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जीवन साथी की मौत पर जोड़ा नहीं बनाता सारस
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फोटो सारस का दांपत्य जीवन अनुकरणीय है। इससे सबक लेना चाहिए। सारस पक्षी जीवन में एक बार जोड़ा बनाता है। नर या मादा किसी की भी मृत्यु हो जाए तो आजीवन अकेले रहता है। साथी के वियोग में अक्सर अपने प्राण त्याग देता है।
विश्व सारस दिवस पर पथरी गांव में वन विभाग द्वारा आयोजित सारस संरक्षण गोष्ठी में कृषि विश्वविद्यालय के पक्षी विशेषज्ञ कौशल सिंह ने कहा कि सारस पक्षी का दांपत्य जीवन बेमिसाल है। यह पूरे जीवन में सिर्फ एक बार अपना जीवन साथी चुनता है। जोड़ीदार की मौत हो जाने पर कभी दूसरा साथी चुनता। अक्सर तो वियोग में अपने प्राण त्याग देता है।
प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) एमपी गौतम ने कहा कि दुनिया में सारस तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। लेकिन भारत ऐसा देश है जहां सारस पक्षी काफी तादाद में पाए जाते हैं। उड़ने वाले पक्षियों में सारस सबसे बड़ा है। यह किसानों का मित्र भी है। पर्यावरण संरक्षण में सारस की खास भूमिका है। डीएफओ ने सारस संरक्षण समिति गठित करते हुए आशीष कुमार पुत्र राजेंद्र कुमार को सारस मित्र के रूप में चयनित किया है।
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कृषि विश्वविद्यालय में वानकी विभाग के प्रो.डॉ. ऐश्वर्य महेश्वरी ने कहा कि सारस के अंडों को आवारा कुत्तों से ग्रामीण बचाएं। उन्होंने कहा कि पथरी गांव में इतने अधिक सारस पाए जाने पर यहां के ग्रामीणों को सहृदयता है। सारस संरक्षण में अच्छा कार्य के लिए पथरी गांव के प्रहलाद प्रजापति, वीरेंद्र शिवहरे, सत्यपाल सिंह, राजेंद्र कुमार और हेमा को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सारस विश्व का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी है। इसे उत्तर प्रदेश में राजकीय पक्षी का दर्जा हासिल है। यह खेत, नदी, तालाब, मैदान आदि मेें पाया जाता है। सारस का सांस्कृतिक महत्व भी है। रामायण की प्रथम कविता का श्रेय सारस को है। इसकी शुरुआत प्रणयरत सारस युगल के वर्णन से हुई है। महर्षि वाल्मीकि इसके दृष्टा हैं। तभी शिकारी ने प्रणयरत सारस युगल को मार दिया। जोड़े के दूसरे सारस ने जीवन साथी की मौत पर वियोग में वहीं प्राण त्याग दिए। इस पर महर्षि ने शिकारी को श्राप दे दिया था। सारस हमेशा जोड़ों में ही नजर आता है।
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विश्व सारस दिवस पर पथरी गांव में वन विभाग द्वारा आयोजित सारस संरक्षण गोष्ठी में कृषि विश्वविद्यालय के पक्षी विशेषज्ञ कौशल सिंह ने कहा कि सारस पक्षी का दांपत्य जीवन बेमिसाल है। यह पूरे जीवन में सिर्फ एक बार अपना जीवन साथी चुनता है। जोड़ीदार की मौत हो जाने पर कभी दूसरा साथी चुनता। अक्सर तो वियोग में अपने प्राण त्याग देता है।
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प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) एमपी गौतम ने कहा कि दुनिया में सारस तेजी से विलुप्त हो रहे हैं। लेकिन भारत ऐसा देश है जहां सारस पक्षी काफी तादाद में पाए जाते हैं। उड़ने वाले पक्षियों में सारस सबसे बड़ा है। यह किसानों का मित्र भी है। पर्यावरण संरक्षण में सारस की खास भूमिका है। डीएफओ ने सारस संरक्षण समिति गठित करते हुए आशीष कुमार पुत्र राजेंद्र कुमार को सारस मित्र के रूप में चयनित किया है।
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कृषि विश्वविद्यालय में वानकी विभाग के प्रो.डॉ. ऐश्वर्य महेश्वरी ने कहा कि सारस के अंडों को आवारा कुत्तों से ग्रामीण बचाएं। उन्होंने कहा कि पथरी गांव में इतने अधिक सारस पाए जाने पर यहां के ग्रामीणों को सहृदयता है। सारस संरक्षण में अच्छा कार्य के लिए पथरी गांव के प्रहलाद प्रजापति, वीरेंद्र शिवहरे, सत्यपाल सिंह, राजेंद्र कुमार और हेमा को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
सारस विश्व का सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी है। इसे उत्तर प्रदेश में राजकीय पक्षी का दर्जा हासिल है। यह खेत, नदी, तालाब, मैदान आदि मेें पाया जाता है। सारस का सांस्कृतिक महत्व भी है। रामायण की प्रथम कविता का श्रेय सारस को है। इसकी शुरुआत प्रणयरत सारस युगल के वर्णन से हुई है। महर्षि वाल्मीकि इसके दृष्टा हैं। तभी शिकारी ने प्रणयरत सारस युगल को मार दिया। जोड़े के दूसरे सारस ने जीवन साथी की मौत पर वियोग में वहीं प्राण त्याग दिए। इस पर महर्षि ने शिकारी को श्राप दे दिया था। सारस हमेशा जोड़ों में ही नजर आता है।