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मच्छरों ने उड़ाई बंदियों की नींद
Updated Sun, 25 Nov 2018 11:36 PM IST
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बांदा। अपराधों से समाज की नींद उड़ाने वाले दबंगों और अपराधियों की नींद मच्छरों ने उड़ा दी है। जेल की बैरकों में दिन गुजार रहे बाहुबली और अपराधी मच्छरों के आतंक से परेशान हैं। इनमें लगभग एक दर्जन बंदी मच्छरजनित रोगों की चपेट में आकर जेल अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। मच्छरों की भरमार जेल में सफाई व्यवस्था पंगु होने से हुई है।
जिला कारागार में लगभग आठ सौ बंदी हैं। इन्हें जेल की 16 बैरकों में रखा गया है। बंदियों के बीच से आई खबरों में बताया गया है कि जेल की बैरकों में मच्छरों की भरमार है। शाम ढलते ही मच्छर बंदियों का जीना मुहाल कर देते हैं। इनके सफाए की कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे। नतीजतन मच्छरजनित मलेरिया जैसे मर्ज फैल रहे हैं। यह कभी बड़ा रूप ले सकते हैं।
पेशी पर आए बंदियों ने बताया कि एक दर्जन से अधिक बंदी मलेरिया, टाइफाइड जैसी बीमारी से पीड़ित हैं। इनका इलाज जेल अस्पताल में हो रहा है। अस्पताल में ब्लड जांच की व्यवस्था नहीं है और न ही पर्याप्त दवाएं हैं। प्रभारी कारागार अधीक्षक आरके सिंह का कहना है कि जेल में सफाई बेहतर है।
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उनकी दलील है कि जेल के बगल से नाला है। जिसकी महीनों से सफाई नहीं हुई है। जेल के बाहर जल निकासी की व्यवस्था न होने से नालियां बजबजा रही हैं। जेल का कूड़ा भी नियमित नहीं उठता है। यही सब मच्छरों की जड़ हैं। नगर पालिका को कई बार लिखा गया है। सीएमओ को पत्र भेजकर जेल के अंदर-बाहर मलेरिया निरोधक कार्रवाई कराए जाने की मांग की गई है। जेल में मलेरिया से कोई बंदी पीड़ित नहीं है।
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जिला कारागार में लगभग आठ सौ बंदी हैं। इन्हें जेल की 16 बैरकों में रखा गया है। बंदियों के बीच से आई खबरों में बताया गया है कि जेल की बैरकों में मच्छरों की भरमार है। शाम ढलते ही मच्छर बंदियों का जीना मुहाल कर देते हैं। इनके सफाए की कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे। नतीजतन मच्छरजनित मलेरिया जैसे मर्ज फैल रहे हैं। यह कभी बड़ा रूप ले सकते हैं।
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पेशी पर आए बंदियों ने बताया कि एक दर्जन से अधिक बंदी मलेरिया, टाइफाइड जैसी बीमारी से पीड़ित हैं। इनका इलाज जेल अस्पताल में हो रहा है। अस्पताल में ब्लड जांच की व्यवस्था नहीं है और न ही पर्याप्त दवाएं हैं। प्रभारी कारागार अधीक्षक आरके सिंह का कहना है कि जेल में सफाई बेहतर है।
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उनकी दलील है कि जेल के बगल से नाला है। जिसकी महीनों से सफाई नहीं हुई है। जेल के बाहर जल निकासी की व्यवस्था न होने से नालियां बजबजा रही हैं। जेल का कूड़ा भी नियमित नहीं उठता है। यही सब मच्छरों की जड़ हैं। नगर पालिका को कई बार लिखा गया है। सीएमओ को पत्र भेजकर जेल के अंदर-बाहर मलेरिया निरोधक कार्रवाई कराए जाने की मांग की गई है। जेल में मलेरिया से कोई बंदी पीड़ित नहीं है।