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91 नलकूप बंद, 9100 हेक्टेयर खेती में सिंचाई के लाले

Sun, 29 Nov 2020 10:35 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 29 Nov 2020 10:35 PM IST
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91 tubewells closed, 9100 hectares under cultivation
जसपुरा क्षेत्र के मरझा गांव में फेल नलकूप का निरीक्षण करते अधिशासी अभियंता (नलकूप खंड) ज्ञानेंद्? - फोटो : BANDA
बांदा। खरीफ के बाद अब रबी में भी किसानों के खेत पानी के लिए तरस रहे हैं। जिले के 91 सरकारी नलकूप बंद हैं। इनमें 71 नलकूप फेल हो चुके हैं और 20 यांत्रिक या बिजली की गड़बड़ी से बंद पड़े हैं।
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नतीजतन 9100 हेक्टेयर खेती की सिंचाई नहीं हो पा रही। लाखों रुपये की पूंजी लगाकर बुआई करने वाले सैकड़ों किसानों में चिंता के साथ आक्रोश भी है। नलकूप विभाग बजट का अभाव बताकर पल्ला झाड़ रहा है।
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जिले में कुल 747 सरकारी नलकूप हैं। इनसे 74,700 हेक्टेअर खेती की सिंचाई होती है। मौजूदा में सिर्फ 656 नलकूप ही चल रहे हैं, जिनसे 65,600 हेक्टेयर भूमि सींची जा रही है। बंद पड़े 91 नलकूपों से 9100 हेक्टेयर खेतों में सिंचाई नहीं हो पा रही है।
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यांत्रिक (मैकेनिकल) दोष से बंद नलकूप संख्या-96 (जमालपुर), 243 (पचनेही), 20 (डांड़ामऊ), 216 (भदेहदू), 203 (मुसीवां), 126 (औगासी), 73 (अलिहा), 89 (बंबिया), 24 (छिरेहुंटा), 260 (पिपरहरी) और विद्युत (इलेक्ट्रिकल) गड़बड़ी से बंद नलकूप- 170 (बेंदा), 193 (छापर), 146 (महबरा), 39 (चंदवारा), 96 (मऊ), 125 (मवई जुनारदार), 33 (तारा), 164, 163 (जौहरपुर), 21 (गजनी)।
बांदा। जिले को दो सालों से एक भी नया नलकूप शासन से आवंटित नहीं हुआ है। वर्ष 2019 में 1101 नलकूप योजना के तहत जिले को चार नलकूप मिले थे। इनमें अभी तक महज एक नलकूप भाटी (बबेरू) गांव में लगा है। तरायां (बबेरू) व मरझा (जसपुरा) गांवों के नलकूप अधूरे हैं। चौथे नलकूप के लिए स्थान चिह्नित नहीं हो सका है। प्रत्येक नलकूप की लागत लगभग 27 लाख रुपये है। चारों नलकूपों के लिए बजट आवंटित हो चुका है।

दो साल से नहीं मिला बजट
नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि फेल नलकूपों के रिबोर के लिए दो साल से बजट नहीं मिला है। खराब नलकूपों की मरम्मत के लिए पूरे साल में प्रति नलकूप आठ हजार रुपये मिलते हैं। इससे मामूली मरम्मत ही पाती है। पाइप लाइन या मोटर बदलने का काम नहीं हो सकता। शासन को समय-समय पर फेल और खराब नलकूपों के बारे में अवगत कराया जाता है।
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