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बंद मिल चालू कराने वाले प्रत्याशी को मजदूरों के 10 हजार वोट
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बैठक में हाथ उठाकर शपथ लेते कताई मिल मजदूर। संवाद
- फोटो : BANDA
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बांदा। बंद पड़ी कताई मिल को विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाने के लिए मिल मजदूरों ने बिगुल बजा दिया है। हाथ उठाकर सामूहिक शपथ ली है कि जो मिल चालू कराने और मजदूरों के हक की बात करेगा उसी को मजदूर और उनके परिवार वोट करेंगे। मिल मजदूरों ने अपने परिवारों के मतदाताओं की संख्या लगभग 10 हजार बताई है। चित्रकूटधाम मंडल की इकलौती कताई मिल 1992 से बंद पड़ी है।
रविवार को मिल गेट नंबर-दो पर कताई मिल मजदूर मोर्चा की बैठक में अध्यक्ष रामप्रवेश यादव ने कहा कि लगभग तीन दशकों से मिल बंद है। इस मिल में 1800 कर्मचारी थे। मिल बंदी के समय 1400 मजदूरों को काम मिला था। बंदी के बाद यह सब बेरोजगार हो गए। उन्होंने कहा कि इस अवधि में छह चुनाव हो चुके हैं। कई दलों की सरकारें बनीं। लेकिन मिल चालू करने की किसी ने जरूरत नहीं समझी।
मजदूर तंगहाली, बीमारी, बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। कई इसी दशा में चल बसे हैं। कहा कि एक तरफ सरकार असंगठित मजदूरों को गुजारा भत्ता देने का ढिंढोरा पीट रही है और दूसरी ओर मिल बंद कर उसके मजदूरों को भुखमरी के मुहाने पर ढकेल दिया है। मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि मिल मजदूर परिवारों में लगभग 10 हजार लोग हैं। अन्य मजदूर भी समर्थन में हैं।
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बैठक में मौजूद मिल मजदूरों ने हाथ उठाकर सामूहिक शपथ ली कि जो प्रत्याशी मिल चालू कराने और मजदूरों की बकाया देनदारियां दिलाने की गारंटी लेगा, उसी को मजदूर और उनके परिवार वोट करेंगे। साथ ही उसके लिए प्रचार भी करेंगे। मोर्चा उपाध्यक्ष अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड की इकलौती मिल को चालू कराने में राजनीतिक दलों को कोई दिलचस्पी नहीं है।
उन्हें सिर्फ यहां गिट्टी और मौरंग दिखाई दे रही है। पलायन और मजदूरों व किसानों की आत्महत्याएं से आंखें मूंदे हुए हैं। हम ऐसे में ऐसा विधायक बनाएंगे जो उनके हित की बात करेगा। बैठक में दन्ना प्रसाद, किशोरीलाल, रामकिशोर, गया प्रसाद, ओमप्रकाश पांडेय, कृष्ण कुमार सिंह, रामचंद्र, सभाजीत यादव, चंद्रभान, कल्लू वर्मा, हरिश्चंद्र, विजय सिंह, बब्बू खां, जजभान सिंह और राजबहादुर सिंह आदि मजदूर शामिल रहे।
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रविवार को मिल गेट नंबर-दो पर कताई मिल मजदूर मोर्चा की बैठक में अध्यक्ष रामप्रवेश यादव ने कहा कि लगभग तीन दशकों से मिल बंद है। इस मिल में 1800 कर्मचारी थे। मिल बंदी के समय 1400 मजदूरों को काम मिला था। बंदी के बाद यह सब बेरोजगार हो गए। उन्होंने कहा कि इस अवधि में छह चुनाव हो चुके हैं। कई दलों की सरकारें बनीं। लेकिन मिल चालू करने की किसी ने जरूरत नहीं समझी।
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मजदूर तंगहाली, बीमारी, बेरोजगारी से जूझ रहे हैं। कई इसी दशा में चल बसे हैं। कहा कि एक तरफ सरकार असंगठित मजदूरों को गुजारा भत्ता देने का ढिंढोरा पीट रही है और दूसरी ओर मिल बंद कर उसके मजदूरों को भुखमरी के मुहाने पर ढकेल दिया है। मोर्चा अध्यक्ष ने कहा कि मिल मजदूर परिवारों में लगभग 10 हजार लोग हैं। अन्य मजदूर भी समर्थन में हैं।
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बैठक में मौजूद मिल मजदूरों ने हाथ उठाकर सामूहिक शपथ ली कि जो प्रत्याशी मिल चालू कराने और मजदूरों की बकाया देनदारियां दिलाने की गारंटी लेगा, उसी को मजदूर और उनके परिवार वोट करेंगे। साथ ही उसके लिए प्रचार भी करेंगे। मोर्चा उपाध्यक्ष अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि बुंदेलखंड की इकलौती मिल को चालू कराने में राजनीतिक दलों को कोई दिलचस्पी नहीं है।
उन्हें सिर्फ यहां गिट्टी और मौरंग दिखाई दे रही है। पलायन और मजदूरों व किसानों की आत्महत्याएं से आंखें मूंदे हुए हैं। हम ऐसे में ऐसा विधायक बनाएंगे जो उनके हित की बात करेगा। बैठक में दन्ना प्रसाद, किशोरीलाल, रामकिशोर, गया प्रसाद, ओमप्रकाश पांडेय, कृष्ण कुमार सिंह, रामचंद्र, सभाजीत यादव, चंद्रभान, कल्लू वर्मा, हरिश्चंद्र, विजय सिंह, बब्बू खां, जजभान सिंह और राजबहादुर सिंह आदि मजदूर शामिल रहे।
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बांदा की बंद पड़ी कताई मिल का जर्जर हो रहा भवन। - फोटो : BANDA