को 189.19 के सापेक्ष पूरे अवमुक्त हुए और 171 लाख खर्च। 2010 में जगपुर में 36.92 लाख मिले और पूरे खर्च। किल्हौवा में इसी साल 310.98 लाख के सापेक्ष 276.48 लाख मिले और 250.60 लाख खर्च। 2013 में रिवई सुनैचा के लिए 550.61 लाख के सापेक्ष 215.110 लाख मिले और 56 लाख खर्च। 13 में ही मवई खुर्द को 347.99 लाख में 168.440 लाख मिले। 45.70 लाख खर्च। श्रीनगर में में 40.06 लाख के सापेक्ष 35.620 लाख मिले। छह लाख खर्च। अजनर के लिए 109.01 लाख में 96.900 लाख मिले और 40 लाख खर्च। बगनौरी में 8.72 लाख में 7.76 मिले और 4.6 लाख खर्च हुए। गंज परियोजना को 36.19 लाख के सापेक्ष 32.18 लाख मिले और 10.80 लाख खर्च। 2013 में ही सूपा को 10.36 के सापेक्ष 9.20 लाख मिले और 7.20 लाख खप गए। धरौन में 37.83 लाख के सापेक्ष 33.62 लाख मिले और 10.10 लाख खपा दिए गए। हमीरपुर जनपद में 2005 में इंगोहटा परियोजना पर 72.50 लाख में 54.20 लाख मिले और पूरे खर्च हो गए।
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बांदा। जिले में केंद्रीय सहायता से बुुंदेलखंड पैकेज के तहत चल रही योजनाओें को पूरा करने के लिए बजट का इंतजार है। लगभग एक अरब की लागत से हाईटेक मंडी व ग्रामीण मंडियों के लिए अभी भी 50 करोड़ रुपये की दरकार है।
केंद्र सरकार ने बुंदेलखंड पैकेज के तहत वर्ष 2010-11 में भूमि विकास एवं जल संसाधन, वन विभाग, कृषि एवं पशुपालन, जल निगम, ग्राम विकास, लघु सिंचाई, उद्यान, सिंचाई और कृषि उत्पादन मंडी परिषद आदि के लिए 3 अरब 56 करोड़ 48 लाख की कार्य योजना स्वीकृत की थी। 117 करोड़ अवमुक्त करने के बाद केंद्र सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। वजह यह बताई कि समय से विभागों ने धनराशि का उपभोग नहीं किया। पैकेज में सिर्फ मंडी निर्माण के लिए 101 करोड़ 28 लाख रुपये निर्धारित था। इसमें पिछले वित्तीय वर्ष तक 51 करोड़ 77 लाख जारी किए गए। पैकेज की समीक्षा कर रहे रेन फेड अथार्टी के डॉ. जेएस सामरा ने 6 माह पहले यहां बैठक में कहा था कि अब पैकेज से अगली किश्त मिलने की उम्मीद नहीं है। लिहाजा नए काम शुरू करने के बजाए पुराने काम पूरा करने को प्राथमिकता दें।
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ग्रामीण क्षेत्रों में मुरवल, कमासिन, बड़ोखर बुजुर्ग, करतल, मोतियारी, सिंहपुर, बदौसा, मटौंध, पैलानी, बिलगांव, पुकारी, जामू, सिमौनी, नहरी, गोखिया, जसपुरा, पलरा, गिरवां में कृषि विपणन हाट व गोदाम बनाए जा रहे हैं। इनमें अधिकांश अधूरे हैं। इनमें प्रत्येक की लागत लगभग डेढ़ करोड़ है। उधर, जिला मुख्यालय में हाईटेक मंडी निर्माण का काम मंडी परिषद की निर्माण इकाई ठेकेदारों के माध्यम से करा रही है। इसकी लागत 64 करोड़ है। 5-5 हजार मीट्रिक टन क्षमता के चार गोदाम, 172 दुकानें, 100-100 मीट्रिक टन क्षमता के 18 गोदाम, 5 नीलामी चबूतरा, किसान विश्राम गृह, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पशु चिकित्सालय, पुलिस चौकी व पेयजल पंप हाउस प्रस्तावित हैं। यह निर्माण लगभग 120 एकड़ क्षेत्रफल में किया जा रहा है।
