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मनरेगा के डेढ़ अरब बजट में मजदूरों पर खर्च सिर्फ 57 करोड़
Banda
Updated Fri, 17 May 2013 05:30 AM IST
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बांदा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) गुजरे वित्तीय वर्ष में लगभग डेढ़ अरब रुपये के निर्धारित लेबर बजट मेें मात्र 57 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए। नतीजे में केंद्र सरकार से अगली धनराशि नहीं मिल पाई। अबकी चालू वित्तीय वर्ष में एक अरब 40 करोड़ रुपये का लेबर बजट तैयार किया गया है।
वित्तीय वर्ष 2012-13 में ग्राम्य विकास अभिकरण ने मनरेगा के तहत 1,39,86,28,000 रुपये का लेबर बजट तैयार किया था। इसमें केंद्र सरकार से 1,25,87,,65,000 और राज्य सरकार से 13,98,63,000 रुपये दिए जाने थे। 72.28 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित किया जाना था। ग्राम्य विकास अभिकरण 70,27,00,000 रुपये में मात्र 57,08,16,000 हजार रुपये ही खर्च कर पाया। 72.28 लाख मानव दिवस की जगह 32.67 लाख मानव दिवसोें में ही पूरा साल गुजर गया। सौ दिन काम देने की गारंटी भी हवा-हवाई साबित हुई। पंजीकृत 1,96,188 परिवारों में मात्र 3899 परिवारों को ही सौ दिन काम मिल पाया है। पिछले वर्ष रकम खर्च करने में नाकामी के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में डीआरडीए ने 1,40,23,31,000 रुपये का लेबर बजट तैयार किया है। इस धनराशि से 68.07 लाख मानव दिवस सृजित करने को लक्ष्य निर्धारित है।
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वित्तीय वर्ष 2012-13 में ग्राम्य विकास अभिकरण ने मनरेगा के तहत 1,39,86,28,000 रुपये का लेबर बजट तैयार किया था। इसमें केंद्र सरकार से 1,25,87,,65,000 और राज्य सरकार से 13,98,63,000 रुपये दिए जाने थे। 72.28 लाख मानव दिवस रोजगार सृजित किया जाना था। ग्राम्य विकास अभिकरण 70,27,00,000 रुपये में मात्र 57,08,16,000 हजार रुपये ही खर्च कर पाया। 72.28 लाख मानव दिवस की जगह 32.67 लाख मानव दिवसोें में ही पूरा साल गुजर गया। सौ दिन काम देने की गारंटी भी हवा-हवाई साबित हुई। पंजीकृत 1,96,188 परिवारों में मात्र 3899 परिवारों को ही सौ दिन काम मिल पाया है। पिछले वर्ष रकम खर्च करने में नाकामी के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में डीआरडीए ने 1,40,23,31,000 रुपये का लेबर बजट तैयार किया है। इस धनराशि से 68.07 लाख मानव दिवस सृजित करने को लक्ष्य निर्धारित है।
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