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मंडल में फर्जी मिले 16,635 शौचालय
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बांदा। चित्रकूटधाम मंडल में शौचालय निर्माण में की गई आंकड़ेबाजी की परतें खुलने लगी हैं। शासन के निर्देश पर पिछले माह कराए गए सत्यापन में 16,635 शौचालय सत्यापन टीमों को ढूंढे नहीं मिले, जबकि अभिलेखों में ये दर्ज हैं। पंचायतीराज विभाग ने रिपोर्ट सरकार को भेज दी है।
भारत सरकार द्वारा वर्ष 2012 में ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज विभाग के माध्यम शौचालयविहीन परिवारों का बेसलाइन सर्वे कराया था। मंडल के चारों जिलों में 4.10 लाख परिवार शौचालय विहीन पाए गए थे। ऐसे लोगों के नाम भी सूची में दर्ज किए गए हैं, जो गांव में रहते ही नहीं थे। इसके बाद भी पंचायतीराज विभाग इसी सूची के आधार पर शौचालय आवंटित करता रहा। इस खेल की शासन को शिकायत मिली। इस पर शासन ने सितंबर माह में सूची और पात्रों का विभागीय सत्यापन कराया।
सत्यापन में अंधरेगर्दी का खुलासा हुआ। मंडल के चारों जिलों में सूची में दर्ज 16,635 लोग फर्जी पाए गए। ये न तो संबंधित गांव के निवासी हैं और न ही उनके रहने का कोई रिकार्ड है। इसके अलावा 16,285 नाम ऐसे पाए गए, जिनमें त्रुटियां हैं। बड़ी संख्या में अपात्रों को शौचालय का लाभ दे दिया गया। यह रिपोर्ट पंचायतीराज विभाग ने राज्य और केंद्र सरकार को भेजी है।
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पात्र और सत्यापन में फर्जी व गलत नामों का ब्योरा
जनपद सर्वे में पात्र सत्यापन में फर्जी गलत नाम
बांदा 1,35,095 11,629 7967
चित्रकूट 1,00,132 890 1116
महोबा 90,116 4,116 2923
हमीरपुर 85,129 00 4279
योग 4,10,472 16,635 16,285
ग्राम पंचायतों से होगी धन की वापसी
ग्राम पंचायतों को शासन ने शौचालयों के सापेक्ष धनराशि मुहैया करा दी है। विभाग अब इस बात की जांच पड़ताल में लगा है कि कहीं अपात्रों को शौचालय निर्माण की धनराशि तो नहीं दे दी गई। अधिकारी दबी जुबान कह रहे हैं कि जो नाम फर्जी पाए गए हैं उनसे धनराशि ग्राम पंचायतों को वापस दिलाई जाएगी।
शासन को भेजी दी गई है सूची
चित्रकूटधाम मंडल के पंचायतीराज विभाग उप निदेशक दिनेश सिंह ने बताया कि बेसलाइन सर्वे स्वच्छ भारत मिशन के पूर्व का है। शौचालय विहीन परिवारों को इस योजना में शामिल किया गया है। सत्यापन में पाए गए फर्जी व गलत नामों की सूची शासन को अपडेशन व डिलीशन के लिए भेज दी गई है।
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भारत सरकार द्वारा वर्ष 2012 में ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती राज विभाग के माध्यम शौचालयविहीन परिवारों का बेसलाइन सर्वे कराया था। मंडल के चारों जिलों में 4.10 लाख परिवार शौचालय विहीन पाए गए थे। ऐसे लोगों के नाम भी सूची में दर्ज किए गए हैं, जो गांव में रहते ही नहीं थे। इसके बाद भी पंचायतीराज विभाग इसी सूची के आधार पर शौचालय आवंटित करता रहा। इस खेल की शासन को शिकायत मिली। इस पर शासन ने सितंबर माह में सूची और पात्रों का विभागीय सत्यापन कराया।
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सत्यापन में अंधरेगर्दी का खुलासा हुआ। मंडल के चारों जिलों में सूची में दर्ज 16,635 लोग फर्जी पाए गए। ये न तो संबंधित गांव के निवासी हैं और न ही उनके रहने का कोई रिकार्ड है। इसके अलावा 16,285 नाम ऐसे पाए गए, जिनमें त्रुटियां हैं। बड़ी संख्या में अपात्रों को शौचालय का लाभ दे दिया गया। यह रिपोर्ट पंचायतीराज विभाग ने राज्य और केंद्र सरकार को भेजी है।
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पात्र और सत्यापन में फर्जी व गलत नामों का ब्योरा
जनपद सर्वे में पात्र सत्यापन में फर्जी गलत नाम
बांदा 1,35,095 11,629 7967
चित्रकूट 1,00,132 890 1116
महोबा 90,116 4,116 2923
हमीरपुर 85,129 00 4279
योग 4,10,472 16,635 16,285
ग्राम पंचायतों से होगी धन की वापसी
ग्राम पंचायतों को शासन ने शौचालयों के सापेक्ष धनराशि मुहैया करा दी है। विभाग अब इस बात की जांच पड़ताल में लगा है कि कहीं अपात्रों को शौचालय निर्माण की धनराशि तो नहीं दे दी गई। अधिकारी दबी जुबान कह रहे हैं कि जो नाम फर्जी पाए गए हैं उनसे धनराशि ग्राम पंचायतों को वापस दिलाई जाएगी।
शासन को भेजी दी गई है सूची
चित्रकूटधाम मंडल के पंचायतीराज विभाग उप निदेशक दिनेश सिंह ने बताया कि बेसलाइन सर्वे स्वच्छ भारत मिशन के पूर्व का है। शौचालय विहीन परिवारों को इस योजना में शामिल किया गया है। सत्यापन में पाए गए फर्जी व गलत नामों की सूची शासन को अपडेशन व डिलीशन के लिए भेज दी गई है।