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अंग्रेजी दवा-ड्रग नहीं बेंच सकते यूनानी और होम्योपैथिक डाक्टर
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:00 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। बीएएमएस यूनानी और होम्योपैथी डाक्टरों को अंग्रेजी दवा, ड्रग या नशीली वस्तुओं को बेचने का अधिकार नहीं है। ये सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण कराकर सिर्फ नर्सिंगहोम चला सकते हैं। गैर पंजीकृत या झोलाछाप न तो दवा बेच सकते हैं और न ही इलाज कर सकते हैं। बांदा जिले में 28 पैथालॉजी पंजीकृृत हैं।
जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सीएमओ और औषधि निरीक्षक ने ये जानकारियां सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित को दी हैं। इसमें बताया है कि झोलाछाप या गैर पंजीकृत डॉक्टर किसी प्रकार की दवा की बिक्री या नर्सिंगहोम नहीं चला सकता। बीएएमएस यूनानी और होम्योपैथी डॉक्टर अंग्रेजी दवा, ड्रग, नशे की बिक्री नहीं कर सकते, ये नर्सिंगहोम चला सकते हैं, बशर्ते सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत होना जरूरी है।
आरटीआई में मांगी सूचना में यह भी बताया गया है कि डॉ. मदन गोपाल वाजपेई (पनगरा) बीएएमएस चिकित्सक के रूप में पंजीकृत हैं। सीएमओ कार्यालय में उनका पंजीकरण है। भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तर प्रदेश में भी पंजीकरण है। उधर, आशीष सागर ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग और ड्रग अधिकारी की सांठगांठ से इलाज के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक फार्मेसिस्ट के लाइसेंस पर दवा की कई दुकानें चल रही हैं।
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इनसेट
एक ही मेडिकल स्टोर में काम कर सकता है फार्मेसिस्ट
बांदा। आरटीआई में औषधि निरीक्षक ने यह भी बताया कि कानूनी तौर पर एक फार्मेसिस्ट सिर्फ एक मेडिकल स्टोर में सेवा दे सकता है। बांदा जिले में औषधि प्रतिष्ठानों के संचालकों, फार्मेसिस्ट व लाइसेंस आदि का विवरण औषधि निरीक्षक कार्यालय में दर्ज है। यह भी बताया कि जेनरिक दवा विक्रेता पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
किसी भी औषधि को राजकीय विश्लेषक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा नकली घोषित किए जाने पर जांच के बाद मुकदमा दर्ज होता है। यह भी बताया कि थोक या फुटकर दवा वितरक नर्सिंगहोम नहीं चला सकता।
-झोलाछाप भी नहीं कर सकते इलाज
-आरटीआई में स्वास्थ्य विभाग ने दी जानकारी
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बांदा। बीएएमएस यूनानी और होम्योपैथी डाक्टरों को अंग्रेजी दवा, ड्रग या नशीली वस्तुओं को बेचने का अधिकार नहीं है। ये सीएमओ कार्यालय में पंजीकरण कराकर सिर्फ नर्सिंगहोम चला सकते हैं। गैर पंजीकृत या झोलाछाप न तो दवा बेच सकते हैं और न ही इलाज कर सकते हैं। बांदा जिले में 28 पैथालॉजी पंजीकृृत हैं।
जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत सीएमओ और औषधि निरीक्षक ने ये जानकारियां सामाजिक कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित को दी हैं। इसमें बताया है कि झोलाछाप या गैर पंजीकृत डॉक्टर किसी प्रकार की दवा की बिक्री या नर्सिंगहोम नहीं चला सकता। बीएएमएस यूनानी और होम्योपैथी डॉक्टर अंग्रेजी दवा, ड्रग, नशे की बिक्री नहीं कर सकते, ये नर्सिंगहोम चला सकते हैं, बशर्ते सीएमओ कार्यालय में पंजीकृत होना जरूरी है।
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आरटीआई में मांगी सूचना में यह भी बताया गया है कि डॉ. मदन गोपाल वाजपेई (पनगरा) बीएएमएस चिकित्सक के रूप में पंजीकृत हैं। सीएमओ कार्यालय में उनका पंजीकरण है। भारतीय चिकित्सा परिषद, उत्तर प्रदेश में भी पंजीकरण है। उधर, आशीष सागर ने आरोप लगाया है कि स्वास्थ्य विभाग और ड्रग अधिकारी की सांठगांठ से इलाज के नाम पर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। एक फार्मेसिस्ट के लाइसेंस पर दवा की कई दुकानें चल रही हैं।
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एक ही मेडिकल स्टोर में काम कर सकता है फार्मेसिस्ट
बांदा। आरटीआई में औषधि निरीक्षक ने यह भी बताया कि कानूनी तौर पर एक फार्मेसिस्ट सिर्फ एक मेडिकल स्टोर में सेवा दे सकता है। बांदा जिले में औषधि प्रतिष्ठानों के संचालकों, फार्मेसिस्ट व लाइसेंस आदि का विवरण औषधि निरीक्षक कार्यालय में दर्ज है। यह भी बताया कि जेनरिक दवा विक्रेता पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।
किसी भी औषधि को राजकीय विश्लेषक, उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा नकली घोषित किए जाने पर जांच के बाद मुकदमा दर्ज होता है। यह भी बताया कि थोक या फुटकर दवा वितरक नर्सिंगहोम नहीं चला सकता।
-झोलाछाप भी नहीं कर सकते इलाज
-आरटीआई में स्वास्थ्य विभाग ने दी जानकारी