{"_id":"41-183820","slug":"Banda-183820-41","type":"story","status":"publish","title_hn":"धुएं के छल्लों में उड़ रहा धूम्रपान पर रोक का कानून","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धुएं के छल्लों में उड़ रहा धूम्रपान पर रोक का कानून
Banda
Updated Sat, 31 May 2014 05:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विश्व धूम्रपान निषेध दिवस पर विशेष
शौकीनों को कानून का ही नहीं है पता
विभागों में नहीं बनीं निगरानी समितियां
बांदा। कानून बनाने वालों ने अमल कराने की सुध नहीं ली। नतीजे में छह वर्षों बाद भी सरेआम सार्वजनिक स्थानों पर धुएं के छल्ले उड़ाने पर लगाम नहीं लग पाई। धूम्रपान के ज्यादातर शौकीनों को तो इस कानून का पता ही नहीं है। वह बेधड़क बीड़ी-सिगरेट के कश हर जगह खींच रहे हैं।
तंबाकू स्वास्थ्य के लिए न सिर्फ हानिकारक है, बल्कि जानलेवा भी है। सिगरेट, तंबाकू आदि के पाउच पर यह चेतावनी लिखी भी होती है। लगभग छह वर्षों पूर्व न्यायालय के आदेश पर पूरे देश में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने को प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन इस कानून पर कड़ाई से अमल नहीं कराया गया। नतीजे में सिगरेट, तंबाकू आदि का इस्तेमाल ज्यों का त्यों हो रहा है। हरेक सरकारी कार्यालय में भी धूम्रपान पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन यहां भी धूम्रपान पर कोई पाबंदी नहीं लग सकी। जबकि हर विभाग में तीन सदस्यीय समिति भी गठित की गई थी। सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करते पकड़े जाने पर 200 रुपए जुर्माने का प्राविधान है। कुछ सरकारी कार्यालयों में यह चेतावनी आदि भी लिखी नजर आती है। लेकिन समय गुजरने के साथ ही अधिकारियों ने इस कानून को ही भुला दिया। अब किसी कार्यालय में यह समिति गठित नहीं है।
उच्च न्यायालय के आदेशों पर गुटखा बिक्री पर रोक लगा दी गई है। शासन ने भी इस बारे में सख्त फरमान जारी किया। लेकिन इस आदेश का भी वही हश्र हुआ जो छह वर्ष पूर्व जारी हुए सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान निषेध का हुआ है। पहली अप्रैल 2013 से पूरे प्रदेश में खाद्य सुरक्षा मानक विक्रय प्रतिषेध एवं निबंधन विनिमय कानून लागू हुआ। इसके तहत तंबाकू मिश्रित गुटखों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसका भी निर्माताओं ने काट निकाल लिया। सादे गुटखे के साथ तंबाकू का छोटा पाउच भी अलग से मिल रहा है। इसके अलावा तंबाकू-सुपारी के अलग पाउच बनाकर बेंचे जा रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी चितरंजन कुमार का कहना है जनपद में अब तक 270 किलोग्राम गुटखा जब्त करके उन्हें नष्ट किया गया है। इनकी कीमत तकरीबन एक लाख 60 हजार 890 रुपये बताई गई है। बताया कि नए कानून के मुताबिक किसी भी खाद्य पदार्थ में तंबाकू या निकोटिन का प्रयोग प्रतिबंधित है। चोरी-छिपे तंबाकू मिश्रित गुटखा बेंचने और पाउच पर तंबाकू मिश्रित होने की सूचना दर्ज न पाए जाने पर तीन साल की सजा और 5000 रुपये जुर्माना हो सकता है।
कमाई का जरिया बना कानून
