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2841 करोड़ के कर्जदार हुए 4.30 लाख किसान
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बांदा। बुंदेलखंड के किसानों पर कर्ज का बोझ और बढ़ गया है। इस एक वर्ष में किसान क्रेडिट कार्ड से चित्रकूटधाम मंडल के चार लाख 30 हजार किसानों ने करीब 2800 करोड़ का कर्ज लिया है। लक्ष्य पूर्ति के लिए बैंक किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये किसानों को कर्ज में लगातार जकड़ रहे हैं। हालत यह है कि 60 फीसदी किसान कर्ज वापस नहीं कर पा रहे हैं।
पिछले कई दशकों से बुंदेलखंड में खेती पर मौसम की मार पड़ती रही है। तीन दशक में लगभग साढ़े तीन हजार किसानों ने आत्महत्या कर ली। इनमें ज्यादातर किसान बैंक का कर्ज अदा न कर पाने के कारण तनावग्रस्त थे। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर व महोबा में ज्यादातर किसान पहले से ही बैंकों के कर्जदार हैं। चारों जिलों के 4 लाख 29 हजार 991 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये 2841 करोड़ 98 लाख रुपये का ऋण लिया है। इसमें रबी फसल के लिए नवंबर महीने तक 2 लाख 13 हजार किसान 11 अरब 62 करोड़ 83 लाख रुपये ऋण लिया गया है। पिछले वर्ष 2020 में 2 लाख 16 हजार 986 किसानों ने 16 अरब 79 करोड़ 15 लाख रुपये कर्ज लिया था। यह कर्ज बैंकों के लक्ष्य का महज 45 फीसदी ही है।
चार्ट
मंडल में पिछले वर्ष नवंबर तक कर्जदार किसान और कर्ज की राशि (लाख में)
वर्ष 2021 2020 योग
किसान 2,13,005 2,16,986 4,29,991
कर्ज 1,16,283 1,67,915 2,84,198
चार्ट-2
मंडल में 2021-22 में किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेने वाले किसान और कर्ज राशि-
जनपद किसान राशि (लाख में)
बांदा 92,769 73,439
महोबा 48,329 15,912.50
हमीरपुर 41,022 11,166
चित्रकूट 30,885 15,766
योग 2,13,005 1,16,283.50
बैंकों को बचाने का जरिया हैं बुंदेली किसान
बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान और उत्तर प्रदेश किसान समृद्धि आयोग के सदस्य प्रेम सिंह का कहना है कि बुंदेलखंड में शायद ही कोई किसान हो जिस पर कर्ज न हो। कर्ज वितरण का लक्ष्य पूरा करने के लिए बैंक भी मजबूर हैं। किसान की फसल साल में दो ही बार होती है जबकि कर्ज का ब्याज दिन-रात बढ़ता है। बुंदेलखंड में किसान बैंकों को बचाने का जरिया बन गए हैं। सबसे बड़ा संकट ब्याज का है। सरकारों को चाहिए कि बुंदेलखंड में किसानों का हित चाहती हैं तो यहां बिना ब्याज के कर्ज दें। यहां कॉमर्शियल फार्मिंग (व्यवसायिक खेती) नहीं होती।
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20-25 फीसदी किसान ही अदा करते हैं कर्ज
अग्रणी बैंक प्रकोष्ठ प्रबंधक राजीव आनंद का कहना है कि बैंक से कर्ज लेने वाले 60 फीसदी किसान अदा ही नहीं करते। नवीनीकरण बड़ी मुश्किल और मशक्कत से कराते हैं। 10 से 15 प्रतिशत किसानों का खाता खराब हो जाता है। वापसी सही ढंग से करने पर सिर्फ 4 फीसदी ब्याज लगता है। वरना ब्याज की दर 11 फीसदी हो जाती है।
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पिछले कई दशकों से बुंदेलखंड में खेती पर मौसम की मार पड़ती रही है। तीन दशक में लगभग साढ़े तीन हजार किसानों ने आत्महत्या कर ली। इनमें ज्यादातर किसान बैंक का कर्ज अदा न कर पाने के कारण तनावग्रस्त थे। चित्रकूटधाम मंडल के बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर व महोबा में ज्यादातर किसान पहले से ही बैंकों के कर्जदार हैं। चारों जिलों के 4 लाख 29 हजार 991 किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये 2841 करोड़ 98 लाख रुपये का ऋण लिया है। इसमें रबी फसल के लिए नवंबर महीने तक 2 लाख 13 हजार किसान 11 अरब 62 करोड़ 83 लाख रुपये ऋण लिया गया है। पिछले वर्ष 2020 में 2 लाख 16 हजार 986 किसानों ने 16 अरब 79 करोड़ 15 लाख रुपये कर्ज लिया था। यह कर्ज बैंकों के लक्ष्य का महज 45 फीसदी ही है।
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मंडल में पिछले वर्ष नवंबर तक कर्जदार किसान और कर्ज की राशि (लाख में)
वर्ष 2021 2020 योग
किसान 2,13,005 2,16,986 4,29,991
कर्ज 1,16,283 1,67,915 2,84,198
चार्ट-2
मंडल में 2021-22 में किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेने वाले किसान और कर्ज राशि-
जनपद किसान राशि (लाख में)
बांदा 92,769 73,439
महोबा 48,329 15,912.50
हमीरपुर 41,022 11,166
चित्रकूट 30,885 15,766
योग 2,13,005 1,16,283.50
बैंकों को बचाने का जरिया हैं बुंदेली किसान
बुंदेलखंड के प्रगतिशील किसान और उत्तर प्रदेश किसान समृद्धि आयोग के सदस्य प्रेम सिंह का कहना है कि बुंदेलखंड में शायद ही कोई किसान हो जिस पर कर्ज न हो। कर्ज वितरण का लक्ष्य पूरा करने के लिए बैंक भी मजबूर हैं। किसान की फसल साल में दो ही बार होती है जबकि कर्ज का ब्याज दिन-रात बढ़ता है। बुंदेलखंड में किसान बैंकों को बचाने का जरिया बन गए हैं। सबसे बड़ा संकट ब्याज का है। सरकारों को चाहिए कि बुंदेलखंड में किसानों का हित चाहती हैं तो यहां बिना ब्याज के कर्ज दें। यहां कॉमर्शियल फार्मिंग (व्यवसायिक खेती) नहीं होती।
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20-25 फीसदी किसान ही अदा करते हैं कर्ज
अग्रणी बैंक प्रकोष्ठ प्रबंधक राजीव आनंद का कहना है कि बैंक से कर्ज लेने वाले 60 फीसदी किसान अदा ही नहीं करते। नवीनीकरण बड़ी मुश्किल और मशक्कत से कराते हैं। 10 से 15 प्रतिशत किसानों का खाता खराब हो जाता है। वापसी सही ढंग से करने पर सिर्फ 4 फीसदी ब्याज लगता है। वरना ब्याज की दर 11 फीसदी हो जाती है।