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Banda News: नौनिहालों को सेहत बनाने में हर माह खर्च होंगे 45 लाख
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बांदा। जिले के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों की सेहत बनाने के लिए अब हर माह 45 लाख रुपये खर्च होंगे। उन्हें मिड-डे मील के अलावा अब हर गुरुवार को डिब्बा बंद गजक, गुड़-मूंगफली, तिल की चिक्की, भुने चने, रामदाना और बाजरे के लड्डू इत्यादि दिए जाएंगे। इसके लिए प्रति छात्र पांच रुपये की दर से धनराशि प्रधानाध्यापकों के खाते में भेजी गई है।
जिले में 1725 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें करीब 2.34 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। अभी सरकार इन बच्चों को मिड-डे मील में मेन्यू के हिसाब से पूरे सप्ताह भोजन परसा रही है। इसके अलावा सोमवार को दूध और बुधवार को फल का वितरण किया जा रहा है। अब अतिरिक्त पोषाहार के रूप में मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की ओर से विद्यार्थियों को पैक्ड यानी डिब्बा बंद गजक, गुड़-मूंगफली व तिल की चिक्की, भुने हुए चने, रामदाना व बाजरे के लड्डू इत्यादि का वितरण किया जाएगा।
प्रत्येक गुरुवार को शिक्षक बच्चों में इनका वितरण कराएंगे। इसके लिए प्रति छात्र पांच रुपये की दर से धनराशि विद्यालयों को भेजी गई है। एक गुरुवार को बच्चों के पोषाहार में करीब 11 लाख और माह में करीब 45 लाख रुपये खर्च होंगे।
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शासन के निर्देश हैं कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की मुहर व एक्सपायरी तारीख को देखकर ही इन पोषाहारों का वितरण करना होगा। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक कंचन वर्मा की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अतिरिक्त पोषाहार के वितरण में पर्याप्त सावधानी बरती जाए। खाद्य सामग्री का भंडारण उचित प्रकार से किया जाए, निर्धारित मानक के अनुसार खाद्य सामग्री का वितरण किया जाए। मां समूहों व विद्यालय प्रबंधन समिति को इसके माध्यम से जानकारी दी जाए।
टास्क फोर्स रखेगी निगरानी
अतिरिक्त पोषाहार वितरण में कोई घपला न हो,इसके लिए बीएसए की ओर से जिला व ब्लाॅक स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसके वितरण का व्यापक निरीक्षण किया जा रहा है।
वर्जन-
-पीएम पोषण योजना के तहत विद्यार्थियों का बेहतर स्वास्थ्य बनाने के लिए उन्हें पोषण की यह अतिरिक्त डोज दी जा रही है। गुरुवार को पोषाहार वितरण की मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
-अव्यक्तराम तिवारी, बीएसए, बांदा
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जिले में 1725 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें करीब 2.34 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। अभी सरकार इन बच्चों को मिड-डे मील में मेन्यू के हिसाब से पूरे सप्ताह भोजन परसा रही है। इसके अलावा सोमवार को दूध और बुधवार को फल का वितरण किया जा रहा है। अब अतिरिक्त पोषाहार के रूप में मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की ओर से विद्यार्थियों को पैक्ड यानी डिब्बा बंद गजक, गुड़-मूंगफली व तिल की चिक्की, भुने हुए चने, रामदाना व बाजरे के लड्डू इत्यादि का वितरण किया जाएगा।
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प्रत्येक गुरुवार को शिक्षक बच्चों में इनका वितरण कराएंगे। इसके लिए प्रति छात्र पांच रुपये की दर से धनराशि विद्यालयों को भेजी गई है। एक गुरुवार को बच्चों के पोषाहार में करीब 11 लाख और माह में करीब 45 लाख रुपये खर्च होंगे।
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शासन के निर्देश हैं कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की मुहर व एक्सपायरी तारीख को देखकर ही इन पोषाहारों का वितरण करना होगा। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण की निदेशक कंचन वर्मा की ओर से सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अतिरिक्त पोषाहार के वितरण में पर्याप्त सावधानी बरती जाए। खाद्य सामग्री का भंडारण उचित प्रकार से किया जाए, निर्धारित मानक के अनुसार खाद्य सामग्री का वितरण किया जाए। मां समूहों व विद्यालय प्रबंधन समिति को इसके माध्यम से जानकारी दी जाए।
टास्क फोर्स रखेगी निगरानी
अतिरिक्त पोषाहार वितरण में कोई घपला न हो,इसके लिए बीएसए की ओर से जिला व ब्लाॅक स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसके वितरण का व्यापक निरीक्षण किया जा रहा है।
वर्जन-
-पीएम पोषण योजना के तहत विद्यार्थियों का बेहतर स्वास्थ्य बनाने के लिए उन्हें पोषण की यह अतिरिक्त डोज दी जा रही है। गुरुवार को पोषाहार वितरण की मॉनिटरिंग भी की जा रही है।
-अव्यक्तराम तिवारी, बीएसए, बांदा