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1121 फाइलेरिया रोगी, एमडीए अभियान शुरू
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फाइलेरिया की दवा खाकर एमडीए अभियान की शुरूआत करते सीएमओ डा.संतोष कुमार व अन्य।
- फोटो : BANDA
बांदा। फाइलेरिया से बचाव के लिए एमडीए अभियान के लिए चिह्नित प्रदेश के 31 जिलों में शामिल बांदा जिले में भी सोमवार से फाइलेरिया की दवा खिलाने का अभियान शुरू हो गया। यह 29 फरवरी तक चलेगा। जिले में फाइलेरिया की गिरफ्त में 1121 रोगी हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी ने पैरा मेडिकल कालेज एंड नर्सिंग स्कूल में खुद गोली खाकर एमडीए अभियान की शुरुआत की।
उन्होंने बताया कि लिमफैटिक फाइलेरियासिस के संक्रमण से बचाव के लिए मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान चलाया जा रहा है। इसमें बुंदेलखंड के बांदा, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा जिले भी शामिल हैं। हर व्यक्ति को यह दवा लेनी है। सिर्फ दो साल से कम उम्र के बच्चे या गर्भवती महिलाएं अथवा गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को यह दवा नहीं दी जाएंगी।
कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आरएन प्रसाद ने बताया कि इस अभियान में दी जा रही दवाइयां विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अनुशंसित हैं। आयु के आधार पर डोज निर्धारित है। कहा कि इन प्रभावित क्षेत्र में रह रहे सभी लोगों को फाइलेरिया का खतरा है, इसलिए दवा खानी जरूरी है।
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इस अवसर पर अपर सीएमओ डॉ. बीपी वर्मा, डिप्टी सीएमओ डा.एनके सिन्हा, कुष्ठ अधिकारी डॉ. एसपी द्विवेदी, मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार, सहायक मलेरिया अधिकारी लालसाहब सिंह, भावना शर्मा सहित पैरा मेडिकल कालेज की डॉ. जरीना खान, डब्ल्यूएचओ को डॉ. संतोष गुप्ता, डीपीएम कुशल यादव, यूनिसेफ फुजैल अहमद सिद्दीकी, पीसीआई के अनूप दुबे इत्यादि उपस्थित रहे।
607 लिंफोएडिमा और 514 हाइड्रोसील के मरीज
बांदा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में फाइलेरिया के 1121 रोगी हैं। इनमें 607 लिंफोएडिमा के और 514 हाइड्रोसील के मरीज शामिल हैं। सीएमओ के मुताबिक फाइलेरिया से शरीर के अंगों में असामान्य सूजन आ जाती है। पैरों में सूजन (लिंफोएडिमा) और हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) से काम करने की क्षमता में भी असर पड़ता है।
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उन्होंने बताया कि लिमफैटिक फाइलेरियासिस के संक्रमण से बचाव के लिए मॉस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान चलाया जा रहा है। इसमें बुंदेलखंड के बांदा, जालौन, हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा जिले भी शामिल हैं। हर व्यक्ति को यह दवा लेनी है। सिर्फ दो साल से कम उम्र के बच्चे या गर्भवती महिलाएं अथवा गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को यह दवा नहीं दी जाएंगी।
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कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. आरएन प्रसाद ने बताया कि इस अभियान में दी जा रही दवाइयां विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अनुशंसित हैं। आयु के आधार पर डोज निर्धारित है। कहा कि इन प्रभावित क्षेत्र में रह रहे सभी लोगों को फाइलेरिया का खतरा है, इसलिए दवा खानी जरूरी है।
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इस अवसर पर अपर सीएमओ डॉ. बीपी वर्मा, डिप्टी सीएमओ डा.एनके सिन्हा, कुष्ठ अधिकारी डॉ. एसपी द्विवेदी, मलेरिया अधिकारी पूजा अहिरवार, सहायक मलेरिया अधिकारी लालसाहब सिंह, भावना शर्मा सहित पैरा मेडिकल कालेज की डॉ. जरीना खान, डब्ल्यूएचओ को डॉ. संतोष गुप्ता, डीपीएम कुशल यादव, यूनिसेफ फुजैल अहमद सिद्दीकी, पीसीआई के अनूप दुबे इत्यादि उपस्थित रहे।
607 लिंफोएडिमा और 514 हाइड्रोसील के मरीज
बांदा। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में फाइलेरिया के 1121 रोगी हैं। इनमें 607 लिंफोएडिमा के और 514 हाइड्रोसील के मरीज शामिल हैं। सीएमओ के मुताबिक फाइलेरिया से शरीर के अंगों में असामान्य सूजन आ जाती है। पैरों में सूजन (लिंफोएडिमा) और हाइड्रोसील (अंडकोष की थैली में सूजन) से काम करने की क्षमता में भी असर पड़ता है।