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Banda News: बाढ़ से घिरे 34 गांव, बांदा-बहराइच हाईवे पर चल रही नाव
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सड़क पर चल रही नाव।
- फोटो : कोतवाली में आत्मसमर्पण करने वाला आरोपी इब्राहिम।
बांदा। यमुना, केन और सहयोगी नदियों के पानी से जिले के 14 गांवों में चार से पांच फीट तक पानी भर गया है। 34 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। यहां के लोग टीले पर आसमान के नीचे बरसते पानी में रात गुजार रहे हैं। थोड़ी दूर में बाढ़ का पानी हिचकोले मार रहा है। जिले की तीन तहसीलों में करीब एक लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित है। बांदा-बहराइच हाईवे पर ललौली के पास सड़क पर चार फीट पानी भरा है। इस हाईवे पर वाहनों की जगह नाव चल रही हैं। कानपुर जाने वाले वाहनों को दूसरे मार्ग से निकाला जा रहा है। दो दिन बाद पीड़ितों तक पहुंची प्रशासनिक मदद ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रही है। हालांकि केन नदी का जल स्तर घटने लगा है और यमुना का पानी थम गया।
जलमग्न हो गए गांव, नहीं मिल रहा इलाज
पैलानी। यमुना के पानी से चिल्ला के 14 गांव जलमग्न हो गए हैं। मदनपुर, लौमर, तारा, खजूरी आदि गांव पूरी तरह से पानी में घिर गए है। यहां बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी हुई है।
पैलानी के तुर्रीनाला के उफनाने से सिंधन कलां,अंदरी, लसडा, पचकौरी, तगड़ा डेरा, पंडवन डेरा, बैसन डेरा , गुरगवां, बसधरी गांव के लोगों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया हैं। गांव में ही वह कैद होकर रह गए है। प्रशासनिक मदद उन तक नहीं पहुंच पा रही है। मरझा के रास्ते में दो से तीन फीट पानी भरने से चौकीपुरवा, कानाखेड़ा, सबादा तनगामऊ, महावरा का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है।
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खप्टिहाकलां कस्बे के छनेहरा डेरा, सिमरन डेरा, शिवपाल डेरा, बंजारी डेरा, पंडितन डेरा आदि गांवों के लोग जरूरत का सामान तथा राशन, पीने का पानी लेने के लिए नाव से उफनाती यमुना का विशाल पाट पार कर खप्टिहा बाजार जा रहे हैं। खप्टिहा कला पंचायत भवन के नीचे सड़क पर नाव चल रही हैं। यमुना, केन सहित चंद्रावल नदी से जलमग्न गांवों के लोग टीले पर पॉलिथीन तानकर रात गुजार रहे है। सरकारी मदद के नाम पर महज पॉलिथीन व थोडा बहुत आटा भाटा देकर चले जाते हैं। खप्टिहाकलां के मजरा मनसा डेरा में एक व्यक्ति का पैर टूटने पर उसे चारपाई से इलाज के लिए जाते हुए वीडियो वायरल हो रहा है।
बाढ़ में फसलें हो गईं नष्ट
तिंदवारी। यमुना नदी में आई भीषण बाढ़ से बेंदा घाट के कई गांवों की सैकडो बीघा तिल, उड़द, मूंग, अरहद, ज्वार की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। माचाहार के किसान राजन सिंह ने बताया कि उन्होंने आठ बीघा ज़मीन में तिल ,मूंग, ज्वार की फसल बोई थी। नदी के पानी में फसल डूबकर सड़ गई।
अमलीकौर के किसान महादेव ,चंद्रभान सिंह, राजकरण सिंह ,मनोज ने ज्वार, तिल खेत में बोई थी। जलभराव से फसल खराब हो गई। राजन सिंह के कहा कि हजारों रुपये का बीज, खाद और कीटनाशक खर्च किया था। ट्रैक्टर से जोताई का भी खर्च उठाया था लेकिन अब सब खत्म हो गया। किसान प्रशासन की ओर सरकारी मदद के लिए निहार रहे है। एडीएम धर्मेद्र का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद सर्वे कराकर मदद की जाएगी।
