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निर्माण के नाम पर खूब भरी जेब, यूपीपीसीएल, लैकफेड, पेक्सफैड ने किया खेल
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Wed, 11 Mar 2015 12:02 AM IST
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पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि (बीआरजीएफ) में ग्राम पंचायत सचिवालय निर्माण के नाम पर खूब जेबें भरी गईं।
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वर्ष 2008-09 से लागू हुई इस योजना में बांदा जनपद में तीन कार्यदाई संस्थाओें ने 32.34 करोड़ रुपये 213 ग्राम पंचायत सचिवालय निर्माण में खर्च किए हैं। पंचायती राज विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 41 सचिवालय भवन अभी अधूरे पड़े हैं, जो बने हैं वह जर्जर अवस्था में पहुंच गए हैं।
बसपा सरकार में यह मंसूबा बनाया गया था कि ग्राम पंचायतों को अपना काम अंजाम देने के लिए हरेक ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत सचिवालय बनाया जाए। इस योजना में केंद्र सरकार ने भरपूर पैसा दिया।
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वर्ष 2008-09 से वर्ष 2013-14 तक 164 सचिवालय निर्माण के लिए प्रति सचिवालय भवन 14.36 लाख रुपये की दर से बजट दिया गया। इसमें 41 सचिवालय भवन अभी तक अधूरे पड़े हैं।
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जनपद में तीन कार्यदाई संस्थाओं यूपी प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल), यूपी श्रम निर्माण सहकारी संघ (लैकफैड) और पैक्सफेड ने क्रमशा: 77, 91 तथा 45 (कुल 213) ग्राम पंचायत सचिवालय बनाए।
यूपीपीसीएल ने 11.95 करोड़, लैकफेड ने 13.39 करोड़ और पैक्सफेड ने 32.34 करोड़ रुपये खर्च किए। पिछले वर्षों से प्रति सचिवालय भवन की लागत बढ़ाकर 16 लाख रुपये कर दी गई।
एक भवन में पशु बंध रहे दूसरे में पूर्व प्रधान का कब्जा
अतर्रा। गोखिया गांव में बनाया गया ग्राम पंचायत भवन गिराऊ हालत को पहुंच गया है। यहां ग्राम पंचायत की बैठक या कोई काम धाम कभी नहीं हुआ। आसपास के ग्रामीण जर्जर सचिवालय भवन में अपने मवेशी बांध रहे हैं। ग्रामीण पप्पू, रामू और टिल्लू ने बताया कि घटिया निर्माण से यह शुरू से ही जर्जर रहा।
उधर, ग्राम प्रधान फूलचंद्र वर्मा ने बताया कि वह भी अपने कार्यकाल में पंचायत भवन में करीब एक लाख रुपये खर्च कर चुके हैं। इसी तरह तुर्रा ग्राम पंचायत में तत्कालीन प्रधान ने अपने आवास के बगल में ग्राम पंचायत भवन का निर्माण कराया था, लेकिन इसमें कभी ग्राम पंचायत की बैठक नहीं हुई। इसमें तत्कालीन प्रधान के लोगों का ही कब्जा है।
मौजूदा प्रधान गोमती और उनके प्रतिनिधि संतोष ने कहा कि उन्होंने पंचायत भवन की तरफ देखना या उसके बारे में सोचना ही बंद कर दिया है।
श्मशान स्थल में भी घटिया निर्माण
अतर्रा। बीआरजीएफ से यहां मुक्तिधाम (श्मशान स्थल) में 55 लाख रुपये खर्च करके बाउंड्री, शवदाह गृह और संपर्क मार्ग आदि का निर्माण नगर पालिका ने कराया था। घटिया निर्माण से मामूली आंधी बारिश में ही बाउंड्री कई स्थान पर टूट-फूट गई। शवदाह गृह के ऊपर लगे टीन शेड उड़ गए।
बाद में क्षेत्रीय लोगों ने इनकी मरम्मत, पुताई आदि अपने पास से कराई। सीसी रोड निर्माण में भी जमकर घोटाला किया।
697 अन्य कार्यों में 101 पूरे नहीं हुए
बांदा। बीआरजीएफ से बांदा जनपद में वर्ष 2008-09 से 2013-14 तक कराए गए अन्य कार्यों में सीसी रोड और ड्रेन के 194 काम शामिल हैं। इनमें 41 अधूरे पड़े हैं। पुल/पुलिया/चेकडैम के 15 काम हुए जिसमें तीन अधूरे हैं।
सड़क लेपन के आठ कामों में तीन पूरे नहीं हुए। नाला/नाली निर्माण के 44 कामों में आठ अधूरे पड़े हैं। अन्य 272 कार्यों में पांच पूरे नहीं किए गए। कुल 697 कार्यों में 101 अधूरे पड़े हैं। यह आंकड़े पंचायती राज विभाग के हैं।