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जीपीएफ में कमीशन मांगने पर अपर निदेशक की जांच शुरू
Updated Wed, 14 Mar 2018 11:33 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के चित्रकूट धाम मंडल के अपर निदेशक (एडी) द्वारा जीपीएफ भुगतान के नाम पर कमीशन मांगने के आरोप की जांच शुरू हो गई है। यह शिकायत अपर मुख्य चिकित्साधिकारी ने की थी। शासन की ओर से मंडलायुक्त से तीन दिन में जांच आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिया गया है।
बांदा के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) डा. अनिल सिंह ब्रेन हैमरेज होने के बाद लीलावती हास्पिटल मुंबई में भर्ती हैं।उन्होंने जनवरी में जीपीएफ भुगतान का आवेदन किया था। इसी बीच उन्होंने शासन में शिकायत भेजी। इसमें आरोप लगाया कि जीपीएफ भुगतान की स्वीकृति के लिए अपर निदेशक डा. ओंकारनाथ चार फीसदी कमीशन मांग रहे हैं। शासन में यह शिकायती पत्र पहुंचा तो हड़कंप मच गया। उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव डॉ. नीरज शुक्ला ने मंडलायुक्त को खुद मौके पर जाकर जांच करने को कहा है। साथ ही 17 मार्च तक जांच आख्ता मांगी है। इसके अलावा विभागीय जांच भी शुरू हो गई। 19 मार्च को विभाग के निदेशक यहां आकर अपर निदेशक के बयान लेंगे।
उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि तीन दिन पूर्व एसीएमओ डॉ. अनिल सिंह का जीपीएफ भुगतान स्वीकृत कर दिया गया है। इस संबंध में अपर निदेशक डॉ. ओंकारनाथ का कहना है कि 21.50 लाख रुपये जीपीएफ भुगतान कर दिया गया है। आवेदन में नोटरी और प्रार्थना पत्र में अलग-अलग हस्ताक्षर होने से भुगतान रुका था। बताया कि कमिश्नर के समक्ष बयान दर्ज हो चुके हैं। संबंधित पत्रावलियां भी उन्हें उपलब्ध करा दीं हैं। 19 मार्च को जांच के लिए आ रहे निदेशक को भी पत्रावलियां सौंपेंगे।
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-अपर सीएमओ ने शासन को की थी शिकायत
-मंडलायुक्त से तीन दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
-19 को निदेशक भी आकर करेंगे जांच
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बांदा। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के चित्रकूट धाम मंडल के अपर निदेशक (एडी) द्वारा जीपीएफ भुगतान के नाम पर कमीशन मांगने के आरोप की जांच शुरू हो गई है। यह शिकायत अपर मुख्य चिकित्साधिकारी ने की थी। शासन की ओर से मंडलायुक्त से तीन दिन में जांच आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिया गया है।
बांदा के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) डा. अनिल सिंह ब्रेन हैमरेज होने के बाद लीलावती हास्पिटल मुंबई में भर्ती हैं।उन्होंने जनवरी में जीपीएफ भुगतान का आवेदन किया था। इसी बीच उन्होंने शासन में शिकायत भेजी। इसमें आरोप लगाया कि जीपीएफ भुगतान की स्वीकृति के लिए अपर निदेशक डा. ओंकारनाथ चार फीसदी कमीशन मांग रहे हैं। शासन में यह शिकायती पत्र पहुंचा तो हड़कंप मच गया। उत्तर प्रदेश शासन के विशेष सचिव डॉ. नीरज शुक्ला ने मंडलायुक्त को खुद मौके पर जाकर जांच करने को कहा है। साथ ही 17 मार्च तक जांच आख्ता मांगी है। इसके अलावा विभागीय जांच भी शुरू हो गई। 19 मार्च को विभाग के निदेशक यहां आकर अपर निदेशक के बयान लेंगे।
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उधर, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि तीन दिन पूर्व एसीएमओ डॉ. अनिल सिंह का जीपीएफ भुगतान स्वीकृत कर दिया गया है। इस संबंध में अपर निदेशक डॉ. ओंकारनाथ का कहना है कि 21.50 लाख रुपये जीपीएफ भुगतान कर दिया गया है। आवेदन में नोटरी और प्रार्थना पत्र में अलग-अलग हस्ताक्षर होने से भुगतान रुका था। बताया कि कमिश्नर के समक्ष बयान दर्ज हो चुके हैं। संबंधित पत्रावलियां भी उन्हें उपलब्ध करा दीं हैं। 19 मार्च को जांच के लिए आ रहे निदेशक को भी पत्रावलियां सौंपेंगे।
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-अपर सीएमओ ने शासन को की थी शिकायत
-मंडलायुक्त से तीन दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
-19 को निदेशक भी आकर करेंगे जांच