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178 को मलेरिया ने जकड़ा
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मानसूनी मौसम में 178 को मलेरिया ने जकड़ा
मलेरिया विभाग की जांच में उजागर हुए मरीज
बारिश और बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा
स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में लगाए कैंप
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। बारिश और बाढ़ ने जिले में मलेरिया के मरीज पैदा कर दिए हैं। मानसूनी मौसम के तीन महीनों में मलेरिया विभाग ने 178 मरीजों को मलेरिया पीड़ित पाया है। विभाग का दावा है कि डेंगू और चिकनगुनिया के कोई मरीज फिलहाल नहीं मिले हैं। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें कैंप लगाकर इलाज कर रही हैं।
बारिश के साथ नदियों की बाढ़ में जिले के दो दर्जन से ज्यादा गांव जलमग्न हुए। तमाम खेतों और निचले इलाकों में काफी दिनों से जलभराव है। ऐसे हालात में संचारी रोग, वायरल बुखार, चिकनगुनिया, डेंगू, डायरिया, हैजा इत्यादि बीमारियों का खतरा बढ़ा हुआ है। जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि सीएमओ की अध्यक्षता में गठित टीमें बाढ़ ग्रस्त इलाकों में भ्रमण कर चेकअप और इलाज कर रही हैं। ग्रामीणों को क्लोरीन की गोली दी जा रही है। कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डाला जा रहा है। जल भराव व अन्य स्थानों में दवाएं छिड़की जा रही हैं। ओआरएस के पैकेट बांटे जा रहे हैं। जहां बुखार के ज्यादा मरीज मिलते हैं। वहां ब्लड की स्लाइड तैयार की जा रही है। उधर, जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संपूर्णानंद मिश्र ने बताया कि संक्रामक रोग के मरीजों के लिए जिला अस्पताल में विशेष वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा ट्रामा सेंटर और इमर्जेंसी में भी 24 घंटे सेवाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल के क्षेत्रीय डायग्नोस्टिक सेंटर में मलेरिया व टाइफाइड जैसी बीमारियों की जांच की जाती है। बचाव के बारे में बताया कि व्यक्तिगत सफाई, बाहरी खाने से परहेज, स्वच्छ पानी का इस्तेमाल, पूरी बांह के कपड़े और मच्छरदानी का प्रयोग करें। आसपास कहीं जलभराव न होने दें और फल-सब्जियां अच्छी तरह धोकर पकाकर खायें।
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मलेरिया विभाग की जांच में उजागर हुए मरीज
बारिश और बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा
स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों में लगाए कैंप
अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। बारिश और बाढ़ ने जिले में मलेरिया के मरीज पैदा कर दिए हैं। मानसूनी मौसम के तीन महीनों में मलेरिया विभाग ने 178 मरीजों को मलेरिया पीड़ित पाया है। विभाग का दावा है कि डेंगू और चिकनगुनिया के कोई मरीज फिलहाल नहीं मिले हैं। बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमें कैंप लगाकर इलाज कर रही हैं।
बारिश के साथ नदियों की बाढ़ में जिले के दो दर्जन से ज्यादा गांव जलमग्न हुए। तमाम खेतों और निचले इलाकों में काफी दिनों से जलभराव है। ऐसे हालात में संचारी रोग, वायरल बुखार, चिकनगुनिया, डेंगू, डायरिया, हैजा इत्यादि बीमारियों का खतरा बढ़ा हुआ है। जिला मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार ने बताया कि सीएमओ की अध्यक्षता में गठित टीमें बाढ़ ग्रस्त इलाकों में भ्रमण कर चेकअप और इलाज कर रही हैं। ग्रामीणों को क्लोरीन की गोली दी जा रही है। कुओं में ब्लीचिंग पाउडर डाला जा रहा है। जल भराव व अन्य स्थानों में दवाएं छिड़की जा रही हैं। ओआरएस के पैकेट बांटे जा रहे हैं। जहां बुखार के ज्यादा मरीज मिलते हैं। वहां ब्लड की स्लाइड तैयार की जा रही है। उधर, जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संपूर्णानंद मिश्र ने बताया कि संक्रामक रोग के मरीजों के लिए जिला अस्पताल में विशेष वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा ट्रामा सेंटर और इमर्जेंसी में भी 24 घंटे सेवाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल के क्षेत्रीय डायग्नोस्टिक सेंटर में मलेरिया व टाइफाइड जैसी बीमारियों की जांच की जाती है। बचाव के बारे में बताया कि व्यक्तिगत सफाई, बाहरी खाने से परहेज, स्वच्छ पानी का इस्तेमाल, पूरी बांह के कपड़े और मच्छरदानी का प्रयोग करें। आसपास कहीं जलभराव न होने दें और फल-सब्जियां अच्छी तरह धोकर पकाकर खायें।
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