बांदा। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान रोकने का कानून कुछ विभागों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। इसमें रेल सुरक्षा बल सबसे आगे है। आरपीएफ और जीआरपी अक्सर रेलवे स्टेशन परिसर में किसी को बीड़ी-सिगरेट पीता देखकर दबोच लेती है। नियमत: पकड़े गए व्यक्ति से 200 रुपये जुर्माना वसूलकर उसकी रसीद दी जानी चाहिए। लेकिन मामला 100-50 में ही निपट जाता है। बीड़ी-सिगरेट के धुएं के बदले मिली रकम खाकी वर्दीधारियों की जेब में चली जाती है।
विभिन्न धाराओं में अलग-अलग दंड
बांदा। खाद्य सुरक्षा मानक विक्रय प्रतिषेध अधिनियम में अलग-अलग धाराओं में विभिन्न दंड के प्राविधान हैं। धारा डबल जेड (असुरक्षित खाद्य पदार्थ) में एक लाख रुपये जुर्माना। धारा 51 (मिलावट) पर एक लाख रुपये जुर्माना व एक साल की कैद। धारा 58 में (फलों में कार्बाइड या कोई जहरीला पदार्थ मिलाना) एक लाख रुपये जुर्माना और धारा 2, 3, 4 (खाद्य पदार्थों में तंबाकू या निकोटिन मिश्रित पाए जाने पर) एक लाख जुर्माना और मिश्रण के बारे में पाउच पर सूचना दर्ज न होने पर 3 साल की कैद और 5000 रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
तलब लगने पर चुइंगम
बांदा। तंबाकू, धूम्रपान पर रोक बेमकसद नहीं है। इसका सीधा संबंध आम आदमी की सेहत और जीवन से जुड़ा है। यह दोनों ही खतरनाक हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. एसडी त्रिपाठी बताते हैं कि गुटखा से मुंह का कैंसर हो सकता है। मुंह का कम खुलना, छाले पड़ना, चमड़ी सख्त या सफेद होना इसके लक्षण हैं। ‘सब न्यूकल फाइब्रोसिस’ रोग भी हो सकता है। सिगरेट-बीड़ी धूम्रपान से श्वांस संबंधी बीमारियां हो जाती हैं। दमा, फेफड़े व गले का कैंसर, हृदय रोग, हार्ट अटैक, आमाशय में अल्सर आदि मर्ज हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि तंबाकू में निकोटिन की मात्रा काफी होती है। यह नुकसानदेह है। इससे बचने के लिए चुइंगम का सहारा लिया जा सकता है। मुुंह में चुइंगम डालने से धूम्रपान की तलब कम होती है।
विज्ञापन
शौकीनों को कानून का ही नहीं है पता
विभागों में नहीं बनीं निगरानी समितियां
बांदा। कानून बनाने वालों ने अमल कराने की सुध नहीं ली। नतीजे में छह वर्षों बाद भी सरेआम सार्वजनिक स्थानों पर धुएं के छल्ले उड़ाने पर लगाम नहीं लग पाई। धूम्रपान के ज्यादातर शौकीनों को तो इस कानून का पता ही नहीं है। वह बेधड़क बीड़ी-सिगरेट के कश हर जगह खींच रहे हैं।
तंबाकू स्वास्थ्य के लिए न सिर्फ हानिकारक है, बल्कि जानलेवा भी है। सिगरेट, तंबाकू आदि के पाउच पर यह चेतावनी लिखी भी होती है। लगभग छह वर्षों पूर्व न्यायालय के आदेश पर पूरे देश में सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने को प्रतिबंधित कर दिया गया था। लेकिन इस कानून पर कड़ाई से अमल नहीं कराया गया। नतीजे में सिगरेट, तंबाकू आदि का इस्तेमाल ज्यों का त्यों हो रहा है। हरेक सरकारी कार्यालय में भी धूम्रपान पर रोक लगा दी गई थी। लेकिन यहां भी धूम्रपान पर कोई पाबंदी नहीं लग सकी। जबकि हर विभाग में तीन सदस्यीय समिति भी गठित की गई थी। सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करते पकड़े जाने पर 200 रुपए जुर्माने का प्राविधान है। कुछ सरकारी कार्यालयों में यह चेतावनी आदि भी लिखी नजर आती है। लेकिन समय गुजरने के साथ ही अधिकारियों ने इस कानून को ही भुला दिया। अब किसी कार्यालय में यह समिति गठित नहीं है।
विज्ञापन
