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उपायुक्त ने सचिव व तकनीकी सहायक से मांगा स्पष्टीकरण
Updated Mon, 19 Jun 2017 11:59 PM IST
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बांदा। दो साल पहले फर्जी मिट्टी का काम कराकर लाखों रुपये का गोलमाल करने के मामले में श्रम रोजगार उपायुक्त ने तत्कालीन सचिव व तकनीकी सहायक से स्पष्टीकरण मांगा है। बीडीओ की जांच में ये दोनों दोषी पाए गए हैं।
बड़ोखर ब्लाक के ग्राम कुरौली निवासी रामकिशोर द्विवेदी ने मंडलायुक्त व मुख्य विकास अधिकारी से मामले की शिकायत की थी। कहा था कि वर्ष 2014-15 में मिट्टी का फर्जी कार्य दिखाकर करीब ढाई लाख रुपये हड़प लिए गए। बड़ोखर बीडीओ ब्रजकिशोर कुशवाहा ने मामले की जांच की।
रिपोर्ट में बताया कि मनरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2015 में रामकिशोर के खेत से दुर्गा के खेत तक सेक्टर में मिट्टी का कार्य कराने का 2.47 लाख रुपये का इस्टीमेट तैयार किया गया। इसमें तकनीकी स्वीकृति भी मिल गई। बीडीओ के मुताबिक ग्राम पंचायत द्वारा 2.21 लाख रुपये का भुगतान श्रमांश पर किया गया है।
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लेकिन स्थलीय जांच में इस स्थान पर कोई कार्य नहीं पाया गया। शिकायतकर्ता की बात जांच में सही पाई गई। उपायुक्त ने कहा है कि तत्कालीन सचिव पुष्पा पटेल व तकनीकी सहायक रमजान अली ने कार्य के अभिलेख भी नहीं मुहैया कराए। इससे स्पष्ट है कि जानबूझकर अभिलेख गायब किए गए हैं।
इसके लिए सचिव व तकनीकी सहायक दोषी हैं। उपायुक्त ने साक्ष्यों व अभिलेखों के साथ 15 दिन में जवाब मांगा है। कहा कि जवाब सही न मिलने पर दोनों के खिलाफ विधिक व विभागीय कार्यवाई की जाएगी।
-फर्जी कराया सेक्टर में 2.47 लाख रुपये का मिट्टी कार्य
-बीडीओ की जांच में खुली पोल, दोनों को दोषी पाया
अमर उजाला ब्यूरो
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बड़ोखर ब्लाक के ग्राम कुरौली निवासी रामकिशोर द्विवेदी ने मंडलायुक्त व मुख्य विकास अधिकारी से मामले की शिकायत की थी। कहा था कि वर्ष 2014-15 में मिट्टी का फर्जी कार्य दिखाकर करीब ढाई लाख रुपये हड़प लिए गए। बड़ोखर बीडीओ ब्रजकिशोर कुशवाहा ने मामले की जांच की।
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रिपोर्ट में बताया कि मनरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2015 में रामकिशोर के खेत से दुर्गा के खेत तक सेक्टर में मिट्टी का कार्य कराने का 2.47 लाख रुपये का इस्टीमेट तैयार किया गया। इसमें तकनीकी स्वीकृति भी मिल गई। बीडीओ के मुताबिक ग्राम पंचायत द्वारा 2.21 लाख रुपये का भुगतान श्रमांश पर किया गया है।
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लेकिन स्थलीय जांच में इस स्थान पर कोई कार्य नहीं पाया गया। शिकायतकर्ता की बात जांच में सही पाई गई। उपायुक्त ने कहा है कि तत्कालीन सचिव पुष्पा पटेल व तकनीकी सहायक रमजान अली ने कार्य के अभिलेख भी नहीं मुहैया कराए। इससे स्पष्ट है कि जानबूझकर अभिलेख गायब किए गए हैं।
इसके लिए सचिव व तकनीकी सहायक दोषी हैं। उपायुक्त ने साक्ष्यों व अभिलेखों के साथ 15 दिन में जवाब मांगा है। कहा कि जवाब सही न मिलने पर दोनों के खिलाफ विधिक व विभागीय कार्यवाई की जाएगी।
-फर्जी कराया सेक्टर में 2.47 लाख रुपये का मिट्टी कार्य
-बीडीओ की जांच में खुली पोल, दोनों को दोषी पाया
अमर उजाला ब्यूरो