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40 पारे ने झुलसा दी आम की बौर
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तपिश और गर्म हवाओं से झुलस रही आम की बौर।
- फोटो : BANDA
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बांदा। बुंदेलखंड को समय से पहले तपा रहीं उत्तर-पश्चिम की गर्म हवाएं बागवानी और खेती पर भी खतरा साबित हो रही हैं। वसंत के बाद आम के पेड़ों में जोरदार ढंग से आई बौर 40 डिग्री पारे में झुलस रही है। आम उत्पादक किसानों का कहना है कि 50 फीसदी तक उत्पादन घट सकता है। उधर, गेहूं और चना की फसलों को भी यह गर्मी समय से पहले अपरिपक्व हालत में ही पका रही है। इन फसलों की पैदावार भी 20 से 25 फीसदी कम होने की आशंका है।
पिछले कई वर्षों के बाद अबकी मार्च के पहले पखवारे में ही पथरीला बुंदेलखंड 40 डिग्री पारे से तप उठा है। तपिश और लू की जो हालत मई और जून में होती थी वह अभी है। मौसम जानकारों के मुताबिक पाकिस्तान से आ रही उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने समय से पहले ही करीब 10 डिग्री पारा बढ़ा दिया है।
विशेषज्ञों का कयास है कि अबकी बुंदेलखंड गर्मी के कई सालों के रिकार्ड तोड़ सकता है। जनजीवन तो प्रभावित हो ही रहा है साथ ही बागवानी और खेती को भी काफी नुकसान का अंदेशा है। बुंदेलखंड के मशहूर प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह (बड़ोखर) ने बताया कि 40 डिग्री पारा पार हो जाने से आम की बौर झुलस रही है। उनके बाग में यही स्थिति है। इससे आम की पैदावार 50 फीसदी तक घट सकती है।
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उधर, देर से बोए गए गेहूं, चना को नुकसान पहुंच रहा है। यह समय से पहले ही पक जा रहे हैं। ऐसे में इनका दाना पतला होगा और बीज के लायक नहीं रहेगा। किसानों के मुताबिक मौजूदा समय में अधिकतम पारा 35 डिग्री से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
धान के बाद बोई फसलों को नुकसान
बांदा। जिला कृषि अधिकारी डा.प्रमोद का कहना है कि धान कटाई के बाद जो बुवाई की गई है उनमें इस वक्त नमी की जरूरत है। तापमान के तेवर यही रहे और खेतों को पानी नहीं मिला तो ये फसलें जल्दी पक जाएंगी। अपरिपक्व स्थिति में पकने पर उत्पादन घटेगा।
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पिछले कई वर्षों के बाद अबकी मार्च के पहले पखवारे में ही पथरीला बुंदेलखंड 40 डिग्री पारे से तप उठा है। तपिश और लू की जो हालत मई और जून में होती थी वह अभी है। मौसम जानकारों के मुताबिक पाकिस्तान से आ रही उत्तर-पश्चिमी हवाओं ने समय से पहले ही करीब 10 डिग्री पारा बढ़ा दिया है।
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विशेषज्ञों का कयास है कि अबकी बुंदेलखंड गर्मी के कई सालों के रिकार्ड तोड़ सकता है। जनजीवन तो प्रभावित हो ही रहा है साथ ही बागवानी और खेती को भी काफी नुकसान का अंदेशा है। बुंदेलखंड के मशहूर प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह (बड़ोखर) ने बताया कि 40 डिग्री पारा पार हो जाने से आम की बौर झुलस रही है। उनके बाग में यही स्थिति है। इससे आम की पैदावार 50 फीसदी तक घट सकती है।
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उधर, देर से बोए गए गेहूं, चना को नुकसान पहुंच रहा है। यह समय से पहले ही पक जा रहे हैं। ऐसे में इनका दाना पतला होगा और बीज के लायक नहीं रहेगा। किसानों के मुताबिक मौजूदा समय में अधिकतम पारा 35 डिग्री से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
धान के बाद बोई फसलों को नुकसान
बांदा। जिला कृषि अधिकारी डा.प्रमोद का कहना है कि धान कटाई के बाद जो बुवाई की गई है उनमें इस वक्त नमी की जरूरत है। तापमान के तेवर यही रहे और खेतों को पानी नहीं मिला तो ये फसलें जल्दी पक जाएंगी। अपरिपक्व स्थिति में पकने पर उत्पादन घटेगा।