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बायोमीट्रिक राशन वितरण प्रक्रिया बनी गले की फांस
Updated Tue, 18 Jul 2017 11:50 PM IST
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बांदा। आपूर्ति विभाग में हाईटेक व्यवस्था गरीब राशन कार्ड धारकों के लिए गले का फांस बन गई है। आधार नंबर लिंक न होने और बायोमीट्रिक मशीन में कार्डधारकों के अंगूठा मैच न होने से हजारों की संख्या में उपभोक्ताओं को कोटेदारों ने राशन देने से इनकार कर दिया है। तमाम गरीबों के घर फांकाकशी की नौबत आ गई है।
नगरीय क्षेत्रों की 81 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में जुलाई माह से बायोमीट्रिक राशन वितरण व्यवस्था लागू हो गई है। इसमें आधार कार्ड लिंक होना अनिवार्य है। तमाम राशनकार्ड धारकों के आधार कार्ड अभी तक लिंक नहीं हो सके। उन्हें इस माह का राशन नहीं मिल रहा है। भूखे प्यासे गरीब दिनभर कोटे की दुकानों में गिड़गिड़ा रहे है। तमाम खिसियाए कार्डधारक हंगामा कर रहे हैं।
दबंग कोटेदार उनसे बदसलूकी पर आमादा हैं। राशन वितरण में सिर्फ यही एक दिक्कत नहीं है। कार्डधारकों के सामने दूसरी दिक्कत बायोमीट्रिक में अंगूठों का मैच न करना है। ऑनलाइन सेवा से जुड़ने के बाद बायोमीट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान लिया जाता है। इसके बाद ही कार्डधारक के परिवार का पूरा ब्योरा मशीन पर दिखता है। संतुष्ट होने के बाद कोटेदार उसे राशन देता है।
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यदि अंगूठा रखने के बाद अचानक नेटवर्क चला जाता है तो उपभोक्ताओं को नेटवर्क आने तक राशन की दुकान पर ही समय बर्बाद करना पड़ता है। कोटेदार भी परेशान होते हैं। ऐसे में आनलाइन राशन वितरण प्रणाली उपभोक्ताओं व कोटेदारों के लिए बड़ी समस्या बनी है।
कोटेदार संघ अध्यक्ष गया प्रसाद साहू ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं का अंगूठा मिलान नहीं कर रहा है, उसे राशन दिए बिना लौटाना मजबूरी है। अधिकारियों ने इसका दूसरा कोई विकल्प या रास्ता नहीं बताया है। जिला पूर्ति अधिकारी कुंवर दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि शुरुआत में कुछ परेशानियां आ रही हैं।
धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। जिन उपभोक्ताओं राशन नहीं मिला उन्हें पूर्ति निरीक्षकों की मौजूदगी में वितरित कराया जाएगा। बायोमैट्रिक मशीन में नेटवर्क व अन्य समस्या दूर के लिए टेक्निकल सपोर्टर आशीष शुक्ला को जिले में शासन की तरफ लगाया गया है।’
-आधार कार्ड लिंक नहीं तो नहीं मिल रहा खाद्यान्न
-अंगूठा मैच न होना भी उपभोक्ताओं के जी का जंजाल
-नगर की 81 दुकानों में किया जा रहा मशीन से वितरण
अमर उजाला ब्यूरो
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नगरीय क्षेत्रों की 81 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में जुलाई माह से बायोमीट्रिक राशन वितरण व्यवस्था लागू हो गई है। इसमें आधार कार्ड लिंक होना अनिवार्य है। तमाम राशनकार्ड धारकों के आधार कार्ड अभी तक लिंक नहीं हो सके। उन्हें इस माह का राशन नहीं मिल रहा है। भूखे प्यासे गरीब दिनभर कोटे की दुकानों में गिड़गिड़ा रहे है। तमाम खिसियाए कार्डधारक हंगामा कर रहे हैं।
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दबंग कोटेदार उनसे बदसलूकी पर आमादा हैं। राशन वितरण में सिर्फ यही एक दिक्कत नहीं है। कार्डधारकों के सामने दूसरी दिक्कत बायोमीट्रिक में अंगूठों का मैच न करना है। ऑनलाइन सेवा से जुड़ने के बाद बायोमीट्रिक मशीन पर अंगूठे का निशान लिया जाता है। इसके बाद ही कार्डधारक के परिवार का पूरा ब्योरा मशीन पर दिखता है। संतुष्ट होने के बाद कोटेदार उसे राशन देता है।
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यदि अंगूठा रखने के बाद अचानक नेटवर्क चला जाता है तो उपभोक्ताओं को नेटवर्क आने तक राशन की दुकान पर ही समय बर्बाद करना पड़ता है। कोटेदार भी परेशान होते हैं। ऐसे में आनलाइन राशन वितरण प्रणाली उपभोक्ताओं व कोटेदारों के लिए बड़ी समस्या बनी है।
कोटेदार संघ अध्यक्ष गया प्रसाद साहू ने कहा कि जिन उपभोक्ताओं का अंगूठा मिलान नहीं कर रहा है, उसे राशन दिए बिना लौटाना मजबूरी है। अधिकारियों ने इसका दूसरा कोई विकल्प या रास्ता नहीं बताया है। जिला पूर्ति अधिकारी कुंवर दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि शुरुआत में कुछ परेशानियां आ रही हैं।
धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा। जिन उपभोक्ताओं राशन नहीं मिला उन्हें पूर्ति निरीक्षकों की मौजूदगी में वितरित कराया जाएगा। बायोमैट्रिक मशीन में नेटवर्क व अन्य समस्या दूर के लिए टेक्निकल सपोर्टर आशीष शुक्ला को जिले में शासन की तरफ लगाया गया है।’
-आधार कार्ड लिंक नहीं तो नहीं मिल रहा खाद्यान्न
-अंगूठा मैच न होना भी उपभोक्ताओं के जी का जंजाल
-नगर की 81 दुकानों में किया जा रहा मशीन से वितरण
अमर उजाला ब्यूरो