बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे में सुस्ती पर शासन नाराज

Kanpur	 Bureauकानपुर ब्यूरो Updated Sat, 26 Jan 2019 12:22 AM IST
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बांदा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए जमीन खरीद में सुस्ती पर प्रदेश सरकार ने नाराजगी जताई है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) अध्यक्ष/मुख्य कार्य पालक अधिकारी अवनीश कुमार अवस्थी ने डीएम को पत्र भेजकर जमीन खरीद में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
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डीएम को भेजे पत्र में यूपीडा अध्यक्ष ने कहा है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसका शिलान्यास अतिशीघ्र होना है। निर्माण शुरू होने से पहले 90 फीसदी भूमि क्रय किया जाना है। शासन के सर्वोच्च स्तर पर की गई समीक्षा में यह बात सामने आई है कि बांदा जिले में कुल 791.8343 हेक्टेयर भूमि एक्सप्रेस वे के लिए ली जानी है। इसमें 751.578 हेक्टेयर भूमि किसानों से खरीदी जानी है। 39.656 हेक्टेयर भूमि ग्राम समाज/शासकीय भूमि का पुनर्ग्रहण में शामिल है।
उन्होंने कहा कि बांदा में 751.578 हेक्टेयर में से अब तक मात्र 38.429 हेक्टेयर भूमि ही खरीदी जा सकी है। यह लक्ष्य का मात्र 5.11 फीसदी है। यहां भूमि खरीद के लिए शासन ने 100 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए हैं। इसमें मात्र 34.84 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं। कहा कि भूमि क्रय की इस गति से निर्धारित लक्ष्य को समय से पूरा करना किसी प्रकार संभव नहीं है। यह भी कहा है कि 2 जनवरी को उन्होंने पत्र जारी कर कार्ययोजना मांगी थी, लेकिन वह अभी तक नहीं भेजी गई।
फोन पर भूमि क्रय के लिए वांछित धनराशि का इस्टीमेट उपलब्ध कराने की अपेक्षा की गई थी। वह भी अब तक नहीं मिली। उन्होंने कहा है कि भूमि खरीद की समीक्षा रोजाना करते हुए निर्धारित लक्ष्य को पूरा कराना सुनिश्चित करें और सूचना उपलब्ध कराएं। उधर, डीएम के निर्देश पर एडीएम संतोष बहादुर सिंह ने जिला भूमि अध्याप्ति अधिकारी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

सड़क और गांव से जुड़ी जमीनों की सर्किल दरें कम
भारतीय किसान यूनियन जिलाध्यक्ष बलराम तिवारी का कहना है कि बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहीत की जा रही भूमि का उचित मुआवजा नहीं मिलने से अधिकांश किसान भूमि के बैनामे सरकार के पक्ष में कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। सड़क और गांव से जुड़ी जमीनों का दिया जा रहा चार गुना अधिक सर्किल रेट भी कम है। आमतौर पर जिन दरों पर भूमि बिकती है, उससे किसानों को सर्किल दरों से लगभग 10 गुना ज्यादा फायदा होता है। इसी आधार पर जमीन खरीदी जाए तो किसान हंसीखुशी देंगे।
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