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विभागीय बजट से चल रहा काम
बांदा। उपनिदेशक निर्माण राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद नरेंद्र कुमार गोयल का कहना है कि पैकेज के अलावा मंडी परिषद के बजट से काम चलाया जा रहा है। सिर्फ पैकेज के सहारे रहते तो अब तक काम ठप हो गया होता। फिलहाल पैकेज की रकम रुकने से ग्रामीण क्षेत्रोें में नई प्रस्तावित हाट पर रोक लगा दी गई है। मुख्यालय स्थित हाईटेक मंडी को पूरा करना प्राथमिकता है।
परवान नहीं चढ़ी आईडब्ल्यूएमपी योजना
बांदा। गिरते जल स्तर को रोकने तथा बारिश के पानी का उपयोग सिंचाई में करने के उद्देश्य से आईडब्ल्यूएमपी योजना के तहत बुंदेलखंड पैकेज से जिले को 56 करोड़ 88 लाख रुपये मिले। भूमि संरक्षण विभाग की अलग-अलग तीन इकाइयों को करीब आधा सैकड़ा चेकडैम बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसमें पैकेज से करीब 17 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए। विभागीय लापरवाही और सत्ता दल के नेताओं के बीच पूरे साल निविदाएं डलवाने में खींचतान मची रही। पिछले वर्ष वित्तीय साल के अंत में किसी तरह टेंडर तो हुए, चैकडैम के निर्माण पूरे नहीं हो सके। विभागीय आंकड़ों की मानें तो अभी तक इसमें 89 लाख रुपये ही खर्च हो पाए हैं। बाकी की धनराशि सरेंडर हो गई।
धराशाई हुई स्वजल धारा योजना
बांदा। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत संचालित स्वजल धारा योजना कामयाबी के पहले ही धराशाई हो गई। वर्ष 2004-05 में योजना शुरू हुई। गांवों में पेयजल टंकी व पाइप लाइन और बोरिंगों के लिए दो साल बाद वर्ष 2006 में दो करोड़ 4 लाख रुपये सरकार से मिले। इस योजना में 90 फीसदी केंद्र सरकार और 10 फीसदी ग्राम पंचायत का अंश लाभार्थियों को जमा करना था। ग्रामीण इलाकों में पेयजल टंकी व बोरिंगों का काम शुरू किया। कार्य पूरे भी नहीं हुए और 2008 में योजना बंद कर दी गई। बबेरू, बेंदाघाट, तिंदवारी, जसपुरा में आज भी अधूरा टंकियां व बोरिंग योजना को मुंह चिढ़ा रही हैं। बीते जुलाई माह में सरकार ने विभाग से योजना की अवशेष राशि मय ब्याज सरेंडर करने के आदेश दिए हैं। विभाग ने इसमें 40 फीसदी धनराशि खर्च कर दी है। बाकी 23 लाख 79 हजार रुपये ब्याज मिलाकर दो करोड़ 28 लाख 58 हजार रुपये वापस भेज दिए गए।
ग्राम समूह पेयजल में लगा दिए 1182.86 लाख ठिकाने
बांदा। बुंदेलखंड पैकेज से जल निगम विभाग को ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत 18715.73 लाख रुपये स्वीकृत हुए। इसमें से 1442.23 लाख रुपये अवमुक्त हो चुके हैं। विभाग ने 1182.86 लाख रुपये पेयजल योजनाओं में ठिकाने लगा दिए।