उच्च न्यायालय के आदेशों पर गुटखा बिक्री पर रोक लगा दी गई है। शासन ने भी इस बारे में सख्त फरमान जारी किया। लेकिन इस आदेश का भी वही हश्र हुआ जो छह वर्ष पूर्व जारी हुए सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान निषेध का हुआ है। पहली अप्रैल 2013 से पूरे प्रदेश में खाद्य सुरक्षा मानक विक्रय प्रतिषेध एवं निबंधन विनिमय कानून लागू हुआ। इसके तहत तंबाकू मिश्रित गुटखों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसका भी निर्माताओं ने काट निकाल लिया। सादे गुटखे के साथ तंबाकू का छोटा पाउच भी अलग से मिल रहा है। इसके अलावा तंबाकू-सुपारी के अलग पाउच बनाकर बेंचे जा रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी चितरंजन कुमार का कहना है जनपद में अब तक 270 किलोग्राम गुटखा जब्त करके उन्हें नष्ट किया गया है। इनकी कीमत तकरीबन एक लाख 60 हजार 890 रुपये बताई गई है। बताया कि नए कानून के मुताबिक किसी भी खाद्य पदार्थ में तंबाकू या निकोटिन का प्रयोग प्रतिबंधित है। चोरी-छिपे तंबाकू मिश्रित गुटखा बेंचने और पाउच पर तंबाकू मिश्रित होने की सूचना दर्ज न पाए जाने पर तीन साल की सजा और 5000 रुपये जुर्माना हो सकता है।
कमाई का जरिया बना कानून
बांदा। सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान रोकने का कानून कुछ विभागों के लिए कमाई का जरिया बन गया है। इसमें रेल सुरक्षा बल सबसे आगे है। आरपीएफ और जीआरपी अक्सर रेलवे स्टेशन परिसर में किसी को बीड़ी-सिगरेट पीता देखकर दबोच लेती है। नियमत: पकड़े गए व्यक्ति से 200 रुपये जुर्माना वसूलकर उसकी रसीद दी जानी चाहिए। लेकिन मामला 100-50 में ही निपट जाता है। बीड़ी-सिगरेट के धुएं के बदले मिली रकम खाकी वर्दीधारियों की जेब में चली जाती है।
विभिन्न धाराओं में अलग-अलग दंड
बांदा। खाद्य सुरक्षा मानक विक्रय प्रतिषेध अधिनियम में अलग-अलग धाराओं में विभिन्न दंड के प्राविधान हैं। धारा डबल जेड (असुरक्षित खाद्य पदार्थ) में एक लाख रुपये जुर्माना। धारा 51 (मिलावट) पर एक लाख रुपये जुर्माना व एक साल की कैद। धारा 58 में (फलों में कार्बाइड या कोई जहरीला पदार्थ मिलाना) एक लाख रुपये जुर्माना और धारा 2, 3, 4 (खाद्य पदार्थों में तंबाकू या निकोटिन मिश्रित पाए जाने पर) एक लाख जुर्माना और मिश्रण के बारे में पाउच पर सूचना दर्ज न होने पर 3 साल की कैद और 5000 रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
तलब लगने पर चुइंगम
बांदा। तंबाकू, धूम्रपान पर रोक बेमकसद नहीं है। इसका सीधा संबंध आम आदमी की सेहत और जीवन से जुड़ा है। यह दोनों ही खतरनाक हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. एसडी त्रिपाठी बताते हैं कि गुटखा से मुंह का कैंसर हो सकता है। मुंह का कम खुलना, छाले पड़ना, चमड़ी सख्त या सफेद होना इसके लक्षण हैं। ‘सब न्यूकल फाइब्रोसिस’ रोग भी हो सकता है। सिगरेट-बीड़ी धूम्रपान से श्वांस संबंधी बीमारियां हो जाती हैं। दमा, फेफड़े व गले का कैंसर, हृदय रोग, हार्ट अटैक, आमाशय में अल्सर आदि मर्ज हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि तंबाकू में निकोटिन की मात्रा काफी होती है। यह नुकसानदेह है। इससे बचने के लिए चुइंगम का सहारा लिया जा सकता है। मुुंह में चुइंगम डालने से धूम्रपान की तलब कम होती है।