जमींदोज हो गए मकान
कमासिन। यमुना के साथ ही सहयोगी नदियां बागै, रवाय भी कहर बरपा रही हैं। बाढ़ के पानी से लखनपुर, औदहा, इटर्रा, अछरील, जगऊ टोला आदि गांवों में कच्चे मकान जमींदोज हो रहे है। सैकड़ो एकड़ फसल पानी में डूब गई है। रपटों और सड़कों पर पानी भर जाने से आवागमन ठप हो गया है।
लोगाें का कहना है कि अभी तक जो रखा था, अब वह खत्म हो गया है। राशन की समस्या खड़ी हो गई है। घरों में पानी भरा है। एसडीएम बबेरू रजत वर्मा ने बताया कि राजस्व टीम, आपदा मोचन दल के सदस्यों को राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है। राशन किट भी पहुंचाई जा रही है। औदहा इटर्रा गांव में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव लगाई गई है।
टूट गया गांवों का संपर्क
बबेरु। तहसील क्षेत्र के 12 से ज्यादा गांवों का बाढ़ के चलते संपर्क टूट गया है। इन गांवों का आवागमन ठप हो गया है। सिमौनी व टोलाकला के रपटा के ऊपर से दो फीट पानी बह रहा है। औगासी पुल में बाढ़ को देखते हुए सभी भारी वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया। बाकल, टोलाकलां, सिमौनी, बधैल, बदौली समगरा, जलालपुर, मरका, बैरफ उसरा और कमासिन क्षेत्र के चरका मुडवारा मटेहना गांव में पानी घुस गया है। मरका क्षेत्र के मिजापुर, बैरक, कछार, चक्की डेरा, मालिंग डेरा, बरगदा डेरा, हरीपुर में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। रपटों पर पानी भर जाने से लोगों का आवागमन ठप है।
इनसेट-
दो दिन बाद मिला खाना
लौमर की भूरी का कहना है कि यमुना की बाढ़ से मकान गिर गया है। पन्नी तानकर किसी तरह रात गुजारी है। दो दिन बाद रविवार को खाना मिला है। अफसर आते हैं, पूछकर चले जाते है। प्रेमचंद साहू, रज्जू साहू, बिंदा निषाद, रामनरेश निषाद, रामकुमार वर्मा ने बताया कि घर यमुना के पानी में डूब गए हैं। खप्टिहा कलांं के सिमरन डेरा के बाबूलाल निषाद, चुन्नू निषाद, के घरों में केन नदी का पानी घुस गया है। यहां के लोग मकान की छतों पर डेरा डाले हैं। मदद के लिए कोई पूछने तक नहीं आया। दो दिन से छतों पर भूखे प्यासे बैठे है। दावे सब हवा-हवाई हैं।
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जलमग्न हो गए गांव, नहीं मिल रहा इलाज
पैलानी। यमुना के पानी से चिल्ला के 14 गांव जलमग्न हो गए हैं। मदनपुर, लौमर, तारा, खजूरी आदि गांव पूरी तरह से पानी में घिर गए है। यहां बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाएं ठप पड़ी हुई है।
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पैलानी के तुर्रीनाला के उफनाने से सिंधन कलां,अंदरी, लसडा, पचकौरी, तगड़ा डेरा, पंडवन डेरा, बैसन डेरा , गुरगवां, बसधरी गांव के लोगों का मुख्यालय से संपर्क टूट गया हैं। गांव में ही वह कैद होकर रह गए है। प्रशासनिक मदद उन तक नहीं पहुंच पा रही है। मरझा के रास्ते में दो से तीन फीट पानी भरने से चौकीपुरवा, कानाखेड़ा, सबादा तनगामऊ, महावरा का संपर्क मुख्यालय से टूट गया है।