सूखे बुंदेलखंड को पानी से तृप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2010 से अब तक पैकेज के तहत चित्रकूटधाम मंडल को करोड़ों रुपये अवमुक्त कर दिए। बांदा जनपद में सिंधनकला ग्राम समूह पेयजल योजना में वर्ष 2012 में दो करोड़ 84 लाख 98 हजार स्वीकृति किए। इसमें से एक करोड़ 13 लाख 99 हजार रुपये अवमुक्त हो गए। अब तक जल निगम ने इसमें 30 लाख रुपये खपा दिए। बसरेही ग्राम पेयजल योजना के लिए इसी साल 1 करोड़ 66 लाख 39 हजार रुपये स्वीकृत हुए। सरकार ने 66 लाख 56 हजार अवमुक्त कर दिया। इसमें से 20 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। महोबा में जैतपुर ग्राम समूह पेयजल पुनर्गठन योजना (श्रोत आर्वधन) में सरकार ने 1096.72 लाख रुपये स्वीकृत किए। इसमें से 608.11 लाख विभाग को मिले। इसमें से पूरी धनराशि खर्च हो गई। बाकी बजट न आने से कार्य अधूरा है। सिजहरी ग्राम पंचायत पेयजल योजना के लिए 320.35 लाख स्वीकृत हुए और पूरी धनराशि अवमुक्त व खर्च हो गई। मंगरिया ग्राम पाइप पेयजल योजना के तहत 161.76 लाख स्वीकत और 64.70 लाख मिले। इसमें 48.35 लाख रुपये ठिकाने लगे। बसौठ में 224.95 लाख स्वीकृत हुए और 89.98 लाख अवमुक्त हुए। इसमें 55.35 लाख ठिकाने लगे। सिरसी खुर्द में 186.95 लाख स्वीकृ़त हुए। इसमें 74.78 लाख मिले और 52.35 लाख खर्च हो गए। घुटई ग्राम पाइप पेयजल योजना में 259.39 लाख मिले। 103.76 लाख मिले और 48.35 लाख योजना में खप गए।
कांशीराम कालोनियों में पेयजल पर 3.22 करोड़ खर्च
बांदा। कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना में पेयजल पर वर्ष 2011 में बांदा में 1500 हैंडपंपों में 86.66 लाख खप गए। महोबा में 1836 हैंडपंप लगाकर 1 करोड़ 27 लाख 81 हजार जल निगम ने खर्च कर दिए। हमीरपुर व राठ में 1500 हैंडपंपों पर एक करोड़ 8 लाख रुपये ठिकाने लग गए। इस तरह जल निगम ने काशीराम कालोनियों में नलकूप, अवर जलाशय व हैंडपंपों में तीन करोड़ 22 लाख 28 हजार रुपये खर्च कर दिए। फिर भी कांशीराम आवासों में पेयजल को लेकर हाहाकार है।
1500 हैंडपंपों पर 200 करोड़ खपे
बांदा। प्रधानामंत्री मनमोहन सिंह व कांग्रेस राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के जनपद दौरे के समय पेयजल संकट दूर करने को अवमुक्त 200 करोड़ रुपये 1600 हैंडपंपों में ठिकाने लगा दिए गए। चित्रकूट व बांदा जनपद में 400-400 हैंडपंप, महोबा में 500 तथा हमीरपुर में 300 हैंडपंप लगाए गए। मैदानी क्षेत्र में एक हैंडपंप पर 40 हजार रुपये तथा क्रिटिकल क्षेत्रों में 60-65 हजार प्रति हैंडपंप लागत लगी। जल निगम का दावा है कि यह हैंडपंप वर्तमान में लोगों की प्यास बुझा रहे हैं।
सीवर योजना में भी करोड़ों के वारे-न्यारे
बांदा। मंडल में सामान्य जलोत्सारण कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार से मिले अरबों रुपये ठिकाने लग गए। लेकिन सीवर योजना कामयाब नहीं हो सकी। इसके तहत बांदा में 359.39 लाख स्वीकृत हुए और 200 करोड़ मिल गए। मार्च 2014 तक योजना का कार्य पूर्ण होना है। चित्रकूट जनपद में 366.84 लाख स्वीकृत हुए और 366 लाख अवमुक्त हो गए। अप्रैल 2009 में शुरू हुई सीवर योजना जून 2013 में पूर्ण में होनी थी। जल निगम ने दोनों जनपदों में सीवर योजना पूरी करने के लिए 811.25 लाख का बजट और मांगा है।
ग्रामीण पेयजल मिशन में 1051.78 लाख मिले
