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राहत के 29.45 करोड़ दबाए बैठा है प्रशासन
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Tue, 07 Apr 2015 11:44 PM IST
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फसल गंवा बैठे किसानों को सरकारी मदद बांटने में शासन व प्रशासन में कंजूसी और ढिलाई की शायद प्रतिस्पर्द्धा हो रही है। यही वजह है कि किसानों के लिए मांगे गए 149 करोड़ रुपये में प्रदेश सरकार ने सिर्फ 39 करोड़ रुपये ही किसानों को दिए हैं।
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इसमें भी प्रशासन सिर्फ 9.58 करोड़ रुपये बांट पाया है। बाकी बचे 29.45 करोड़ रुपये किसानों की जेब के बजाए सरकारी खजाने की शोभा बढ़ा रहे हैं।
प्रदेश सरकार को भेजी गई रिपोर्ट में जनपद में कुल 3,32,288 किसान दैवीय आपदा से प्रभावित बताए गए हैं। जिनमें अब तक मात्र 25,739 किसानों को ही कृषि निवेश अनुदान के रूप में कुछ रुपये मिले हैं। बांदा जनपद के सभी लगभग 760 गांवों को प्रशासन ने रबी फसल में ओला और बारिश से प्रभावित माना है।
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इन गांवों की 3,04,116 हेक्टेयर भूमि की फसल प्रभावित बताई गई है। प्रशासन ने पीड़ित किसानों को राहत के लिए प्रदेश सरकार से एक अरब 49 करोड़ सात लाख रुपये मांगे थे, लेकिन प्रदेश सरकार ने मात्र 39 करोड़ तीन लाख रुपये ही दिए हैं।
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अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डीएस पांडेय के मुताबिक 2 अप्रैल तक 25,739 किसानों को 9.58 करोड़ रुपये बांटे जा चुके हैं। अभी प्रशासन के खजाने मेें 29.45 करोड़ रुपये बंटने को शेष हैं।
एक तरफ जहां किसान रोजाना मदद के लिए फरियादें कर रहे हैं वहीं प्रशासन और खासकर राजस्व विभाग सरकार द्वारा भेजे गए पैसे को किसानों तक पहुंचाने में कोई खास दिलचस्पी नहीं ले रहे। हालांकि अपर जिलाधिकारी का कहना है कि सर्वे के बाद कृषि निवेश अनुदान के चेक युद्ध स्तर पर तैयार कराकर पीड़ित किसानों को बांटे जा रहे हैं।
पब्लिक कॉल
समस्याएं
-अतर्रा कृषि विकास बैंक से दो लाख केसीसी पर कर्ज लिया था। पांच हजार रुपये बीमा प्रीमियम काट लिया गया। क्लेम के नाम पर आज तक एक पैसा नहीं मिला। शाखा प्रबंधक का कहना है कि गेहूं को नुकसान नहीं पहुंचा है इसलिए बीमा नहीं मिला। लेखपाल ने प्रधान के घर बैठकर सर्वे की रस्म अदायगी कर ली। - रोशन सिंह (पौहार, बांदा)
-इस वर्ष की कौन कहे? वर्ष 2013 में कराए गए फसल बीमा का क्लेम आज तक नहीं मिला जबकि आसपास के गांवों में पैसा बंट गया है। इलाहाबाद बैंक की कालिंजर बैंक के मैनेजर का कहना है कि अभी इंट्री नहीं हो पाई है। -शब्बीर (कालिंजर, नरैनी)
समाधान
किसानों को परेशान न करें बैंक, वरना करेंगे कार्रवाई
जिन किसान भाइयों को फसल बीमा क्लेम नहीं मिला है, वह अपने बैंक की ब्रांच में जाएं और जानकारी प्राप्त करें। शाखा प्रबंधक या बैंक कर्मी संतोषजनक जवाब नहीं देते तो शिकायत करें। वैसे सभी ब्रांच मैनेजरों को पत्र और फोन के जरिए निर्देश दिए जा रहे हैं कि खाताधारकों को परेशान हरगिज न किया जाए। वरना शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिन बैंकों में किसान को सूचित किए बगैर उनके चेक ऋण खाते में समायोजित कर लिए गए हैं उन प्रबंधकों से भी जवाब तलब किया जाएगा।
एसके झा, जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक (एलडीएम)
सर्वे को आएगी केंद्रीय टीम
अतर्रा (बांदा)। फसलों का जायजा लेने केंद्रीय टीम आ सकती है। इसके मद्देनजर एसडीएम आरके श्रीवास्तव व तहसीलदार राजेश कुमार ने मंगलवार को राजस्व कर्मियों के साथ हाइवे किनारे स्थित बल्लान, बाघा, नगवारा, चौसड़, ओरहा व अतर्रा ग्रामीण का दौरा किया।
एसडीएम ने बताया कि केंद्रीय टीम इन गांवों में सर्वे के लिए आ सकती है। चिह्नित कर सूची बनाई जा रही है। ताकि कम समय में केंद्रीय टीम को ज्यादा से ज्यादा गांवों का सर्वे कराया जाए।