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‘ग्लैंडर्स फार्सी’ को लेकर सुस्त पड़ा पशुपालन महकमा
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:00 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बांदा। जानलेवा व लाइलाज ‘ग्लैंडर्स फार्सी’ बीमारी को लेकर पशुपालन विभाग बिना बजट सुस्त पड़ गया है। पिछले दिनों हिसार (हरियाणा) से आई जांच में छह नमूने पाजिटिव मिले थे।
इनमें ज्यादातर खच्चर शहर के मर्दननाका और खुटला मोहल्ले हैं। बीमारी की पुष्टि होने के बाद मारे गए खच्चरों के मालिकों को मुआवजा भी नहीं मिला। पशुपालन विभाग ने घोड़ों, खच्चरों और गधों के सैंपल लेने और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए शासन से 16.20 लाख रुपये की डिमांड की है।
मई में जांच के लिए हिसार (हरियाणा) स्थित अश्व अनुसंधान केंद्र भेजे गए 70 नमूनों में से छह पॉजिटिव आए हैं।
अपर निदेशक पशुपालन अशोक कुमार सिंह के निर्देश पर पशु चिकित्सकों ने पीड़ित खच्चरों को मार दिया। इसमें खच्चर मालिकों को 16-16 हजार रुपये प्रति जानवर मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन मर्दननाका निवासी मुन्नी देवी, खुटला की सोनिया व सरोज देवी के मारे गए खच्चरों का अभी तक मुआवजा नहीं मिला।
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इधर, पशुपालन विभाग ने खच्छरों के जरिये मनुष्यों में तेजी से फैलने वाली इस गंभीर बीमारी को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है, जबकि ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी से मंडल मुख्यालय से ही बेंदाघाट पहुंची है। यहां बालू बंद होने के बाद से मर्दननाका व खुटला के ज्यादातर खच्चर बेंदाघाट में ईंट आदि की ढुलाई में लगे हैं।
पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी जिले में करीब 2000 गधे और खच्चर होने का आंकड़ा लगा रहे हैं। इसमें 100 जानवरों में ग्लैंडर्स फारसी पॉजिटिव होने की आशंका है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सतीश कुमार अग्रवाल ने कहा है कि विभाग में इस बीमारी में अभियान चलाने को बजट नहीं है।
शासन से मारे गए खच्चरों का मुआवजा देने के लिए 96000 और सीरो सर्विलांस (सैंपल भरने को) के लिए 16.20 लाख रुपये मांगे गए हैं। बजट आते ही इस बीमारी को लेकर अभियान तेज किया जाएगा।
-गंभीर बीमारी से निपटने के लिए शासन ने नहीं भेजा बजट
-जांच रिपोर्ट में पाजिटिव पाए गए शहर के छह खच्चर
सीवीओ ने शासन को भेजी 16.20 लाख की डिमांड
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बांदा। जानलेवा व लाइलाज ‘ग्लैंडर्स फार्सी’ बीमारी को लेकर पशुपालन विभाग बिना बजट सुस्त पड़ गया है। पिछले दिनों हिसार (हरियाणा) से आई जांच में छह नमूने पाजिटिव मिले थे।
इनमें ज्यादातर खच्चर शहर के मर्दननाका और खुटला मोहल्ले हैं। बीमारी की पुष्टि होने के बाद मारे गए खच्चरों के मालिकों को मुआवजा भी नहीं मिला। पशुपालन विभाग ने घोड़ों, खच्चरों और गधों के सैंपल लेने और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए शासन से 16.20 लाख रुपये की डिमांड की है।
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मई में जांच के लिए हिसार (हरियाणा) स्थित अश्व अनुसंधान केंद्र भेजे गए 70 नमूनों में से छह पॉजिटिव आए हैं।
अपर निदेशक पशुपालन अशोक कुमार सिंह के निर्देश पर पशु चिकित्सकों ने पीड़ित खच्चरों को मार दिया। इसमें खच्चर मालिकों को 16-16 हजार रुपये प्रति जानवर मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन मर्दननाका निवासी मुन्नी देवी, खुटला की सोनिया व सरोज देवी के मारे गए खच्चरों का अभी तक मुआवजा नहीं मिला।
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इधर, पशुपालन विभाग ने खच्छरों के जरिये मनुष्यों में तेजी से फैलने वाली इस गंभीर बीमारी को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है, जबकि ग्लैंडर्स फार्सी बीमारी से मंडल मुख्यालय से ही बेंदाघाट पहुंची है। यहां बालू बंद होने के बाद से मर्दननाका व खुटला के ज्यादातर खच्चर बेंदाघाट में ईंट आदि की ढुलाई में लगे हैं।
पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी जिले में करीब 2000 गधे और खच्चर होने का आंकड़ा लगा रहे हैं। इसमें 100 जानवरों में ग्लैंडर्स फारसी पॉजिटिव होने की आशंका है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सतीश कुमार अग्रवाल ने कहा है कि विभाग में इस बीमारी में अभियान चलाने को बजट नहीं है।
शासन से मारे गए खच्चरों का मुआवजा देने के लिए 96000 और सीरो सर्विलांस (सैंपल भरने को) के लिए 16.20 लाख रुपये मांगे गए हैं। बजट आते ही इस बीमारी को लेकर अभियान तेज किया जाएगा।
-गंभीर बीमारी से निपटने के लिए शासन ने नहीं भेजा बजट
-जांच रिपोर्ट में पाजिटिव पाए गए शहर के छह खच्चर
सीवीओ ने शासन को भेजी 16.20 लाख की डिमांड