बांदा। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन योजना में मंडल को गत तीन सालों में 1051.78 लाख रुपये मिले। हैंडपंप लगाने व रिबोर के लिए चित्रकूट में 283.35 लाख, बांदा में 380.46 लाख, महोबा में 202.72 लाख तथा हमीरपुर में 185.25 लाख रुपये अवमुक्त हुए। 1531 हैंडपंप के सापेक्ष 237 लगाए गए हैं। 1916 रिबोर के सापेक्ष 422 का रिबोर हुआ है। अन्य का कार्य चल रहा है।
33278.4 लाख की जरूरत
बांदा। मंडल में निर्माणाधीन ग्रामीण पाइप्ड पेयजल योजना के लिए निगम को 33278.4 लाख रुपये की जरूरत है। विभाग के पास 10625.7 लाख रुपये उपलब्ध हैं। जल निगम विभाग 7543. 62 लाख रुपये इस योजना में खर्च कर चुका है।
मंडल में पेयजल योजना पर 4775 लाख खर्च
बांदा। मंडल में ग्राम पेयजल योजना में ओवरहेड टैंक, नलकूप, पाइप लाइन, स्टैंड पोस्ट व बिजली कनेक्शन के लिए चित्रकूट जनपद को कुल 25698.58 लाख के सापेक्ष 6903.87 लाख मिले। इसमें 4775 खर्च हुए। जिले में गढ़चपा पेयजल योजना को 866 लाख लागत में 376 लाख मिले हैं और 22 लाख खर्च हो गए। लौड़ी में 646 लाख के सापेक्ष 280 मिले 16.50 खर्च, बरगढ़ में 2011-12 में 6257.83 लाख लागत के सापेक्ष 4947.06 लाख मिले और 4775 लाख रुपये खप गए। वर्ष 2011-12 में मऊ परियोजना के लिए 17937.16 लाख के सापेक्ष 1300 लाख मिले और 1250 लाख रुपये खर्च हो गए। बांदा जनपद में खंडेह परियोजना को वर्ष 2010 में 356.26 लाख के सापेक्ष पूरे स्वीकृत हुए और 305 लाख रुपये खर्च हो गए। 2011 में क्योटरा मरौली के लिए 41.20 लाख की योजना पर पूरे मिले और 12 लाख खर्च हुए। 2012 में पनगरा पेयजल योजना पर 797.28 लाख के सापेक्ष 396.22 लाख मिले और 295 लाख खप गए। वर्ष 2013 में अतर्रा के लिए 1349.61 लाख की लागत पर 481 मिले हैं। अभी कार्य शुरू नहीं हुआ। इसी साल बबेरू के लिए 1906.71 लाख के सापेक्ष 502.56 लाख मिले हैं। मर्का के लिए 1996.79 लाख की योजना में 606 लाख मिले हैं और 58 लाख खर्च हो गए।
महोबा जनपद में 2011 में दादरी परियोजना के लिए 181.60 लाख मिले और पूरे अवमुक्त हुए। 175 करोड़ रुपये खर्च। इसी साल पहरेथा को 189.19 के सापेक्ष पूरे अवमुक्त हुए और 171 लाख खर्च। 2010 में जगपुर में 36.92 लाख मिले और पूरे खर्च। किल्हौवा में इसी साल 310.98 लाख के सापेक्ष 276.48 लाख मिले और 250.60 लाख खर्च। 2013 में रिवई सुनैचा के लिए 550.61 लाख के सापेक्ष 215.110 लाख मिले और 56 लाख खर्च। 13 में ही मवई खुर्द को 347.99 लाख में 168.440 लाख मिले। 45.70 लाख खर्च। श्रीनगर में में 40.06 लाख के सापेक्ष 35.620 लाख मिले। छह लाख खर्च। अजनर के लिए 109.01 लाख में 96.900 लाख मिले और 40 लाख खर्च। बगनौरी में 8.72 लाख में 7.76 मिले और 4.6 लाख खर्च हुए। गंज परियोजना को 36.19 लाख के सापेक्ष 32.18 लाख मिले और 10.80 लाख खर्च। 2013 में ही सूपा को 10.36 के सापेक्ष 9.20 लाख मिले और 7.20 लाख खप गए। धरौन में 37.83 लाख के सापेक्ष 33.62 लाख मिले और 10.10 लाख खपा दिए गए। हमीरपुर जनपद में 2005 में इंगोहटा परियोजना पर 72.50 लाख में 54.20 लाख मिले और पूरे खर्च हो गए।