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चंद्रग्रहण शुरू होते ही बंद हो गए देवालयों के पट
Updated Tue, 08 Aug 2017 12:04 AM IST
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बांदा। चंद्रग्रहण का सूतक काल शुरू होते ही देर रात 9:50 बजे सभी मंदिरों के पट बंद कर दिए गए। पूजा और दर्शन व भोग लगाना बंद हो गया। पंडित और पुजारियों के मुताबिक सूतक काल में यह सभी कार्य ‘अशुभ’ माने गए हैं। सिर्फ भजन-कीर्तन गूंजते रहे।
सोमवार को दोपहर 1:40 बजे के बाद से चंद्रग्रहण का सूतक काल शुरू हो गया। देर रात चंद्रग्रहण शुरू हो गया। इससे पहले ही शहर के प्रमुख महेश्वरी देवी, काली देवी, बांबेश्वर, सिंहवाहिनी, संकट मोचन, मरही माता, कालका देवी आदि मंदिरों के पट दर्शन और पूजा तथा भोग के लिए बंद कर दिए गए।
अब यह ग्रहण खत्म होने के बाद मंगलवार को तड़के खुलेंगे। पुजारी दुलारेलाल सैनी (महेश्वरी देवी), तुलसीराम पुष्पक (काली देवी) व बेटा महराज (बांबेश्वर मंदिर) आदि ने बताया कि ग्रहण काल में मूर्ति को छूकर पूजा-अर्चना नहीं होती।
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उधर, पंडित व ज्योतिषाचार्य हर्षित महाराज (जरैली कोठी) ने बताया कि सूतक काल में मंदिरों में प्रसाद नहीं चढ़ता। न ही मूर्ति में भोग लगता है। मान्यता है कि अशुभ काल में भोजन करना पाप जैसा है। मंदिरों के पट भी इसी मान्यता पर बंद किए जाते हैं कि कोई भक्त प्रसाद न चढ़ा सके। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रहण के दौरान भोजन ग्रहण करना भी अशुभ है।
-9:50 से शुरू हो गया सूतक काल में चंद्रग्रहण
-पूजा-पाठ, भोग-भोजन सभी पर रही रोक
अमर उजाला ब्यूरो
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सोमवार को दोपहर 1:40 बजे के बाद से चंद्रग्रहण का सूतक काल शुरू हो गया। देर रात चंद्रग्रहण शुरू हो गया। इससे पहले ही शहर के प्रमुख महेश्वरी देवी, काली देवी, बांबेश्वर, सिंहवाहिनी, संकट मोचन, मरही माता, कालका देवी आदि मंदिरों के पट दर्शन और पूजा तथा भोग के लिए बंद कर दिए गए।
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अब यह ग्रहण खत्म होने के बाद मंगलवार को तड़के खुलेंगे। पुजारी दुलारेलाल सैनी (महेश्वरी देवी), तुलसीराम पुष्पक (काली देवी) व बेटा महराज (बांबेश्वर मंदिर) आदि ने बताया कि ग्रहण काल में मूर्ति को छूकर पूजा-अर्चना नहीं होती।
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उधर, पंडित व ज्योतिषाचार्य हर्षित महाराज (जरैली कोठी) ने बताया कि सूतक काल में मंदिरों में प्रसाद नहीं चढ़ता। न ही मूर्ति में भोग लगता है। मान्यता है कि अशुभ काल में भोजन करना पाप जैसा है। मंदिरों के पट भी इसी मान्यता पर बंद किए जाते हैं कि कोई भक्त प्रसाद न चढ़ा सके। उन्होंने यह भी बताया कि ग्रहण के दौरान भोजन ग्रहण करना भी अशुभ है।
-9:50 से शुरू हो गया सूतक काल में चंद्रग्रहण
-पूजा-पाठ, भोग-भोजन सभी पर रही रोक
अमर उजाला ब्यूरो