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बगैर वेतन भत्ता ‘चिकित्सा मित्र’ बनाने की मांग
Banda
Updated Tue, 21 May 2013 05:30 AM IST
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बांदा। प्राइवेट चिकित्सक मेडिकल एसोसिएशन ने अपंजीकृत चिकित्सकों को बगैर वेतन-भत्ता ‘चिकित्सा मित्र’ बनाने की मांग की है। एसोसिएशन ने प्रदर्शन और अधिकार रैली के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित सात सूत्रीय मांग पत्र अपर जिला मजिस्ट्रेट को सौंपा।
सोमवार को स्टेशन रोड स्थित होटल में प्राइवेट चिकित्सकों (आरएमपी) ने सुबह अधिकार बैठक की। दोपहर को कचहरी तक अधिकार रैली निकालते हुए पैदल रूट मार्च किया। कलेक्ट्रेट में एडीएम को ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन जिलाध्यक्ष डा. एके गेंगरी, मंडल अध्यक्ष डा. आरके जड़िया और प्रदेश महासचिव डा. डीके गुप्ता के हस्ताक्षरों से भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में तकरीबन साढ़े 12 लाख झोलाछाप (अपंजीकृत) चिकित्सक हैं। उन्हें ‘चिकित्सा मित्र’ बनाया जाए। आयुर्वेदिक/आरएमपी चिकित्सकों को एलोपैथिक प्रैक्टिस करने की छूट दी जाए। विभिन्न पद्धतियों में पंजीकृत चिकित्सकों को छह माह का प्रशिक्षण देकर ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती की जाए। शिक्षामित्र की तरह ‘चिकित्सा मित्र’ घोषित किया जाए। आरएमपी चिकित्सकों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और क्लीनिकों में काम करने वाले कर्मचारियों को नर्सिंग या डिग्री/डिप्लोमाधारक होना अनिवार्य किए जाने की मांग की। प्राइवेट चिकित्सकों को झोलाछाप का नाम न दिया जाए। उन पर छापामार कार्रवाई और नोटिस रोकी जाएं।
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सोमवार को स्टेशन रोड स्थित होटल में प्राइवेट चिकित्सकों (आरएमपी) ने सुबह अधिकार बैठक की। दोपहर को कचहरी तक अधिकार रैली निकालते हुए पैदल रूट मार्च किया। कलेक्ट्रेट में एडीएम को ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन जिलाध्यक्ष डा. एके गेंगरी, मंडल अध्यक्ष डा. आरके जड़िया और प्रदेश महासचिव डा. डीके गुप्ता के हस्ताक्षरों से भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में तकरीबन साढ़े 12 लाख झोलाछाप (अपंजीकृत) चिकित्सक हैं। उन्हें ‘चिकित्सा मित्र’ बनाया जाए। आयुर्वेदिक/आरएमपी चिकित्सकों को एलोपैथिक प्रैक्टिस करने की छूट दी जाए। विभिन्न पद्धतियों में पंजीकृत चिकित्सकों को छह माह का प्रशिक्षण देकर ग्रामीण क्षेत्रों में तैनाती की जाए। शिक्षामित्र की तरह ‘चिकित्सा मित्र’ घोषित किया जाए। आरएमपी चिकित्सकों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और क्लीनिकों में काम करने वाले कर्मचारियों को नर्सिंग या डिग्री/डिप्लोमाधारक होना अनिवार्य किए जाने की मांग की। प्राइवेट चिकित्सकों को झोलाछाप का नाम न दिया जाए। उन पर छापामार कार्रवाई और नोटिस रोकी जाएं।
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