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खप्टिहाकलां कस्बे के छनेहरा डेरा, सिमरन डेरा, शिवपाल डेरा, बंजारी डेरा, पंडितन डेरा आदि गांवों के लोग जरूरत का सामान तथा राशन, पीने का पानी लेने के लिए नाव से उफनाती यमुना का विशाल पाट पार कर खप्टिहा बाजार जा रहे हैं। खप्टिहा कला पंचायत भवन के नीचे सड़क पर नाव चल रही हैं। यमुना, केन सहित चंद्रावल नदी से जलमग्न गांवों के लोग टीले पर पॉलिथीन तानकर रात गुजार रहे है। सरकारी मदद के नाम पर महज पॉलिथीन व थोडा बहुत आटा भाटा देकर चले जाते हैं। खप्टिहाकलां के मजरा मनसा डेरा में एक व्यक्ति का पैर टूटने पर उसे चारपाई से इलाज के लिए जाते हुए वीडियो वायरल हो रहा है।
बाढ़ में फसलें हो गईं नष्ट
तिंदवारी। यमुना नदी में आई भीषण बाढ़ से बेंदा घाट के कई गांवों की सैकडो बीघा तिल, उड़द, मूंग, अरहद, ज्वार की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। माचाहार के किसान राजन सिंह ने बताया कि उन्होंने आठ बीघा ज़मीन में तिल ,मूंग, ज्वार की फसल बोई थी। नदी के पानी में फसल डूबकर सड़ गई।
अमलीकौर के किसान महादेव ,चंद्रभान सिंह, राजकरण सिंह ,मनोज ने ज्वार, तिल खेत में बोई थी। जलभराव से फसल खराब हो गई। राजन सिंह के कहा कि हजारों रुपये का बीज, खाद और कीटनाशक खर्च किया था। ट्रैक्टर से जोताई का भी खर्च उठाया था लेकिन अब सब खत्म हो गया। किसान प्रशासन की ओर सरकारी मदद के लिए निहार रहे है। एडीएम धर्मेद्र का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद सर्वे कराकर मदद की जाएगी।
जमींदोज हो गए मकान
कमासिन। यमुना के साथ ही सहयोगी नदियां बागै, रवाय भी कहर बरपा रही हैं। बाढ़ के पानी से लखनपुर, औदहा, इटर्रा, अछरील, जगऊ टोला आदि गांवों में कच्चे मकान जमींदोज हो रहे है। सैकड़ो एकड़ फसल पानी में डूब गई है। रपटों और सड़कों पर पानी भर जाने से आवागमन ठप हो गया है।
लोगाें का कहना है कि अभी तक जो रखा था, अब वह खत्म हो गया है। राशन की समस्या खड़ी हो गई है। घरों में पानी भरा है। एसडीएम बबेरू रजत वर्मा ने बताया कि राजस्व टीम, आपदा मोचन दल के सदस्यों को राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है। राशन किट भी पहुंचाई जा रही है। औदहा इटर्रा गांव में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नाव लगाई गई है।
टूट गया गांवों का संपर्क
बबेरु। तहसील क्षेत्र के 12 से ज्यादा गांवों का बाढ़ के चलते संपर्क टूट गया है। इन गांवों का आवागमन ठप हो गया है। सिमौनी व टोलाकला के रपटा के ऊपर से दो फीट पानी बह रहा है। औगासी पुल में बाढ़ को देखते हुए सभी भारी वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया। बाकल, टोलाकलां, सिमौनी, बधैल, बदौली समगरा, जलालपुर, मरका, बैरफ उसरा और कमासिन क्षेत्र के चरका मुडवारा मटेहना गांव में पानी घुस गया है। मरका क्षेत्र के मिजापुर, बैरक, कछार, चक्की डेरा, मालिंग डेरा, बरगदा डेरा, हरीपुर में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। रपटों पर पानी भर जाने से लोगों का आवागमन ठप है।
इनसेट-
दो दिन बाद मिला खाना
लौमर की भूरी का कहना है कि यमुना की बाढ़ से मकान गिर गया है। पन्नी तानकर किसी तरह रात गुजारी है। दो दिन बाद रविवार को खाना मिला है। अफसर आते हैं, पूछकर चले जाते है। प्रेमचंद साहू, रज्जू साहू, बिंदा निषाद, रामनरेश निषाद, रामकुमार वर्मा ने बताया कि घर यमुना के पानी में डूब गए हैं। खप्टिहा कलांं के सिमरन डेरा के बाबूलाल निषाद, चुन्नू निषाद, के घरों में केन नदी का पानी घुस गया है। यहां के लोग मकान की छतों पर डेरा डाले हैं। मदद के लिए कोई पूछने तक नहीं आया। दो दिन से छतों पर भूखे प्यासे बैठे है। दावे सब हवा-हवाई हैं।