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Banda News: ट्राॅमा सेंटर में भर्ती डायरिया के 30 मरीज
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बांदा। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ रहे तापमान से लोगों की सेहत खराब हो रही है। उल्टी दस्त, पेट दर्द और बुखार के मरीजों में इजाफा हो रहा है। जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में सुबह से ही भर्ती होने वाले मरीजों की लाइन लगी रही। बुधवार को उल्टी दस्त और पेट दर्द के 30 से ज्यादा मरीज भर्ती हुए। लगातार दूसरे दिन भी ट्रामा सेंटर मरीजों से फुल हो गया। कुछ मरीजों ने बरामदे में पड़ी बेंचों पर ही बोतल इंजेक्शन लगवाए।
बुधवार को ट्राॅमा सेंटर में शहर के स्वराज कालोनी निवासी पीहू (2), महोखर गांव निवासी सुनीता (42), शंकर नगर निवासी ममता (23), शंकर नगर निवासी विशेष (10 माह), सुकुल कुआं निवासी दिव्यांशी (आठ माह), चिल्ला निवासी अमन (2 माह), मनीपुर निवासी आर्यन (5), आजाद नगर निवासी रन्नो (18), महुवा निवासी हीरा (28), काशीराम कालोनी निवासी उमंग (2), तुर्रा गांव निवासी धनराज (22), उजरेहटा गांव निवासी संगीता (22), बक्छा गांव निवासी पूनम (18), सहेवा गांव निवासी हर्षिका (20), आंबेडकर नगर निवासी संजा बाई (65), मरका गांव निवासी राजेंद्र (38) समेत 30 मरीजों को भर्ती कराया गया है। सभी को उल्टी दस्त और पेट दर्द की शिकायत थी। सुकुल कुआं से आई मरीज दिव्यांशी के तीमारदारों ने बताया कि उन्हें सुबह से बेड नहीं मिला। मजबूरी में उन्हें बेंच में बोतल लगवानी पड़ रही है।
खाली पेट न रहे, बच्चों को सूती कपड़े पहनाकर रखें
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में तैनात प्रभारी ईएमओ डॉ. आकाश ने बताया कि गर्मी से बचाव के लिए खाली पेट बिल्कुल भी नहीं रहे। अगर बच्चा दूध पीता है तो उसे मां का दूध अवश्य दें। इससे बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी। बच्चों को सूती कपड़े पहनाकर रखें। गरम से सीधे ठंडे माहौल में न लाएं। बच्चों को यदि तीन से चार बार दस्त आ रहे हैं, पेट पतला हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवा इंजेक्शन व बोतलें हैं।
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वर्जन...
गर्मी के मौसम में डायरिया के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। ट्राॅमा सेंटर में कुल 29 बेड हैं। इमरजेंसी मरीजों को भी भर्ती करना पड़ता है। डायरिया के मरीजों को ट्रामा सेंटर में इलाज देकर यदि उनकी हालत में सुधार नहीं होता तो उन्हें जिला अस्पताल के वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। जिला अस्पताल में बेड की कमी नहीं है।
डॉ. एसडी त्रिपाठी, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल बांदा।
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बुधवार को ट्राॅमा सेंटर में शहर के स्वराज कालोनी निवासी पीहू (2), महोखर गांव निवासी सुनीता (42), शंकर नगर निवासी ममता (23), शंकर नगर निवासी विशेष (10 माह), सुकुल कुआं निवासी दिव्यांशी (आठ माह), चिल्ला निवासी अमन (2 माह), मनीपुर निवासी आर्यन (5), आजाद नगर निवासी रन्नो (18), महुवा निवासी हीरा (28), काशीराम कालोनी निवासी उमंग (2), तुर्रा गांव निवासी धनराज (22), उजरेहटा गांव निवासी संगीता (22), बक्छा गांव निवासी पूनम (18), सहेवा गांव निवासी हर्षिका (20), आंबेडकर नगर निवासी संजा बाई (65), मरका गांव निवासी राजेंद्र (38) समेत 30 मरीजों को भर्ती कराया गया है। सभी को उल्टी दस्त और पेट दर्द की शिकायत थी। सुकुल कुआं से आई मरीज दिव्यांशी के तीमारदारों ने बताया कि उन्हें सुबह से बेड नहीं मिला। मजबूरी में उन्हें बेंच में बोतल लगवानी पड़ रही है।
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खाली पेट न रहे, बच्चों को सूती कपड़े पहनाकर रखें
जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में तैनात प्रभारी ईएमओ डॉ. आकाश ने बताया कि गर्मी से बचाव के लिए खाली पेट बिल्कुल भी नहीं रहे। अगर बच्चा दूध पीता है तो उसे मां का दूध अवश्य दें। इससे बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी। बच्चों को सूती कपड़े पहनाकर रखें। गरम से सीधे ठंडे माहौल में न लाएं। बच्चों को यदि तीन से चार बार दस्त आ रहे हैं, पेट पतला हो रहा है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। जिला अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवा इंजेक्शन व बोतलें हैं।
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गर्मी के मौसम में डायरिया के मरीज ज्यादा आ रहे हैं। ट्राॅमा सेंटर में कुल 29 बेड हैं। इमरजेंसी मरीजों को भी भर्ती करना पड़ता है। डायरिया के मरीजों को ट्रामा सेंटर में इलाज देकर यदि उनकी हालत में सुधार नहीं होता तो उन्हें जिला अस्पताल के वार्ड में शिफ्ट किया जाता है। जिला अस्पताल में बेड की कमी नहीं है।
डॉ. एसडी त्रिपाठी, प्रभारी सीएमएस, जिला अस्पताल बांदा।